नए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित ड्राइविंग टेस्ट ने आवेदकों की मुश्किलें काफी बढ़ा दी हैं। हालत यह है कि लगभग 80 प्रतिशत लोग इस हाई-टेक टेस्ट को पास करने में विफल साबित हो रहे हैं। इस भारी विफलता और बढ़ते बैकलॉग को देखते हुए परिवहन विभाग तुरंत हरकत में आ गया है।
विभाग अब सुभाष ब्रिज आरटीओ (Subhash Bridge RTO) में एक दूसरा नया टेस्ट ट्रैक बनाने और अपॉइंटमेंट का समय बढ़ाने की पूरी तैयारी कर रहा है। वर्तमान में सुभाष ब्रिज आरटीओ में ड्राइविंग टेस्ट के लिए 40 से 45 दिनों की लंबी वेटिंग चल रही है। वहीं, वस्त्राळ आरटीओ (Vastral RTO) में यह इंतजार बढ़कर लगभग दो महीने तक पहुंच गया है।
इतनी लंबी कतारों के कारण ही विभाग को जनता की सहूलियत के लिए तत्काल प्रभाव से सुधारात्मक कदम उठाने पड़े हैं। सुभाष ब्रिज आरटीओ के अधिकारी बी आर सूर्यवंशी (B R Suryavanshi) ने इस पूरी स्थिति पर महत्वपूर्ण जानकारी साझा की है।
उन्होंने बताया कि उनके केंद्र पर फिलहाल ड्राइविंग टेस्ट के लिए 40 दिन का वेटिंग पीरियड है। जनता को हो रही इस भारी असुविधा को कम करने के लिए जल्द से जल्द एक दूसरा नया ट्रैक तैयार करने के आदेश जारी कर दिए गए हैं। काम शुरू होने के बाद इस नए ट्रैक को पूरी तरह से चालू होने में करीब चार महीने का समय लगने की उम्मीद है।
आखिर इतने लोग फेल क्यों हो रहे हैं? इसका मुख्य कारण नई AI प्रणाली की अत्यधिक सख्ती है। इस पूरी तकनीकी व्यवस्था में मानवीय हस्तक्षेप की कोई गुंजाइश नहीं छोड़ी गई है। टेस्ट का हर एक चरण पूरी तरह से ऑनलाइन काम करता है। ड्राइविंग के दौरान आवेदकों द्वारा की गई मामूली सी चूक भी तुरंत सिस्टम की पकड़ में आ जाती है, जिससे फेल होने वालों का ग्राफ तेजी से ऊपर गया है।
एक समय था जब सुभाष ब्रिज आरटीओ में हर दिन 300 से 400 ड्राइविंग टेस्ट अपॉइंटमेंट दिए जाते थे और ज्यादातर लोग आसानी से पास भी हो जाते थे। लेकिन AI सिस्टम लागू होने के बाद से अब लगभग 80 प्रतिशत आवेदक बाहर हो रहे हैं। इस भारी दबाव को कम करने के लिए विभाग अब ड्राइविंग टेस्ट के संचालन घंटों को बढ़ाने पर गंभीरता से विचार कर रहा है।
एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, विभाग अलग-अलग आरटीओ में अपॉइंटमेंट का समय बढ़ाने की योजना बना रहा है।
उदाहरण के तौर पर, सुभाष ब्रिज आरटीओ में अभी सुबह 8 बजे से रात 8 बजे तक दो शिफ्ट में टेस्ट लिए जाते हैं। अब इन अपॉइंटमेंट को सुबह 6 बजे से ही शुरू करने पर विचार किया जा रहा है। इससे आवेदकों को अपने कामकाज के शेड्यूल के हिसाब से सुविधाजनक समय चुनने में मदद मिलेगी और लंबी वेटिंग से भी बड़ी राहत मिलेगी।
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