मेटा द्वारा क्रेड और उसके संस्थापक कुणाल शाह पर दांव लगाने से इस फिनटेक कंपनी के भविष्य और बिजनेस मॉडल को लेकर एक नई चर्चा शुरू हो गई है। बेंगलुरु स्थित इस स्टार्टअप में 900 मिलियन डॉलर का भारी भरकम निवेश सिर्फ एक वित्तीय सौदा नहीं है। यह भारत के डिजिटल इकोसिस्टम और भविष्य के ऑनलाइन बाजार को लेकर मेटा की एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मेटा लगभग 4.5 बिलियन डॉलर के वैल्यूएशन पर क्रेड में 900 मिलियन डॉलर का निवेश करने जा रहा है। इस सौदे के तहत मेटा कंपनी में अल्पांश हिस्सेदारी (माइनॉरिटी स्टेक) खरीदेगा। इस निवेश की आधी रकम सीधे कंपनी के पास जाएगी, जबकि बाकी हिस्से से मौजूदा निवेशकों को अपने शेयर बेचने का मौका मिलेगा।
इन वित्तीय आंकड़ों के साथ ही एक और बड़ी घोषणा हुई है। क्रेड के संस्थापक कुणाल शाह अब विल कैथकार्ट की जगह लेंगे और व्हाट्सएप के ग्लोबल हेड की जिम्मेदारी संभालेंगे। अलग-अलग नजरिए से देखें तो ये दोनों ही खबरें बेहद अहम हैं। लेकिन जब इन्हें एक साथ जोड़कर देखा जाता है, तो यह स्पष्ट होता है कि मेटा भारत, डिजिटल पेमेंट और ई-कॉमर्स के भविष्य को किस तरह से देख रहा है।
आखिर क्रेड ही क्यों?
क्रेड को चुनना पहली नजर में थोड़ा हैरान करने वाला लग सकता है। यह भारत की सबसे बड़ी फिनटेक कंपनी नहीं है और न ही यूपीआई लेनदेन में इसका कोई एकाधिकार है। इसके पास करोड़ों की संख्या में आम यूजर्स भी नहीं हैं। ज्यादातर भारतीय इसे सिर्फ एक ऐसे ऐप के रूप में जानते हैं जो समय पर क्रेडिट कार्ड का बिल भरने पर इनाम देता है।
लेकिन 2018 में शुरू हुई यह कंपनी अब सिर्फ बिल पेमेंट तक सीमित नहीं रह गई है। क्रेड ने शानदार क्रेडिट इतिहास वाले ग्राहकों से शुरुआत की और धीरे-धीरे लेंडिंग, यूपीआई, बीमा, किराया भुगतान और वेल्थ मैनेजमेंट जैसी सेवाओं में भी अपनी पैठ बना ली।
आंकड़े बताते हैं कि क्रेड के पास फिलहाल 17 मिलियन (1.7 करोड़) मासिक सक्रिय उपयोगकर्ता हैं। यह प्लेटफॉर्म भारत के 40 प्रतिशत से अधिक क्रेडिट कार्ड बिल भुगतान को प्रोसेस करता है। इन आंकड़ों से ज्यादा अहम बात यह है कि इसके उपयोगकर्ता असल में हैं कौन।
क्रेड के प्रीमियम यूजर्स पर मेटा की नजर
बरसों से इंटरनेट कंपनियां सिर्फ भीड़ जुटाने के पीछे भागती रही हैं, लेकिन क्रेड ने एक अलग रास्ता चुना। उसने हर किसी को अपना ग्राहक बनाने के बजाय वित्तीय रूप से सक्रिय और संपन्न उपभोक्ताओं पर ध्यान केंद्रित किया।
यह ऐसे लोगों का समूह है जिनके पास क्रेडिट कार्ड हैं, जो ऑनलाइन जमकर खर्च करते हैं, अक्सर यात्रा करते हैं और नए वित्तीय उत्पादों को आजमाने में सबसे आगे रहते हैं। भारत की कुल इंटरनेट आबादी की तुलना में यह समूह भले ही छोटा हो, लेकिन व्यावसायिक नजरिए से यह बेहद मूल्यवान है।
मेटा जैसी कंपनी पहले से ही जानती है कि लोग ऑनलाइन क्या देखते हैं, क्या पसंद करते हैं और किन चीजों पर चर्चा करते हैं। लेकिन क्रेड के जरिए उसे भारत के सबसे ज्यादा खर्च करने वाले उपभोक्ताओं के वित्तीय व्यवहार की गहरी जानकारी मिलेगी। मेटा के लिए भारत में यूजर्स जुटाना कभी चुनौती नहीं रहा है। उसका असली संघर्ष इन यूजर्स से विज्ञापन के अलावा अन्य तरीकों से पैसा कमाना रहा है।
डिजिटल पेमेंट का अनसुलझा खेल
भारत में मेटा की मौजूदगी बेहद मजबूत है। अकेले व्हाट्सएप के ही देश में 500 मिलियन (50 करोड़) से ज्यादा यूजर्स हैं। इंस्टाग्राम भी शॉपिंग और क्रिएटर्स के लिए एक बड़ा बाजार बन चुका है। लेकिन इतनी बड़ी पहुंच के बावजूद, मेटा पेमेंट सेक्टर में कोई बड़ी ताकत नहीं बन पाया है।
भारत के डिजिटल पेमेंट बाजार पर फोनपे (PhonePe) और गूगल पे (Google Pay) का दबदबा है। देश के सबसे लोकप्रिय मैसेजिंग ऐप से जुड़े होने के बावजूद व्हाट्सएप पे इस रेस में काफी पीछे है। यह अंतर बहुत मायने रखता है क्योंकि इंटरनेट का भविष्य सिर्फ इस बात से तय नहीं होगा कि लोग कहां बातचीत करते हैं, बल्कि इस बात से तय होगा कि वित्तीय लेनदेन कहां होता है।
आज की ऑनलाइन शॉपिंग प्रक्रिया पर गौर करें। यूजर्स इंस्टाग्राम पर कोई उत्पाद खोजते हैं और व्हाट्सएप पर विक्रेता से बात करते हैं। लेकिन जब पेमेंट की बारी आती है, तो वे मेटा के इकोसिस्टम से बाहर चले जाते हैं। किसी भी टेक कंपनी के लिए पेमेंट का यह आखिरी चरण सबसे महत्वपूर्ण होता है। पेमेंट से अनमोल डेटा मिलता है और ग्राहक के साथ रिश्ता गहरा होता है। आसान शब्दों में कहें तो, पेमेंट वह जगह है जहां लोगों का ध्यान एक ठोस बिजनेस में बदल जाता है।
कुणाल शाह की भूमिका अहम क्यों है?
यहीं पर कुणाल शाह की नियुक्ति सबसे महत्वपूर्ण हो जाती है। पिछले एक दशक में वे भारत के सबसे चर्चित उद्यमियों में से एक रहे हैं। क्रेड शुरू करने से पहले उन्होंने फ्रीचार्ज (Freecharge) को भारत की अग्रणी डिजिटल पेमेंट कंपनी बनाया था। बाजार के रुझानों और उपभोक्ता व्यवहार को समय से पहले समझ लेने में उन्हें महारत हासिल है।
उनका व्हाट्सएप का प्रमुख बनना एक बहुत बड़ा कदम है। यह सिर्फ एक भारतीय उद्यमी का विश्व के सबसे बड़े मैसेजिंग प्लेटफॉर्म का बॉस बनना नहीं है। यह इस बात का संकेत है कि व्हाट्सएप का भविष्य अब सीधे तौर पर कॉमर्स और पेमेंट से जुड़ा है। ये दोनों ऐसे क्षेत्र हैं जहां कुणाल शाह ने बरसों काम किया है।
भारतीय स्टार्टअप्स के लिए एक बड़ा संकेत
यह डील भारतीय स्टार्टअप इकोसिस्टम के लिए भी एक संजीवनी की तरह है। 2022 के स्टार्टअप फंडिंग बूम के दौरान क्रेड का वैल्यूएशन 6.4 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया था। बाद में जब वैश्विक स्तर पर फंडिंग के हालात सख्त हुए और निवेशक सतर्क हो गए, तो यह मूल्यांकन गिरकर 3.5 बिलियन डॉलर रह गया था।
अब मेटा का यह निवेश कंपनी को 4.5 बिलियन डॉलर का वैल्यूएशन दे रहा है। यह भले ही इसके उच्चतम स्तर से कम हो, लेकिन यह एक बड़ी और शानदार रिकवरी है। ऐसे समय में जब बाजार में छंटनी और फंडिंग की कमी की खबरें आम हैं, दुनिया की सबसे बड़ी टेक कंपनियों में से एक का यह 900 मिलियन डॉलर का निवेश भारतीय फिनटेक में भरोसे को पुख्ता करता है।
मेटा का असली गेमप्लान क्या है?
इस सौदे को सिर्फ एक फिनटेक निवेश मानना मामले को बहुत हल्के में लेना होगा। यह दरअसल पूरे डिजिटल इकोसिस्टम पर लगाया गया एक दूरदर्शी दांव है।
मेटा के पास पहले से ही दर्शक मौजूद हैं, बातचीत का प्लेटफॉर्म है और व्यापारी भी हैं। उसे सिर्फ एक मजबूत वित्तीय कड़ी की दरकार थी जो इन सभी को एक साथ जोड़ सके। क्रेड उसे संपन्न ग्राहकों तक पहुंच दे रहा है। कुणाल शाह अपने साथ पेमेंट सेक्टर का लंबा अनुभव ला रहे हैं और व्हाट्सएप की पहुंच का कोई मुकाबला नहीं है।
मेटा का लक्ष्य एक ऐसा भविष्य तैयार करना है जहां सोशल मीडिया, मैसेजिंग, ई-कॉमर्स और डिजिटल पेमेंट के बीच का फर्क पूरी तरह खत्म हो जाए। अगर भविष्य में ऐसा होता है, तो यह 900 मिलियन डॉलर का निवेश सिर्फ एक डील नहीं, बल्कि तकनीकी दुनिया के सबसे बड़े मास्टरस्ट्रोक के रूप में याद रखा जाएगा।
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