भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) की भ्रष्टाचार निरोधक इकाई (ACSU) ने अब राज्य संघों द्वारा आयोजित सभी टी20 लीग्स को अपने कड़े रडार पर ले लिया है। सूत्रों के अनुसार, यह बड़ा कदम कुछ टीम मालिकों, आयोजकों और खिलाड़ियों की संदिग्ध भ्रष्टाचार संबंधी गतिविधियों पर लगाम लगाने के लिए उठाया गया है।
बोर्ड की यह सख्ती तमिलनाडु प्रीमियर लीग (TNPL) की कुछ टीमों के पिछले सीजन से ही ACSU की निगरानी में आने के बाद देखने को मिली है। भ्रष्टाचार निरोधक इकाई का मानना है कि सट्टेबाजों, खिलाड़ियों और मालिकों का यह संदिग्ध गठजोड़ केवल तमिलनाडु की लीग तक ही सीमित नहीं है।
अधिकारियों ने पाया है कि सट्टेबाजों और संदिग्ध व्यक्तियों द्वारा खिलाड़ियों, टीम मालिकों और प्रबंधकों से संपर्क करने की घटनाएं तेजी से बढ़ी हैं। यह खेल के नियमों और आचार संहिता का सीधा उल्लंघन है, जिसे देखते हुए बोर्ड ने अब जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई है।
यह क्रिकेट इतिहास में पहली बार है जब ACSU राज्य स्तर की लीग के सभी मैचों की इतनी बारीकी से निगरानी कर रहा है। इससे पहले इस स्तर की कड़ी चेकिंग केवल टेस्ट मैचों, आईपीएल और अन्य प्रमुख टूर्नामेंटों तक ही सीमित रहती थी।
अब टी20 मैचों के दौरान खिलाड़ी और टीम अधिकारी अपने होटलों में किससे मिलते हैं, इस पर भी ACSU के अधिकारी पैनी नजर रख रहे हैं।
राज्य संघों द्वारा आयोजित होने वाली ये लीग आईपीएल और सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी के बाद घरेलू टी20 क्रिकेट का तीसरा सबसे बड़ा स्तर मानी जाती हैं। घरेलू सीजन शुरू होने से पहले जून-अगस्त की विंडो में मुंबई, सौराष्ट्र, बंगाल, आंध्र, कर्नाटक, दिल्ली, यूपी, बिहार, पंजाब, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, असम और झारखंड जैसे राज्य अपनी-अपनी टी20 लीग आयोजित करते हैं।
वर्तमान में TNPL का 10वां संस्करण डिंडीगुल और चेन्नई में खेला जा रहा है, जिसका समापन 23 अगस्त को होना है।
सूत्रों का कहना है कि सट्टेबाज टीम मालिकों और खिलाड़ियों को ‘तुरंत पैसा’ कमाने का लालच देते हैं। चूंकि इनमें से कई क्रिकेटर क्लब स्तर के होते हैं, इसलिए वे और कुछ आयोजक आसानी से इन सट्टेबाजों के जाल में फंस जाते हैं। ACSU ऐसे सभी लोगों की कड़ी निगरानी कर रहा है और दोषी पाए जाने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।
इन सख्त नियमों का असर शुक्रवार को तब देखने को मिला जब पिछले सीजन में रणजी ट्रॉफी डेब्यू करने वाले तमिलनाडु के एक ऑलराउंडर को मौजूदा TNPL सीजन के बाकी मैचों से बैन कर दिया गया।
इस खिलाड़ी को प्लेयर एंड मैच ऑफिशियल्स एरिया (PMOA) में एक अघोषित मोबाइल फोन के साथ पकड़ा गया था। सूत्रों ने स्पष्ट किया है कि यह कोई इकलौती घटना नहीं है, क्योंकि ACSU पहले ही अलग-अलग राज्य लीगों में कम से कम आधा दर्जन खिलाड़ियों को इन प्रतिबंधित क्षेत्रों में मोबाइल का उपयोग करते हुए पकड़ चुका है।
तमिलनाडु क्रिकेट एसोसिएशन (TNCA) के अध्यक्ष टीजे श्रीनिवासराज ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वे TNPL के लिए ACSU द्वारा अनिवार्य सभी प्रोटोकॉल का पालन कर रहे हैं। उन्होंने खेल और टूर्नामेंट की अखंडता बनाए रखने के लिए ACSU टीम के साथ निरंतर समन्वय और संचार पर जोर दिया।
TNPL में मोबाइल फोन की घटना और राज्य की सभी टी20 लीगों की निगरानी के फैसले पर BCCI सचिव देवजीत सैकिया ने भी अहम बयान दिया। उन्होंने कहा कि यह एक छोटी घटना थी जिस पर ACSU ने तुरंत संज्ञान लिया और संबंधित खिलाड़ी को सजा दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि खेल की शुचिता के मामले में बोर्ड की भ्रष्टाचार निरोधक इकाई बेहद सक्रिय है और छोटी से छोटी बात को भी नजरअंदाज नहीं किया जाएगा।
गौरतलब है कि BCCI ने साल 2018 में ही राज्य द्वारा संचालित लीगों के लिए सख्त दिशानिर्देश जारी कर दिए थे। इनमें प्रत्येक टूर्नामेंट के लिए दो ACSU अधिकारियों की अनिवार्य उपस्थिति, भ्रष्टाचार विरोधी जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करना और PMOA के सभी प्रवेश व निकास द्वारों पर सीसीटीवी कैमरे लगाना शामिल था।
इससे पहले 2019 में भी ACSU ने TNPL में खिलाड़ियों और कोचों के सट्टेबाजों के संपर्क में होने के संदेह में एक जांच की थी। हालांकि, उस जांच के नतीजे कभी सार्वजनिक नहीं किए गए थे।
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