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साबरमती आश्रम का कायाकल्प: टाटा की कंपनी और ग्लोबल फर्म मिलकर संवारेंगी बापू की विरासत, तैयार होंगे 23 भव्य म्यूजियम

| Updated: October 1, 2026 17:07

अहमदाबाद में साबरमती आश्रम का नया स्वरूप तेजी से आकार ले रहा है। आश्रम परिसर में बनने वाले 23 म्यूजियम के डिजाइन का जिम्मा पेरिस स्थित मशहूर ‘म्यूजियम स्टूडियो’ को सौंपा गया है। यह अंतरराष्ट्रीय फर्म सांस्कृतिक संस्थानों से जुड़े प्रोजेक्ट्स में अपनी महारत के लिए दुनियाभर में जानी जाती है।

दुनिया के 46 देशों में अपनी मौजूदगी दर्ज करा चुका म्यूजियम स्टूडियो इस महात्वाकांक्षी प्रोजेक्ट के लिए भारतीय कंपनी ‘इकोफर्स्ट सर्विसेज लिमिटेड’ के साथ मिलकर काम करेगा। यह भारतीय कंपनी टाटा कंसल्टिंग इंजीनियर्स की पूर्ण स्वामित्व वाली अनुषंगी इकाई है।

ऐतिहासिक साबरमती आश्रम के पुनर्विकास, संरक्षण और विस्तार की पूरी जिम्मेदारी ‘महात्मा गांधी साबरमती आश्रम मेमोरियल ट्रस्ट’ संभाल रहा है। यह पूरा कार्य प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सीधी देखरेख में किया जा रहा है।

महात्मा गांधी ने साल 1917 में साबरमती नदी के तट पर सेंट्रल जेल और श्मशान घाट के बीच 60 एकड़ जमीन खरीदी थी। इसी साल वे इस आश्रम में रहने आए थे और यही वह समय था जब उन्होंने बिहार के चंपारण में अपना पहला बड़ा सत्याग्रह शुरू किया था।

आश्रम की पुरानी इमारतों को उनके मूल स्वरूप में लौटाने के लिए उन्हीं सामग्रियों का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिनसे वे एक सदी से भी पहले बनी थीं। इनमें ईंट, सागौन की लकड़ी और चूने के प्लास्टर के साथ-साथ उड़द, गुड़ और मेथी के दानों का पेस्ट शामिल है।

इन ऐतिहासिक इमारतों को 55 एकड़ में फैले नए परिसर में म्यूजियम के तौर पर नया रूप दिया जाएगा। यह बापू को समर्पित दुनिया का सबसे बड़ा और विश्व स्तरीय स्मारक होगा।

म्यूजियम में महात्मा गांधी के जीवन और स्वतंत्रता आंदोलन में उनके नेतृत्व से जुड़े विभिन्न पहलुओं को दर्शाने के लिए ट्रस्ट ने नौ सदस्यीय सामग्री सलाहकार समिति (CAC) का गठन किया है। इस समिति में कई राजनेता, परोपकारी, म्यूजियोलॉजिस्ट और शिक्षाविद शामिल हैं।

राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश और गुजरात विद्यापीठ की ट्रस्टी राजश्री बिड़ला इस समिति का प्रमुख हिस्सा हैं। राजश्री बिड़ला गांधी जी के करीबी सहयोगी रहे घनश्यामदास बिड़ला की पौत्रवधू हैं। इनके अलावा समिति में पटना के बिहार म्यूजियम के महानिदेशक अंजनी कुमार सिंह, राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष और गुजरात भाजपा के पूर्व प्रवक्ता किशोर मकवाना तथा गुजरात विद्यापीठ के कुलपति हर्षद पटेल शामिल हैं।

मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज वास्तु संग्रहालय के महानिदेशक सव्यसाची मुखर्जी, नई दिल्ली की प्रधानमंत्री संग्रहालय और पुस्तकालय सोसायटी (PMMLS) के सदस्य व इतिहासकार रिजवान कादरी भी इसका हिस्सा हैं। साथ ही नई दिल्ली स्थित इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (IGNCA) के ट्रस्टी राजाराम याज्ञनिक और भारतीय विरासत संस्थान (IIH) की प्रति-कुलपति मानवी सेठ भी समिति को अपनी सेवाएं दे रही हैं।

मार्च में गठित होने के बाद से यह समिति अब तक तीन बार बैठक कर चुकी है। अगस्त में हुई पिछली बैठक में दक्षिण अफ्रीका में गांधी जी के बिताए वर्षों और उनसे प्रभावित लोगों से जुड़ी सामग्री की विस्तार से समीक्षा की गई।

समिति के एक सदस्य ने जोहान्सबर्ग स्थित ‘सत्याग्रह हाउस’ का दौरा किया था और वहां संरक्षित गांधी जी के लेखों पर 60 पन्नों की रिपोर्ट सौंपी है। जर्मन वास्तुकार हरमन कालेनबाक द्वारा डिजाइन किए गए इस घर में गांधी जी 1908 से 1909 के बीच रहे थे। समिति की अंतिम मंजूरी के बाद ही म्यूजियम का डिजाइन तय किया जाएगा।

फिलहाल समिति प्रामाणिकता सुनिश्चित करने के लिए इकोफर्स्ट द्वारा प्रस्तुत योजना के पहले मसौदे की समीक्षा कर रही है। समिति से हरी झंडी मिलने के बाद इसे ‘नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डिजाइन’ (NID) के पास भेजा जाएगा। म्यूजियम स्टूडियो के डिजाइन की अंतिम जांच और अनुमोदन का जिम्मा NID के पास ही है।

आज की युवा पीढ़ी के पढ़ने में कम दिलचस्पी लेने की आदत को ध्यान में रखते हुए, NID यह तय करेगा कि बापू की कहानी को किस बेहतरीन प्रारूप में पेश किया जाए। प्रस्तुति के सभी तरीकों और सामग्री को अंततः PMMLS और IIH द्वारा परखा जाएगा।

म्यूजियम में डिजिटल सामग्री की सीमा कुल प्रस्तुति के 30 प्रतिशत तक तय की गई है। केवल उन्हीं हिस्सों में एयर कंडीशनिंग की सुविधा होगी जहां इलेक्ट्रॉनिक डिस्प्ले या उससे जुड़े उपकरण लगाए जाएंगे।

ट्रस्ट ने मूल गांधी आश्रम परिसर का हिस्सा रही 28 इमारतों की बहाली के लिए निविदाएं जारी की थीं। इनमें हॉस्टल, गौशाला, स्कूल, कताई-बुनाई केंद्र, कागज बनाने का केंद्र और क्रैच शामिल हैं। इकोफर्स्ट को 23 इमारतों में म्यूजियम और प्रदर्शनियां डिजाइन करने के लिए 113 करोड़ रुपये का कॉन्ट्रैक्ट दिया गया है। वहीं, आश्रम गौशाला के अंदर के म्यूजियम को राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड द्वारा बहाल किया जा रहा है।

साबरमती आश्रम पुनर्विकास परियोजना को केंद्र और गुजरात सरकार संयुक्त रूप से लागू कर रही है। इसके मास्टरप्लान और सिविल निर्माण का कार्य अर्बन प्लानर बिमल पटेल की फर्म ‘एचसीपी डिजाइन, प्लानिंग एंड मैनेजमेंट प्राइवेट लिमिटेड’ ने किया है।

महात्मा गांधी साबरमती आश्रम मेमोरियल ट्रस्ट की गवर्निंग काउंसिल के प्रमुख गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल हैं। इसके अलावा, सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी आई.पी. गौतम ट्रस्ट की कार्यकारी परिषद का नेतृत्व कर रहे हैं।

परियोजना से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि यदि देश और दुनिया में गांधी जी के योगदान का आकलन किया जाए, तो उसका 60 प्रतिशत से अधिक हिस्सा इसी आश्रम से जुड़ा है। चंपारण सत्याग्रह से लेकर अंग्रेजों के भारत छोड़ने के समय तक, साबरमती आश्रम भारतीय इतिहास का एक महत्वपूर्ण गवाह रहा है।

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