अमेरिका में अवैध रूप से रह रहे प्रवासियों के खिलाफ नवनिर्वाचित ट्रंप प्रशासन ने अपनी कार्रवाई बेहद तेज कर दी है। इस कड़ी कार्रवाई के बीच भारतीय विदेश मंत्रालय ने एक बड़ा आधिकारिक आंकड़ा साझा किया है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, साल 2026 में अब तक 1,000 से अधिक भारतीय नागरिकों को अमेरिका से वापस भारत भेजा जा चुका है।
शुक्रवार को आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने इस स्थिति को स्पष्ट किया। उन्होंने बताया कि नई दिल्ली और वाशिंगटन अवैध प्रवासन की समस्या से निपटने के लिए बेहद बारीकी से मिलकर काम कर रहे हैं। इस सहयोग का मुख्य उद्देश्य कानूनी और वैध तरीके से यात्रा करने वाले लोगों के रास्तों को सुरक्षित रखना है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने मीडिया को सटीक आंकड़े देते हुए बताया कि चालू वर्ष 2026 में अब तक कुल 1,076 भारतीय नागरिकों को अमेरिका से डिपोर्ट किया जा चुका है। इसके साथ ही उन्होंने पिछले साल की स्थिति का भी जिक्र किया, जब 2025 के दौरान कुल 3,567 भारतीयों को अमेरिकी धरती से वापस भेजा गया था।
यह पूरा घटनाक्रम अमेरिका में बिना वैध दस्तावेजों के रह रहे लोगों के खिलाफ ट्रंप प्रशासन की हालिया राष्ट्रव्यापी सख्ती के बीच सामने आया है। भारत और अमेरिका के बीच इस समय निर्वासन, प्रवासन और गतिशीलता से जुड़े तमाम संवेदनशील मुद्दों पर लगातार बातचीत का दौर चल रहा है।
दोनों देशों के बीच हो रही इन चर्चाओं का मुख्य केंद्र बिंदु यह है कि अवैध प्रवासन पर पूरी तरह लगाम लगाई जाए। इसके साथ ही इस बात का भी विशेष ध्यान रखा जा रहा है कि इस सख्ती का असर उन लोगों पर बिल्कुल न पड़े जो पढ़ाई, नौकरी या यात्रा के लिए कानूनी तौर पर अमेरिका आते-जाते हैं।
इसी सख्त कार्रवाई के एक हिस्से के रूप में, अमेरिकी आव्रजन और सीमा शुल्क प्रवर्तन (ICE) एजेंसी ने हाल ही में 21 मई को लॉस एंजिल्स से परमिंदरपाल सिंह नाम के 26 वर्षीय भारतीय नागरिक को हिरासत में लिया था। अमेरिकी एजेंसी के मुताबिक, फिलहाल परमिंदरपाल सिंह हिरासत में है और उसे वापस भेजने की कानूनी प्रक्रिया जारी है।
भारत सरकार ने इस पूरे मुद्दे पर हमेशा से एक बेहद स्पष्ट और जिम्मेदार रुख अपनाया है। भारत लगातार कानूनी तौर पर होने वाले प्रवासन का समर्थन करता आया है। इसके साथ ही, विदेशी धरती पर बिना दस्तावेजों के पाए जाने वाले प्रवासियों की नागरिकता की पूरी जांच करने के बाद भारत उन्हें वापस स्वीकार करने में सहयोगी देशों की मदद करता है।
इस पूरी प्रक्रिया को समझाते हुए विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने पहले भी स्पष्ट किया था कि किसी भी डिपोर्ट होने वाले व्यक्ति को स्वीकार करने से पहले भारत सरकार उसकी पृष्ठभूमि की सघन जांच करती है। जब भी किसी देश में बिना कानूनी दर्जे वाले व्यक्ति का मामला सामने आता है और उसके भारतीय होने का दावा किया जाता है, तो पूरी पुष्टि के बाद ही उसे वापस देश लाया जाता है।
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