comScore ट्रंप को सुप्रीम कोर्ट से लगा करारा झटका: अमेरिका में पैदा होने वाले हर बच्चे को मिलेगी नागरिकता - Vibes Of India

Gujarat News, Gujarati News, Latest Gujarati News, Gujarat Breaking News, Gujarat Samachar.

Latest Gujarati News, Breaking News in Gujarati, Gujarat Samachar, ગુજરાતી સમાચાર, Gujarati News Live, Gujarati News Channel, Gujarati News Today, National Gujarati News, International Gujarati News, Sports Gujarati News, Exclusive Gujarati News, Coronavirus Gujarati News, Entertainment Gujarati News, Business Gujarati News, Technology Gujarati News, Automobile Gujarati News, Elections 2022 Gujarati News, Viral Social News in Gujarati, Indian Politics News in Gujarati, Gujarati News Headlines, World News In Gujarati, Cricket News In Gujarati

Vibes Of India
Vibes Of India

ट्रंप को सुप्रीम कोर्ट से लगा करारा झटका: अमेरिका में पैदा होने वाले हर बच्चे को मिलेगी नागरिकता

| Updated: July 1, 2026 15:37

सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: 150 साल पुराना कानून बरकरार, अवैध प्रवासियों के बच्चों को भी मिलेगा जन्म से ही अमेरिकी नागरिक होने का अधिकार।

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने डोनाल्ड ट्रंप की उस कोशिश को नाकाम कर दिया है जिसमें वे 150 साल पुरानी जन्मसिद्ध नागरिकता की नीति को खत्म करना चाहते थे। अदालत ने अपने ऐतिहासिक फैसले में यह स्पष्ट कर दिया है कि अमेरिका में जन्म लेने वाले बच्चों को नागरिकता का संवैधानिक अधिकार प्राप्त है।

यह अहम फैसला 6-3 के बहुमत से सुनाया गया। चीफ जस्टिस जॉन रॉबर्ट्स ने अपने फैसले में कहा कि 14वें संशोधन के तहत, अवैध रूप से या अस्थायी तौर पर रह रहे माता-पिता के अमेरिका में पैदा हुए बच्चे भी जन्म से ही अमेरिकी नागरिक माने जाएंगे।

पूर्व राष्ट्रपति ट्रंप ने एक कार्यकारी आदेश के जरिए इस अधिकार को सीमित करने का प्रयास किया था। उनका तर्क था कि बिना दस्तावेज वाले प्रवासियों और कुछ अस्थायी विजिटर्स के बच्चे अमेरिकी अधिकार क्षेत्र के अधीन नहीं आते हैं, इसलिए वे इस जन्मसिद्ध नागरिकता के पात्र नहीं हैं।

अदालत का यह आदेश ट्रंप के इमिग्रेशन एजेंडे के लिए एक बहुत बड़ा झटका माना जा रहा है। दूसरी तरफ, नागरिक अधिकार समूहों ने सुप्रीम कोर्ट के इस कदम का जोरदार स्वागत किया है।

चीफ जस्टिस रॉबर्ट्स सहित पांच जजों ने इस बात पर सहमति जताई कि ट्रंप का कार्यकारी आदेश संविधान के 14वें संशोधन का सीधा उल्लंघन करता है। इसके अलावा, जस्टिस ब्रेट कैवनॉग ने अपने अलग विचार रखते हुए लिखा कि उनका भी यही मानना है कि यह आदेश संघीय कानून के खिलाफ है।

इस फैसले पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर गहरी निराशा जताई। उन्होंने इस फैसले को “बहुत बुरा” करार दिया और कानून बनाकर जन्मसिद्ध नागरिकता को खत्म करने की अपनी लड़ाई जारी रखने की कसम खाई।

ट्रंप ने कहा कि इसके लिए किसी भी लंबे और जटिल संवैधानिक संशोधन की बिल्कुल जरूरत नहीं है। उन्होंने अमेरिकी संसद से अपील की कि वह देश के लिए महंगी और अनुचित साबित हो रही इस जन्मसिद्ध नागरिकता को खत्म करने पर आज से ही काम शुरू कर दे।

आपको बता दें कि अमेरिका में 1868 से ही देश में पैदा होने वाले हर व्यक्ति को नागरिकता दी जा रही है। यह अधिकार अमेरिकी संविधान के 14वें संशोधन में निहित है और इसे सुप्रीम कोर्ट के कई पुराने फैसलों से भी कानूनी मजबूती मिली है।

यह 14वां संशोधन अमेरिकी गृह युद्ध के बाद पारित किया गया था, जिसका मूल उद्देश्य उस समय मुक्त हुए दासों को अधिकार देना था। इसके अनुसार, अमेरिका में जन्मे या प्राकृतिक रूप से नागरिकता पाने वाले और उसके अधिकार क्षेत्र के अधीन आने वाले सभी व्यक्ति संयुक्त राज्य अमेरिका के नागरिक हैं।

बहुमत की राय लिखते हुए चीफ जस्टिस रॉबर्ट्स ने कहा कि नागरिकता पहले भी अधिकारों का अधिकार थी और आज भी है, जो हमारे राजनीतिक समुदाय में स्वतंत्र रूप से भाग लेने की अनुमति देती है। उन्होंने कहा कि 14वें संशोधन के निर्माताओं ने इस भूमि पर स्वतंत्र रूप से जन्म लेने वाले प्रत्येक व्यक्ति से यह वादा किया था।

चीफ जस्टिस ने अपने फैसले का समापन करते हुए कहा कि आज हम उस पुराने वादे को पूरी तरह निभा रहे हैं।

ट्रंप प्रशासन की तरफ से अदालत में यह दलील दी गई थी कि 14वें संशोधन में उल्लिखित “अधिकार क्षेत्र” से उन लोगों के बच्चों को बाहर रखा जाना चाहिए जो स्थायी रूप से इस देश में नहीं रहते हैं।

सुप्रीम कोर्ट के नौ जजों में से तीन ने इस फैसले से असहमति भी जताई। इनमें जस्टिस क्लेरेंस थॉमस, नील गोरसच और सैमुअल अलिटो शामिल थे।

जस्टिस थॉमस ने तर्क दिया कि 14वें संशोधन का इस्तेमाल अब राजनीतिक उद्देश्यों के लिए किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह संशोधन मूल रूप से जिन मुक्त दासों के लिए लाया गया था, वे पूरी तरह से अमेरिकी थे और किसी अन्य देश के प्रति उनकी कोई निष्ठा नहीं थी।

असहमति जताने वाले एक अन्य जज सैमुअल अलिटो ने इस फैसले को एक “गंभीर गलती” बताया। उनका मानना था कि यह फैसला लगभग हर उस व्यक्ति को नागरिकता दे देता है जो संयोग से इस देश में पैदा हो जाता है, जिसमें वे लोग भी शामिल हैं जो केवल बच्चा पैदा करने के उद्देश्य से अमेरिका आते हैं और फिर वापस अपने देश लौट जाते हैं।

यह मामला डोनाल्ड ट्रंप के लिए इतना अधिक महत्वपूर्ण था कि वे अप्रैल महीने में इस पर हो रही मौखिक जिरह को देखने के लिए खुद सुप्रीम कोर्ट पहुंचे थे। उनकी यह उपस्थिति संक्षिप्त लेकिन ऐतिहासिक थी।

सख्त इमिग्रेशन नियमों के प्रबल समर्थक और व्हाइट हाउस के चीफ ऑफ स्टाफ स्टीफन मिलर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर इस फैसले की कड़ी आलोचना की। उन्होंने इसे सुप्रीम कोर्ट के इतिहास के “सबसे विनाशकारी और अपमानजनक फैसलों में से एक” करार दिया।

मिलर ने कहा कि अमेरिकी नागरिकता पूरी दुनिया का जन्मसिद्ध अधिकार नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि संविधान के किसी भी प्रावधान का यह मतलब कतई नहीं निकाला जा सकता कि हम अपने राष्ट्र का ही अस्तित्व मिटा दें।

इसके विपरीत, इमिग्रेशन के पैरोकारों और ट्रंप प्रशासन के आलोचकों ने इस फैसले का खुलकर जश्न मनाया।

अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में डेमोक्रेट्स के नेता हकीम जेफ्रीस ने कहा कि कानून लागू करके और संविधान से निर्देशित होकर, शीर्ष अदालत ने अंततः पुष्टि कर दी है कि संयुक्त राज्य अमेरिका में पैदा हुए सभी व्यक्ति अमेरिकी नागरिक हैं। जेफ्रीस ने जोर देकर कहा कि इस बात पर अब कोई सवाल नहीं है और ना ही कभी होगा।

‘लॉयर्स कमिटी फॉर सिविल राइट्स अंडर लॉ’ की मुख्य वकील डेरिली रोड्रिग्ज ने कहा कि यह फैसला उस बात को ठोस बनाता है जिसे हम सौ से अधिक वर्षों से सच मानते आ रहे हैं।

रोड्रिग्ज ने आगे कहा कि अमेरिकी धरती पर पैदा होने वाला कोई भी व्यक्ति, चाहे उसके माता-पिता की कानूनी स्थिति कुछ भी हो, जन्म से ही एक अमेरिकी नागरिक है। उन्होंने अंत में कहा कि एक राष्ट्र के रूप में हमने अपनी सामूहिक इच्छाशक्ति की एक अविश्वसनीय परीक्षा का सामना किया है और अंततः उसमें जीत हासिल की है।

यह भी पढ़ें-

रिश्वतखोरी का ‘सिस्टम’ और हर फाइल का फिक्स रेट, गुजरात हाईकोर्ट ने निलंबित IAS अधिकारी की जमानत याचिका की खारिज

गुजरात के किसानों पर दोहरी मार! 2019 से नहीं मिला फसल बीमा का लाभ, कांग्रेस ने लगाया बड़ा आरोप

Your email address will not be published. Required fields are marked *