तमिलनाडु की राजनीति में एक नए युग का उदय हो गया है। अभिनेता से राजनेता बने ‘थलपति’ विजय की पार्टी, ‘तमिलगा वेत्री कड़गम’ (TVK) ने 2026 के विधानसभा चुनावों में ऐतिहासिक प्रदर्शन किया है।
शुरुआती रुझानों में TVK राज्य की सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। वह 89 से 104 सीटों पर आगे चल रही है। महज दो साल पुरानी पार्टी के लिए यह किसी चमत्कार से कम नहीं है।
सुपरस्टार जिसने चरम पर छोड़ी फिल्में
विजय समकालीन दक्षिण भारतीय सिनेमा के सबसे बड़े सुपरस्टार्स में गिने जाते हैं। उन्होंने 1984 में बतौर चाइल्ड आर्टिस्ट अपना डेब्यू किया था।
‘थिरुमलाई’ और ‘पोक्किरी’ जैसी ब्लॉकबस्टर फिल्मों ने उन्हें शोहरत की बुलंदियों पर पहुंचाया। लेकिन 51 वर्ष की उम्र में, अपने करियर के बिल्कुल चरम पर उन्होंने फिल्मों से संन्यास ले लिया। उनका मकसद जनता की सेवा करना था।
TVK: नई उम्मीद, नई विचारधारा
2 फरवरी 2024 को TVK (तमिलकम की विजय पार्टी) का आधिकारिक ऐलान हुआ। चेन्नई के पनियूर में इसका मुख्यालय है।
वैचारिक रूप से यह एक ‘सेंटर-लेफ्ट’ पार्टी है। यह डॉ. बी.आर. अंबेडकर, पेरियार और के. कामराज के सिद्धांतों से प्रेरित है।
पार्टी ने स्पष्ट रूप से धर्मनिरपेक्ष सामाजिक न्याय, समानता और दो-भाषा नीति को अपनाया है। इसने दक्षिणपंथी राजनीति को सिरे से खारिज किया है। अक्टूबर 2024 में हुए इसके पहले सम्मेलन में 8 लाख से ज्यादा लोग जुटे थे।
2026 का ऐतिहासिक चुनावी डेब्यू
तमिलनाडु में गठबंधन की राजनीति हावी रही है। इसके बावजूद, TVK ने एक बेहद साहसिक कदम उठाते हुए सभी 234 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ा।
विजय ने खुद आगे बढ़कर नेतृत्व किया। वे पेराम्बुर (चेन्नई) और तिरुचिरापल्ली ईस्ट से मैदान में उतरे। ये दोनों सीटें पहले सत्तारूढ़ DMK के पास थीं, जो सरकार को उनकी सीधी चुनौती थी।
इस चुनाव में अभूतपूर्व 85% मतदान दर्ज किया गया। विजय ने इस भारी मतदान का श्रेय उन बच्चों को दिया, जिन्होंने अपने माता-पिता को वोट डालने के लिए प्रेरित किया।
एक्सिस माय इंडिया के एग्जिट पोल के अनुसार, महिलाओं के बीच TVK का वोट शेयर लगभग 38% रहा। विजय की अपील ने जाति और क्षेत्रवाद की सीमाओं को तोड़ दिया।
द्रविड़ एकाधिकार का अंत
तमिलनाडु में पिछले छह दशकों से द्रविड़ पार्टियों (DMK और AIADMK) का निर्विवाद दबदबा रहा है। TVK की इस आंधी ने इस पुराने एकाधिकार को पूरी तरह से क्रैक कर दिया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विजय का जादू केवल उनके फैन बेस तक सीमित नहीं रहा, बल्कि आम मतदाताओं ने भी उन्हें हाथों-हाथ लिया है।
क्या विजय बनेंगे नए NTR? (समानताएं और अंतर)
राजनीतिक गलियारों में विजय की तुलना दिग्गज तेलुगु अभिनेता एन.टी. रामाराव (NTR) से हो रही है। NTR ने 1982 में तेलुगु देशम पार्टी (TDP) बनाई थी और केवल 9 महीने में आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री बन गए थे।
NTR और विजय, दोनों ने अपने स्टारडम के चरम पर राजनीति में एंट्री की। दोनों का ही कोई पारिवारिक राजनीतिक बैकग्राउंड नहीं था।
दोनों ने ही अकेले दम पर चुनाव लड़ने की रणनीति अपनाई। NTR ने आंध्र प्रदेश में कांग्रेस के प्रभुत्व को चुनौती दी थी, जबकि विजय ने तमिलनाडु में DMK-AIADMK के द्वैध शासन को ललकारा है।
हालांकि, दोनों नेताओं में कुछ बड़े अंतर भी हैं। NTR एक बेहद ओजस्वी वक्ता थे जो लंबे-लंबे डायलॉग्स याद करके बोलते थे। वहीं, विजय आमतौर पर लिखित नोट्स से अपना भाषण पढ़ते हैं।
NTR को अपनी पहली चुनावी परीक्षा में मात्र 9 महीने का समय लगा था। दूसरी ओर, विजय को अपना पहला चुनाव लड़ने में लगभग 2 साल का समय लगा।
सबसे बड़ा अंतर पार्टी संगठन का है। NTR ने अनुभवी राजनेताओं को पार्टी में शामिल करके तेजी से एक मजबूत संगठन खड़ा किया था। इसके विपरीत, TVK की आलोचना इस बात को लेकर होती है कि इसका संगठन अभी कमजोर है और यह मुख्य रूप से सलाहकारों (consultants) के भरोसे चल रही है।
इन कमियों के बावजूद, 2026 के चुनाव परिणाम बताते हैं कि थलपति विजय ने तमिलनाडु की राजनीति की पटकथा को हमेशा के लिए बदल दिया है।
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