नई दिल्ली। नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (NCLAT) ने सोमवार को वेदांता लिमिटेड की उन दो याचिकाओं को खारिज कर दिया है, जिनमें कर्ज में डूबी जयप्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड (JAL) के लिए अडानी एंटरप्राइजेज की बोली को चुनने को चुनौती दी गई थी।
NCLAT के चेयरपर्सन अशोक भूषण और टेक्निकल मेंबर बरुण मित्रा की दो सदस्यीय बेंच ने कहा कि अपीलकर्ता (वेदांता) द्वारा ऐसा कोई आधार नहीं बनाया गया है जिससे एडजुडिकेटिंग अथॉरिटी (NCLT) के फैसले में दखल दिया जा सके।
ट्रिब्यूनल ने कहा कि इस अपील में कोई दम नहीं है और दोनों अपीलों को खारिज किया जाता है। अपीलीय ट्रिब्यूनल के अनुसार, कमिटी ऑफ क्रेडिटर्स (CoC) का फैसला संबंधित रेजोल्यूशन प्लान के समग्र मूल्यांकन पर आधारित था और इसे उनके व्यावसायिक विवेक के आधार पर लिया गया था।
NCLAT ने यह भी स्पष्ट किया कि रेजोल्यूशन प्रोफेशनल द्वारा प्लान रेजोल्यूशन प्रक्रिया के संचालन में कोई भी अनियमितता नहीं की गई है।
वेदांता ने अपनी याचिका में अपनाए गए मूल्यांकन मेट्रिक्स पर सवाल उठाया था। वेदांता का तर्क था कि उसकी बोली अडानी ग्रुप की तुलना में ग्रॉस वैल्यू के मामले में 3,400 करोड़ रुपये और नेट प्रेजेंट वैल्यू (NPV) में लगभग 500 करोड़ रुपये अधिक थी।
इस तर्क को खारिज करते हुए NCLAT ने कहा कि CoC द्वारा अडानी के प्लान के मुकाबले वेदांता के अधिक वैल्यू (3,400 करोड़ रुपये अधिक और 500 करोड़ रुपये अधिक NPV) वाले प्लान को मंजूरी न देने के फैसले को मनमाना या गलत नहीं कहा जा सकता।
इससे पहले 17 मार्च को NCLT की इलाहाबाद बेंच ने इनसॉल्वेंसी प्रक्रिया के तहत JAL के अधिग्रहण के लिए अडानी एंटरप्राइजेज लिमिटेड की 14,535 करोड़ रुपये की बोली को मंजूरी दी थी। इसी फैसले को वेदांता ने NCLAT में चुनौती दी थी।
अपीलीय ट्रिब्यूनल ने वेदांता, रेजोल्यूशन प्रोफेशनल, CoC और अडानी एंटरप्राइजेज सहित सभी पक्षों को सुनने के बाद 23 अप्रैल को अपनी सुनवाई पूरी कर ली थी।
इससे पहले 24 मार्च को NCLAT ने अडानी ग्रुप की बोली को NCLT की मंजूरी के खिलाफ वेदांता की याचिका पर कोई भी अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया था। हालांकि, यह भी कहा गया था कि यह योजना वेदांता ग्रुप की अपीलों के अंतिम नतीजे पर निर्भर करेगी।
NCLAT के इस अंतरिम आदेश को सुप्रीम कोर्ट में भी चुनौती दी गई थी, लेकिन शीर्ष अदालत ने भी रोक लगाने से इनकार कर दिया था। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया था कि यदि मॉनिटरिंग कमिटी कोई बड़ा नीतिगत फैसला लेती है, तो उसे पहले ट्रिब्यूनल की मंजूरी लेनी होगी।
JAL के अधिग्रहण की दौड़ में अडानी एंटरप्राइजेज ने वेदांता और डालमिया भारत को पीछे छोड़ दिया था। अडानी को क्रेडिटर्स के अधिकतम 89 प्रतिशत वोट मिले थे, जिसके बाद डालमिया सीमेंट (भारत) और वेदांता ग्रुप का नंबर था।
CoC ने अपने फैसले का बचाव करते हुए कहा था कि यह प्रक्रिया इनसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (IBC) के सभी नियमों के तहत की गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल सबसे अधिक बोली लगाने से ही किसी बिडर को जीतने का गारंटीकृत अधिकार नहीं मिल जाता।
क्रेडिटर्स के अनुसार, रेजोल्यूशन प्लान का मूल्यांकन केवल हेडलाइन वैल्यू पर नहीं, बल्कि अपफ्रंट कैश, व्यावहारिकता और एग्जीक्यूशन सहित कई कारकों पर किया जाता है।
JAL के पास रियल एस्टेट, सीमेंट मैन्युफैक्चरिंग, हॉस्पिटैलिटी, पावर और इंजीनियरिंग व कंस्ट्रक्शन क्षेत्र में कई बेहतरीन संपत्तियां हैं। 57,185 करोड़ रुपये के लोन डिफॉल्ट के बाद जून 2024 में इसे कॉर्पोरेट इनसॉल्वेंसी रेजोल्यूशन प्रोसेस (CIRP) में शामिल किया गया था।
JAL के प्रमुख रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स में ग्रेटर नोएडा में जेपी ग्रीन्स, जेपी ग्रीन्स विशटाउन का हिस्सा और जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पास स्थित जेपी इंटरनेशनल स्पोर्ट्स सिटी शामिल हैं।
इसके अलावा दिल्ली-NCR में इसके तीन कमर्शियल स्पेस और दिल्ली-NCR, मसूरी व आगरा में इसके पांच होटल भी हैं।
कंपनी के पास मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में चार सीमेंट प्लांट हैं और मध्य प्रदेश में कुछ लीज वाली चूना पत्थर की खदानें भी हैं।
JAL का जयप्रकाश पावर वेंचर्स लिमिटेड, यमुना एक्सप्रेसवे टोलिंग लिमिटेड, जेपी इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट लिमिटेड सहित कई अन्य अनुषंगी कंपनियों में भी निवेश है।
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