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गुजरात के किसानों पर दोहरी मार! 2019 से नहीं मिला फसल बीमा का लाभ, कांग्रेस ने लगाया बड़ा आरोप

| Updated: July 1, 2026 14:36

कांग्रेस नेता शक्तिसिंह गोहिल का बड़ा दावा- केंद्र सरकार की बार-बार अपील के बावजूद गुजरात ने लागू नहीं की 'प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना', बेमौसम बारिश से किसानों को हुआ करोड़ों का नुकसान।

अहमदाबाद: देश में कृषि संकट और मौसम के बदलते मिजाज के बीच गुजरात से एक बड़ी राजनीतिक और आर्थिक बहस सामने आई है। कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता और पूर्व राज्यसभा सांसद शक्तिसिंह गोहिल ने मंगलवार को राज्य सरकार पर बेहद गंभीर आरोप लगाए।

उन्होंने दावा किया कि गुजरात देश का इकलौता ऐसा राज्य है, जिसने केंद्र सरकार की सबसे महत्वाकांक्षी फसल बीमा योजना ‘प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना’ (PMFBY) को लागू नहीं किया है। इस फैसले के कारण राज्य के लाखों किसान फसल नुकसान की स्थिति में मिलने वाले जरूरी आर्थिक सुरक्षा कवच से पूरी तरह वंचित हो गए हैं।

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान गोहिल ने केंद्रीय कृषि मंत्री द्वारा उन्हें और गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल को लिखे गए पत्रों की प्रतियां सार्वजनिक कीं। कांग्रेस नेता के मुताबिक, इन सरकारी दस्तावेजों से साफ होता है कि केंद्र सरकार के बार-बार आग्रह करने के बावजूद गुजरात सरकार साल 2019-20 से इस योजना को अपनाने से लगातार इनकार कर रही है।

इस मामले की गंभीरता को रेखांकित करते हुए गोहिल ने बताया कि उन्होंने खुद 5 दिसंबर 2025 को राज्यसभा में शून्यकाल (Zero Hour) के दौरान यह मुद्दा उठाया था। उस समय उन्होंने पिछले साल गुजरात में हुई बेमौसम और भारी बारिश के कारण बर्बाद हुई फसलों के लिए किसानों को मुआवजा देने की मांग की थी।

इसके जवाब में केंद्र सरकार ने लिखित रूप में यह स्वीकार किया था कि जहां पूरे देश के किसान इस योजना का लाभ उठा रहे हैं, वहीं गुजरात सरकार ने केंद्र के तमाम अनुरोधों को दरकिनार कर इसे लागू करने से मना कर दिया है।

केंद्रीय कृषि मंत्री ने 25 नवंबर 2025 को गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल को एक पत्र भेजा था। इस पत्र में मुख्यमंत्री से प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना को तत्काल लागू करने की अपील की गई थी। पत्र में इस बात का भी जिक्र था कि देश के लगभग सभी राज्य इस योजना से जुड़े हैं, जो बेमौसम बारिश, प्राकृतिक आपदाओं और अत्यधिक जलभराव से प्रभावित होने वाले किसानों को एक बड़ा सहारा देती है।

शक्तिसिंह गोहिल ने आरोप लगाया कि अगर गुजरात में यह योजना प्रभावी होती, तो पिछले साल करोड़ों रुपये का नुकसान झेलने वाले किसानों को उनके नुकसान की पूरी भरपाई मिल जाती। इसके उलट, राज्य सरकार की तरफ से किसानों को बेहद मामूली सहायता दी गई, जो उनके बीज और खेती की बुनियादी लागत निकालने के लिए भी नाकाफी थी।

केंद्रीय मंत्री के पत्र का हवाला देते हुए कांग्रेस नेता ने कहा कि इस योजना में सभी तरह की फसलों को बीमा कवर दिया जाता है। इसके अलावा, सब्जियों और बागवानी फसलों को होने वाले नुकसान पर भी वित्तीय मदद का प्रावधान है, जिससे गुजरात के किसान पूरी तरह महरूम रह गए हैं।

गुजरात की भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए गोहिल ने कहा कि सरकार की नीतियां किसानों को आर्थिक रूप से कमजोर करने वाली हैं। उन्होंने फसल बीमा योजना को लागू न करने के फैसले को किसानों को आर्थिक रूप से बर्बाद करने की एक बड़ी साजिश करार दिया।

इस पूरे घटनाक्रम पर कांग्रेस ने राज्य सरकार से जवाब मांगा है कि आखिर केंद्र के बार-बार कहने के बावजूद किसानों को इस केंद्रीय योजना से बाहर क्यों रखा गया। पार्टी ने सरकार से इस लापरवाही के लिए किसान समुदाय से माफी मांगने की मांग की है। साथ ही, पिछले साल हुए नुकसान के लिए सीमित राहत के बजाय पूरा मुआवजा देने पर जोर दिया है।

मौसम के मौजूदा हालातों, देरी से हो रही बारिश और इस साल एल नीनो (El Niño) के संभावित खतरों को देखते हुए कांग्रेस ने चिंता जताई है। पार्टी ने राज्य सरकार से मांग की है कि संभावित सूखे या फसल बर्बादी से किसानों को बचाने के लिए गुजरात में तुरंत प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना लागू की जाए।

इसके साथ ही विपक्ष ने यह सवाल भी उठाया है कि जब देश के बाकी सभी राज्यों के किसान इस योजना का फायदा उठा रहे हैं, तो 2019-20 से गुजरात के किसानों को इससे दूर क्यों रखा गया। सरकार को यह भी स्पष्ट करना चाहिए कि योजना के फायदों को स्वीकार करने के बाद भी केंद्रीय कृषि मंत्री की सिफारिशों को लगातार क्यों नजरअंदाज किया जा रहा है।

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