अहमदाबाद शहर में डेंगू ने एक बार फिर अपना खतरनाक रूप दिखाना शुरू कर दिया है। सितंबर का महीना संक्रमण के लिहाज से बेहद चिंताजनक साबित हुआ है। नगर निगम (एएमसी) के स्वास्थ्य विभाग द्वारा मंगलवार को जारी किए गए आंकड़ों के मुताबिक, 1 सितंबर से 27 सितंबर के बीच ही शहर में डेंगू के 640 नए मामले दर्ज किए गए हैं।
यह आंकड़ा इसलिए भी डराने वाला है क्योंकि 1 जनवरी से 27 सितंबर तक शहर में कुल 1,228 डेंगू के मामले सामने आए हैं। इसका सीधा मतलब यह है कि इस साल अब तक मिले कुल मरीजों में से 51.1 प्रतिशत मामले केवल सितंबर के इन 27 दिनों में ही सामने आ गए हैं।
पिछले महीने मानसून के दौरान बारिश रुकने से जो हालात बने, उन्होंने मच्छरों को पनपने का पूरा मौका दे दिया। हालांकि प्रशासन ने लार्वा पनपने वाली जगहों पर लगातार जांच अभियान चलाया था। इस अवधि के दौरान शहर में साधारण मलेरिया के 103, फाल्सीपेरम मलेरिया के 27 और चिकनगुनिया के सात मामले भी दर्ज किए गए हैं।
मच्छरों के इस बढ़ते खतरे को रोकने के लिए एएमसी ने कड़े कदम उठाए हैं। विशेष रूप से कंस्ट्रक्शन साइट्स और कमर्शियल इकाइयों की सघन जांच की जा रही है। जहां भी मच्छरों के पनपने के अनुकूल हालात मिल रहे हैं, उन जगहों को तुरंत सील किया जा रहा है। ऐसे ज्यादातर मामले उन इलाकों में मिल रहे हैं जहां निर्माण कार्य काफी तेजी से चल रहा है।
एक अधिकारी ने जानकारी देते हुए बताया कि गोटा, जगतपुर, चांदखेड़ा, बोडकदेव और थलतेज जैसे इलाकों में डेंगू के मामले विशेष रूप से ज्यादा हैं। इसके अलावा वस्त्राल, लांभा और निकोल से भी मरीजों की पुष्टि हो रही है। जिन खुले प्लॉटों में लंबे समय से बारिश का पानी जमा है, उनका सर्वे कर पानी निकालने और कीटनाशकों के छिड़काव का काम तेजी से किया जा रहा है।
प्रशासन द्वारा रिहायशी और व्यावसायिक इलाकों में फॉगिंग के साथ-साथ जन जागरूकता अभियान भी चलाए जा रहे हैं। एएमसी अब हर निजी अस्पताल से भी डेंगू के मरीजों का डेटा जुटा रहा है। जो अस्पताल यह जानकारी देने में विफल रहेंगे, उन्हें नोटिस जारी कर कार्रवाई की जाएगी।
गांधीनगर के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. राजन दोशी के अनुसार, इस साल बच्चों में डेंगू के मामलों में मामूली बढ़ोतरी देखी गई है। राहत की बात यह है कि ज्यादातर बच्चे सही देखभाल और उचित हाइड्रेशन से ठीक हो रहे हैं। बचाव के तौर पर उन्होंने सलाह दी है कि बच्चों को मच्छरों से बचाने और संक्रमण के खतरे को कम करने के लिए पूरी बांह के कपड़े पहनाने चाहिए।
अन्य जलजनित और मौसमी बीमारियों की बात करें तो एएमसी के अनुसार, इस साल 1 जनवरी से 27 सितंबर तक शहर में साधारण मलेरिया के 419, फाल्सीपेरम मलेरिया के 74 और चिकनगुनिया के 14 मामले सामने आ चुके हैं। इसके अलावा गैस्ट्रोएंटेराइटिस (दस्त और उल्टी) के 4,114, पीलिया के 600 और टाइफाइड के 1,655 मामले दर्ज किए गए।
वहीं, केवल 1 सितंबर से 27 सितंबर के बीच गैस्ट्रोएंटेराइटिस के 194, पीलिया के 68 और टाइफाइड के 236 मरीज मिले हैं। इन 27 दिनों के दौरान शहर में पानी की गुणवत्ता जांचने के लिए भी बड़े पैमाने पर अभियान चला। इस दौरान क्लोरीन परीक्षण के लिए 46,080 पानी के सैंपल लिए गए, जिनमें से नौ की रिपोर्ट ‘क्लोरीन निल’ आई। इसके अतिरिक्त, बैक्टीरियोलॉजिकल जांच के लिए 6,585 पानी के सैंपल जमा किए गए, जिनमें से 19 सैंपल पीने के लिए पूरी तरह से अयोग्य घोषित किए गए हैं।
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