शनिवार को 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लाल किले की प्राचीर से देश को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आत्मनिर्भरता को समय की सबसे बड़ी मांग बताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत को ऊर्जा, सेमीकंडक्टर और महत्वपूर्ण खनिजों (क्रिटिकल मिनरल्स) जैसे क्षेत्रों में किसी भी देश पर निर्भर रहने की आवश्यकता नहीं है। पीएम ने चेताया कि आज दुनिया के कुछ देश संसाधनों और यहां तक कि भौगोलिक क्षेत्रों का ‘हथियारीकरण’ कर रहे हैं, जिससे बचने के लिए भारत को अपनी क्षमताओं का विस्तार करना ही होगा। उन्होंने 2047 तक भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाने के लिए सुधारों की गति को और तेज करने का दृढ़ आह्वान किया।
वैश्विक अस्थिरता और अमेरिका-इजरायल व तेहरान संघर्ष के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे अहम समुद्री रास्तों के प्रभावित होने की आशंकाओं के बीच यह आत्मनिर्भरता और भी अहम हो जाती है। युद्ध शुरू होने से पहले भारत अपनी जरूरत का लगभग 40 प्रतिशत कच्चा तेल, 50 प्रतिशत से अधिक प्राकृतिक गैस और 90 प्रतिशत एलपीजी (LPG) इसी व्यापारिक मार्ग से आयात करता था।
आने वाले पांच से सात वर्षों के लिए प्रधानमंत्री ने ‘सप्त धारा’ नामक एक सात-सूत्रीय विकास ढांचे की रूपरेखा पेश की। इसमें मैन्युफैक्चरिंग, कृषि व खाद्य उत्पादन, प्रौद्योगिकी व नवाचार, बुनियादी ढांचा व कनेक्टिविटी, रक्षा, हरित व नीली अर्थव्यवस्था और भारत की सॉफ्ट पावर को शामिल किया गया है। पीएम मोदी ने कहा कि एक समय था जब पूरी दुनिया वैश्वीकरण की बात करती थी, लेकिन अब वह आवाजें आनी बंद हो गई हैं। कोविड, रूस-यूक्रेन युद्ध और पश्चिम एशिया के तनाव ने साबित कर दिया है कि पेट्रोल, डीजल, उर्वरक, दवा और तकनीक जैसी जरूरी चीजों का इस्तेमाल अब वर्चस्व स्थापित करने के लिए किया जा रहा है।
भविष्य की जरूरतों को रेखांकित करते हुए प्रधानमंत्री ने ऊर्जा सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। उन्होंने कहा कि चिप्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डेटा सेंटर से चलने वाली नई दुनिया को बड़े पैमाने पर अबाधित बिजली की जरूरत है। इसी दिशा में सरकार ने संसद में ‘शांति’ (SHANTI) अधिनियम पारित कर एक बड़ा कदम उठाया है। लक्ष्य बिल्कुल स्पष्ट है, सरकार 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा का उत्पादन सुनिश्चित करना चाहती है। इसी दशक में पांच नए परमाणु रिएक्टर शुरू किए जाएंगे। इसके अलावा, भारत ने फास्ट ब्रीडर परमाणु तकनीक में भी महारत हासिल कर ली है, जो परमाणु ईंधन में आत्मनिर्भरता की ओर एक बड़ा मील का पत्थर है।
कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस के लिए आयात पर भारत की भारी निर्भरता (क्रमशः 88% से अधिक और लगभग 50%) को कम करने के लिए अब अपतटीय (ऑफशोर) अन्वेषण पर जोर दिया जा रहा है। पीएम मोदी ने बताया कि देश के 99 प्रतिशत तटवर्ती इलाकों को, जो पहले ‘नो-गो’ (प्रतिबंधित) क्षेत्र माने जाते थे, अब अन्वेषण गतिविधियों के लिए खोल दिया गया है। पिछले साल शुरू किए गए ‘समुद्र मंथन’ अभियान को गति देने के लिए हाल ही में 85,000 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं ताकि समुद्र के भीतर नए भंडार तेजी से खोजे जा सकें।
डिजिटल युग में चिप्स की अहमियत पर बात करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि मेडिकल उपकरणों से लेकर परिवहन तक, हर जगह सेमीकंडक्टर अनिवार्य हो चुके हैं। भारत को इस क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के लिए तीन बड़े प्लांट पहले ही शुरू हो चुके हैं और यहां से उत्पादन व निर्यात भी होने लगा है। अगले सात-आठ सालों में पांच, सात या आठ नए सेमीकंडक्टर प्लांट शुरू होने की पूरी उम्मीद है। इसी तरह, क्रिटिकल मिनरल्स को लेकर भी राष्ट्रीय मिशन शुरू किया गया है और पिछले केंद्रीय बजट में इसके लिए विशेष कॉरिडोर की घोषणा की गई है।
भारत को वैश्विक सप्लाई चेन का सबसे भरोसेमंद केंद्र बनाने के लिए ‘जीरो-डिफेक्ट’ प्रिसिजन मैन्युफैक्चरिंग पर बल दिया गया। पीएम मोदी ने देश के हर निर्माता और एमएसएमई (MSME) सेक्टर को कड़ा संदेश देते हुए कहा कि गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं होना चाहिए। उन्होंने “क्वालिटी, क्वालिटी, क्वालिटी” को देश का नया मंत्र बताया। प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले 12 वर्षों में भारत ने कई देशों के साथ जो मुक्त व्यापार समझौते (FTA) किए हैं, उनका पूरा लाभ हमारे छोटे-मझोले उद्योगों को उठाना चाहिए। कपड़ा हो, मशीनरी हो या दवाइयां, भारतीय उत्पादों को विश्व स्तर पर अपनी श्रेष्ठता और सामर्थ्य साबित करना होगा।
भारत को दुनिया के लिए सिर्फ एक बाजार बनकर नहीं रहना है, बल्कि एआई, स्पेस, क्वांटम तकनीक और रोबोटिक्स के युग में एक ग्लोबल इनोवेशन हब बनना है। यूपीआई और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर की भारी सफलता का जिक्र करते हुए पीएम ने कहा कि हमारी सार्वजनिक तकनीक अब दुनिया के कोने-कोने तक पहुंचनी चाहिए। उन्होंने अगले एक दशक में फॉर्च्यून 500 सूची में 50 भारतीय कंपनियों को शामिल करने का विशाल लक्ष्य सामने रखा। इसके अलावा दुनिया के शीर्ष 5 बैंकों में एक भारतीय बैंक और टॉप 5 फार्मा कंपनियों में एक या दो भारतीय कंपनियों की मौजूदगी सुनिश्चित करने की बात भी कही। लॉ फर्म्स, रेटिंग एजेंसियों और अकाउंटिंग के क्षेत्र में भी भारत को वैश्विक लीडर बनना होगा।
संबोधन के अंत में प्रधानमंत्री ने कहा कि 21वीं सदी का एक चौथाई हिस्सा बीत चुका है और अगले 25 साल देश के लिए सर्वोपरि हैं। जो काम पिछले पांच-सात दशकों में नहीं हो पाया, उसे अब अगले पांच-सात वर्षों में ही पूरा करना होगा। इसके लिए काम करने की सोच, संस्कृति और रफ्तार तीनों को पूरी तरह बदलना होगा।
उन्होंने दृढ़ता के साथ कहा कि सुधार हमारे लिए कोई मजबूरी या सिर्फ एक नारा नहीं हैं, बल्कि यह हमारा दृढ़ विश्वास है। देश अब ‘रिफॉर्म एक्सप्रेस’ पर सवार हो चुका है और बिना रुके अगले स्तर के सुधारों की ओर तेजी से आगे बढ़ रहा है।
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