अमेरिका की ट्रंप सरकार इमिग्रेशन नियमों में बड़े बदलाव करने की तैयारी में है। इन बदलावों से H-1B वीजा प्रोग्राम, रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड, विदेशी छात्रों के वीजा की अवधि और उनके ऑप्शनल प्रैक्टिकल ट्रेनिंग (OPT) प्रोग्राम पर गहरा असर पड़ेगा। इसके अलावा, एक नए अंतिम नियम के जरिए एम्प्लॉयमेंट ऑथराइजेशन डॉक्युमेंट्स (EAD) के ऑटोमैटिक एक्सटेंशन को भी खत्म कर दिया जाएगा। अगर ये प्रस्ताव लागू होते हैं, तो इसका सबसे ज्यादा असर भारतीय प्रोफेशनल्स और छात्रों पर पड़ने की आशंका है।
यह जानकारी अमेरिकी डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी (DHS), डिपार्टमेंट ऑफ लेबर (DOL) और डिपार्टमेंट ऑफ स्टेट (DOS) द्वारा जारी किए गए हालिया रेगुलेटरी एजेंडे से सामने आई है। इस एजेंडे में आने वाले महीनों के लिए प्रशासन की इमिग्रेशन प्राथमिकताओं को रेखांकित किया गया है। हालांकि इन नियमों को लागू होने में अभी औपचारिक प्रक्रिया से गुजरना होगा, लेकिन इससे सरकार की भावी नीति और दिशा पूरी तरह साफ हो गई है।
H-1B वीजा प्रोग्राम में बड़ी सख्ती की तैयारी
सबसे महत्वपूर्ण प्रस्ताव H-1B प्रोग्राम को लेकर है, जिसके अगस्त में प्रकाशित होने की उम्मीद है। DHS सालाना 85,000 की तय सीमा (कैप) से मिलने वाली कुछ छूटों को कड़ा करने की योजना बना रहा है। वर्तमान में विश्वविद्यालयों और योग्य शोध संस्थानों को इस लॉटरी प्रक्रिया से छूट मिली हुई है, जिससे वे कभी भी विदेशी कर्मचारियों को रख सकते हैं। इसके साथ ही, थर्ड-पार्टी क्लाइंट साइटों पर H-1B कर्मचारियों को तैनात करने वाली कंपनियों के लिए अतिरिक्त शर्तें जोड़ी जाएंगी।
भारतीय आईटी और कंसल्टिंग कंपनियां अक्सर इसी मॉडल का इस्तेमाल करती हैं, जहां वे अपने कर्मचारियों को तीसरी पार्टी के प्रोजेक्ट्स पर भेजती हैं। नए नियमों के तहत अब नियोक्ताओं को यह साबित करना होगा कि उनके और कर्मचारी के बीच वास्तविक संबंध हैं। साथ ही यह भी स्पष्ट करना होगा कि कर्मचारी क्लाइंट की लोकेशन पर वास्तव में विशेष कौशल वाले काम (स्पेशलिटी ऑक्यूपेशन) ही कर रहा है। इसके लिए कंपनियों को अब व्यापक दस्तावेज तैयार रखने होंगे।
जिन नियोक्ताओं का अतीत में H-1B नियमों के उल्लंघन का इतिहास रहा है, उन पर सरकार की पैनी नजर रहेगी। भविष्य में आवेदन करते समय ऐसी कंपनियों की गहन जांच की जाएगी, जिससे यह साफ है कि प्रशासन नियमों के अनुपालन और प्रवर्तन को लेकर बेहद गंभीर है। यह नया प्रस्तावित नियम अगस्त में पेश किया जा सकता है।
बड़ी कंपनियों के लिए बढ़ेगी स्पॉन्सरशिप फीस
इसके साथ ही, H-1B और L-1 कर्मचारियों को काम पर रखने वाले बड़े नियोक्ताओं के लिए फीस का दायरा बढ़ाने की भी तैयारी है। इसी महीने आने वाले एक अंतिम नियम के अनुसार, अमेरिका में 50 से अधिक कर्मचारियों वाली जिन कंपनियों के वर्कफोर्स में 50% से ज्यादा लोग H-1B या L-1 वीजा धारक हैं, उन्हें अब और अधिक खर्च करना होगा। उन्हें न केवल नए आवेदनों और नियोक्ता बदलने (चेंज-ऑफ-एम्प्लॉयर) पर बल्कि मौजूदा कर्मचारियों के वीजा रिन्यूअल या एक्सटेंशन पर भी ‘9-11 रिस्पॉन्स एंड बायोमेट्रिक एंट्री-एग्जिट फीस’ देनी होगी।
वर्तमान में यह अतिरिक्त फीस (H-1B के लिए $4,000 और L-1 के लिए $4,500) केवल शुरुआती वीजा स्पॉन्सरशिप या नियोक्ता बदलने पर ही लगती है। रिन्यूअल पर भी इस फीस को अनिवार्य करने से उन आईटी आउटसोर्सिंग कंपनियों की लागत काफी बढ़ जाएगी जो विदेशी प्रतिभाओं पर निर्भर हैं। यह प्रस्ताव पहले अप्रैल 2025 में आने वाला था, जिसे बाद में एजेंडे से हटा दिया गया था, लेकिन अब यह फिर से प्रशासन की तात्कालिक प्राथमिकताओं में शामिल हो चुका है और इसी जुलाई में जारी हो सकता है।
इसके अतिरिक्त, डिपार्टमेंट ऑफ लेबर (DOL) चार-स्तरीय वेतन ढांचे (four-tiered wage structure) के तहत न्यूनतम वेतन स्तर को बढ़ाने वाले नियम को अंतिम रूप देने जा रहा है। इसका मसौदा मार्च में जारी किया गया था और मई में इस पर आम जनता के सुझाव लिए जा चुके हैं।
इस बदलाव के बाद एंट्री-लेवल के विदेशी कर्मचारियों का न्यूनतम वेतन स्तर संबंधित क्षेत्र और व्यवसाय के लिए 17वें पर्सेंटाइल से बढ़कर 34वें पर्सेंटाइल पर पहुंच जाएगा। इससे अमेरिकी कंपनियों के लिए विदेशी कर्मचारियों को स्पॉन्सर करने का खर्च काफी बढ़ जाएगा और इस नियम को आगे चलकर कानूनी चुनौतियों का सामना भी करना पड़ सकता है।
रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड प्रक्रिया का कायाकल्प
डार्टमेंट ऑफ लेबर इसी महीने ‘PERM लेबर सर्टिफिकेशन’ प्रक्रिया में बड़े बदलाव का प्रस्ताव रखने वाला है। ग्रीन कार्ड आवेदन दाखिल करने से पहले नियोक्ताओं के लिए यह सर्टिफिकेशन हासिल करना अनिवार्य होता है। विभाग का मानना है कि साल 2004 में लागू किया गया मौजूदा भर्ती ढांचा आज की आधुनिक तकनीकों और भर्ती के तौर-तरीकों के अनुकूल नहीं रह गया है।
नए प्रस्ताव के तहत अमेरिकी श्रम बाजार के परीक्षण के न्यूनतम मानकों को अपडेट किया जाएगा। इसके साथ ही, विदेशी कामगारों को स्पॉन्सर करने से पहले अमेरिकी नागरिकों की छंटनी (ले-ऑफ) से जुड़े नियमों को और सख्त बनाया जाएगा, ताकि भर्ती और रोजगार के दौरान स्थानीय नागरिकों के साथ किसी भी तरह का भेदभाव न हो सके। इस प्रस्तावित नियम को भी इसी जुलाई में पेश किए जाने की संभावना है।
विदेशी छात्रों के वीजा की अवधि होगी सीमित
अमेरिका में पढ़ने वाले विदेशी छात्रों में सबसे बड़ी संख्या भारतीय छात्रों की है। ताजा ‘ओपन डोर्स रिपोर्ट’ के मुताबिक, शैक्षणिक वर्ष 2024-25 के दौरान अमेरिका में 3.6 लाख भारतीय छात्र थे, जो कुल 11 लाख विदेशी छात्रों का लगभग 31% है। भले ही भारत से जाने वाले नए छात्रों की संख्या में हाल में कुछ गिरावट देखी गई है, लेकिन वहां भारतीय छात्रों की कुल मौजूदगी बहुत बड़ी है और इन नियमों का उन पर दूरगामी असर होगा।
आने वाले हफ्तों में DHS एक अंतिम नियम लागू करने जा रहा है, जिससे छात्रों को उनके पूरे कोर्स की अवधि (ड्यूरेशन ऑफ स्टेटस) के लिए मिलने वाली वीजा की अनुमति खत्म हो जाएगी। अब छात्रों को एक निश्चित अवधि (प्रस्ताव के मुताबिक अधिकतम चार वर्ष) के लिए ही वीजा मिलेगा, जिसके बाद उन्हें अमेरिका में बने रहने के लिए इमिग्रेशन अधिकारियों के पास एक्सटेंशन का आवेदन करना होगा। यह अंतिम नियम जुलाई में ही जारी किया जा सकता है।
इसके अलावा फरवरी 2027 में ऑप्शनल प्रैक्टिकल ट्रेनिंग (OPT) और करिकुलर प्रैक्टिकल ट्रेनिंग (CPT) कार्यक्रमों में संशोधन के लिए एक प्रस्ताव लाने की योजना है। इसके तहत स्टेम (STEM) क्षेत्रों के छात्रों को मिलने वाले दो साल के OPT एक्सटेंशन पर प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं। पहले यह प्रस्ताव सितंबर 2025 में आना था, लेकिन अब इसकी समयसीमा बदलकर फरवरी 2027 तय की गई है।
EAD का ऑटोमैटिक एक्सटेंशन खत्म होने से बढ़ेगी परेशानी
इसी महीने आने वाला एक और नया नियम उस अंतरिम व्यवस्था को अंतिम रूप देगा जो अक्टूबर 2025 से लागू है। इसके तहत उन विदेशी नागरिकों के लिए एम्प्लॉयमेंट ऑथराइजेशन डॉक्युमेंट्स (EAD) के अधिकतम 540 दिनों के ऑटोमैटिक एक्सटेंशन को खत्म कर दिया गया है, जिन्होंने 30 अक्टूबर 2025 या उसके बाद समय पर रिन्यूअल के लिए आवेदन किया था।
इस बदलाव का सबसे बुरा असर H-4 वीजा धारकों पर पड़ेगा, जो कि H-1B वीजा धारकों के ऐसे जीवनसाथी हैं जो खुद ग्रीन कार्ड की कतार में हैं। अमेरिका में लगभग एक लाख भारतीय जीवनसाथी (जिनमें ज्यादातर महिलाएं हैं) इस वर्क परमिट का लाभ उठा रहे हैं। यह परमिट उन्हें काम करने या अपना व्यवसाय शुरू करने के साथ-साथ ड्राइविंग लाइसेंस जैसी बुनियादी सुविधाएं हासिल करने में मदद देता है।
नए नियम के तहत, मौजूदा परमिट की अवधि समाप्त होने के बाद विदेशी नागरिक तब तक काम जारी नहीं रख पाएंगे जब तक कि अमेरिकी नागरिकता और इमिग्रेशन सेवा (USCIS) उनके आवेदन को पूरी तरह मंजूरी नहीं दे देती। समस्या यह है कि H-4 EAD धारक समाप्ति से केवल 180 दिन पहले ही रिन्यूअल के लिए आवेदन कर सकते हैं, जबकि USCIS को इसे प्रोसेस करने में अक्सर इससे ज्यादा समय लगता है। इस वजह से उनके रोजगार में एक अनिवार्य गैप आ जाएगा और कई लोगों को अपनी नौकरियों से हाथ धोना पड़ सकता है।
ग्लोबल इमिग्रेशन लॉ फर्म ‘फ्रैगोमेन’ के सीनियर काउंसिल मिच वेक्सलर का कहना है कि यह रेगुलेटरी एजेंडा एक महत्वपूर्ण रोडमैप प्रस्तुत करता है कि आने वाले महीनों में अमेरिकी प्रशासन का ध्यान कहां केंद्रित रहने वाला है।
उन्होंने सलाह दी है कि भले ही इनमें से कई अभी केवल प्रस्ताव हैं और औपचारिक प्रक्रिया पूरी होने में कई महीनों का समय लगता है, लेकिन नियोक्ताओं को अभी से यह मूल्यांकन शुरू कर देना चाहिए कि H-1B प्रोग्राम, ग्रीन कार्ड प्रक्रिया और OPT में होने वाले इन संभावित बदलावों का उनके कर्मचारियों और वर्कफोर्स प्लानिंग पर क्या असर पड़ सकता है।
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