रविवार 4 अक्टूबर को सामने आई जानकारी के मुताबिक, इजराइल जा रही फ्लाईदुबई की फ्लाइट को क्रैश करने की कोशिश करने वाला को-पायलट संभवतः अकेला ही था। इस खौफनाक घटना में उसने विमान को गिराने के मकसद से भारतीय मूल के कैप्टन स्मित मछर पर जानलेवा हमला किया था।
कई मीडिया संस्थानों ने इस हमलावर को-पायलट की पहचान ओमान के नागरिक हम्माम अल-हम्मामी के रूप में की है। हालांकि, आधिकारिक तौर पर अभी तक इसकी पहचान की सार्वजनिक पुष्टि नहीं की गई है।
वॉल स्ट्रीट जर्नल की एक रिपोर्ट के अनुसार, अल-हम्मामी की कट्टरपंथी विचारधारा और संदिग्ध गतिविधियों को देखते हुए ओमान में उसके उड़ान भरने पर पहले ही रोक लगाई जा चुकी थी।
इस मामले की जांच कर रहे अंतरराष्ट्रीय अधिकारी अभी भी घटना के पीछे के असल मकसद का पता लगाने में जुटे हैं। जांच से जुड़े इजराइली अधिकारियों का मानना है कि शुरुआती सुरागों से यही लगता है कि संदिग्ध ने इस हमले की योजना अकेले ही बनाई थी।
इजराइल के एक अन्य आधिकारिक सूत्र ने भी स्पष्ट किया है कि फिलहाल इस हमले का किसी आतंकी संगठन या सरकार से कोई संबंध सामने नहीं आया है। हालांकि, अधिकारियों ने जोर देकर कहा है कि यह केवल अब तक की शुरुआती जांच पर आधारित निष्कर्ष है।
इस बेहद संवेदनशील मामले की जांच संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) और इजराइल दोनों मिलकर कर रहे हैं। इसके साथ ही सऊदी अरब का गृह मंत्रालय भी अपनी तरफ से जांच में जुटा है, क्योंकि हमले के बाद विमान की इसी देश में आपातकालीन लैंडिंग कराई गई थी।
प्रारंभिक इजराइली जांच का हवाला देते हुए यह भी सामने आया है कि यह अपहरण का प्रयास एक ‘लोन-वुल्फ’ (अकेले व्यक्ति द्वारा किया गया) हमला हो सकता है। फिलहाल इस मामले की गहनता से पड़ताल की जा रही है और हर संभावित पहलू को खंगाला जा रहा है।
बता दें कि बुधवार को दुबई से उड़ान भरने वाली फ्लाईदुबई की फ्लाइट संख्या FZ1073 एक भयानक हादसे का शिकार होने से बाल-बाल बची। कैप्टन पर हुए अचानक हमले के बीच यह विमान महज कुछ ही मिनटों में हजारों फीट नीचे आ गिरा था।
घायल होने के बावजूद कैप्टन मछर ने गजब की हिम्मत दिखाई। उन्होंने कॉकपिट का दरवाजा खोलकर क्रू मेंबर्स और यात्रियों को खतरे का संकेत दिया। उनकी इस सूझबूझ के बाद यात्रियों और क्रू ने बहादुरी दिखाते हुए कॉकपिट में घुसकर विमान पर दोबारा नियंत्रण हासिल कर लिया।
इस उड़ान में कुल 174 यात्री सवार थे। कॉकपिट में हुए संघर्ष के दौरान विमान ने आपातकालीन सिग्नल भेजे और यह 34,000 फीट की ऊंचाई से तेजी से गिरते हुए 17,000 फीट से भी नीचे आ गया था।
इस घटना के बाद ऑस्ट्रेलियाई संघीय पुलिस (एएफपी) ने भी अल-हम्मामी के ऑस्ट्रेलिया से जुड़े कनेक्शन की जांच शुरू कर दी है। सुरक्षा एजेंसियों की जांच में पता चला है कि आरोपी ने एक छात्र के रूप में ऑस्ट्रेलिया में करीब दो साल बिताए थे।
सूत्रों के मुताबिक, को-पायलट को 2014 में स्टूडेंट वीजा जारी किया गया था और उसने 2015 से 2017 के बीच ऑस्ट्रेलिया में पढ़ाई की थी। बाद में साल 2019 में उसका वीजा रद्द कर दिया गया था।
हालांकि, यह वीजा रद्द करने की कार्रवाई किसी आपराधिक वजह से नहीं की गई थी। दरअसल, वह किसी कोर्स में नामांकित नहीं था, जिसके चलते वह छात्र वीजा के लिए अयोग्य हो गया था।
मामले की मुख्य रूप से जांच कर रहे संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने शनिवार को एक अहम बयान जारी किया। एजेंसी के अनुसार, अब तक की जांच से यह स्पष्ट हो चुका है कि को-पायलट ने एक सोची-समझी ‘आतंकी घटना’ को अंजाम देने की कोशिश की थी।
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