comScore बड़े मैचों का नया सिकंदर: 15 साल के वैभव सूर्यवंशी का खौफनाक अवतार, दबाव में बनते हैं सबसे खतरनाक - Vibes Of India

Gujarat News, Gujarati News, Latest Gujarati News, Gujarat Breaking News, Gujarat Samachar.

Latest Gujarati News, Breaking News in Gujarati, Gujarat Samachar, ગુજરાતી સમાચાર, Gujarati News Live, Gujarati News Channel, Gujarati News Today, National Gujarati News, International Gujarati News, Sports Gujarati News, Exclusive Gujarati News, Coronavirus Gujarati News, Entertainment Gujarati News, Business Gujarati News, Technology Gujarati News, Automobile Gujarati News, Elections 2022 Gujarati News, Viral Social News in Gujarati, Indian Politics News in Gujarati, Gujarati News Headlines, World News In Gujarati, Cricket News In Gujarati

Vibes Of India
Vibes Of India

बड़े मैचों का नया सिकंदर: 15 साल के वैभव सूर्यवंशी का खौफनाक अवतार, दबाव में बनते हैं सबसे खतरनाक

| Updated: June 22, 2026 15:22

महज 15 साल की उम्र में वैभव सूर्यवंशी ने अंडर-19 वर्ल्ड कप से लेकर आईपीएल और ट्राई-नेशन ए-सीरीज फाइनल तक अपने खौफनाक प्रदर्शन से क्रिकेट जगत में तहलका मचा दिया है, जानिए कैसे दबाव में यह बल्लेबाज और भी खतरनाक हो जाता है।

दांबुला में खेले गए ट्राई-नेशन ए सीरीज के फाइनल में वैभव सूर्यवंशी ने सिर्फ एक तूफानी पारी ही नहीं खेली, बल्कि उन्होंने यह साबित कर दिया है कि वह बड़े मैचों के खिलाड़ी हैं। जैसे-जैसे मैच का दबाव बढ़ता है, यह 15 वर्षीय बल्लेबाज और भी ज्यादा खतरनाक हो जाता है।

रविवार को श्रीलंका ए के खिलाफ खिताबी मुकाबले में इस बाएं हाथ के युवा बल्लेबाज ने महज 29 गेंदों पर 94 रनों की विस्फोटक पारी खेली। इस दौरान उनके बल्ले से 10 चौके और आठ गगनचुंबी छक्के निकले।

उनकी इस चमत्कारी पारी की बदौलत इंडिया ए ने 377/9 का विशाल स्कोर खड़ा किया और श्रीलंका ए को 66 रनों से हराकर ट्रॉफी पर कब्जा जमाया।

इस मैच में वैभव ने केवल 11 गेंदों में अपना अर्धशतक पूरा किया, जो लिस्ट ए क्रिकेट के इतिहास का सबसे तेज अर्धशतक है। लेकिन इस पारी की असली कहानी सिर्फ तेजी नहीं, बल्कि इसका समय था। फाइनल जैसे दबाव वाले मुकाबले में उन्होंने शुरुआती दस ओवरों को अपने आक्रामक प्रहार में तब्दील कर दिया।

खिताबी मुकाबले से पहले वैभव ने चार पारियों में 117 रन बनाए थे। तब उन्होंने कोई बहुत बड़ा स्कोर नहीं किया था, लेकिन फाइनल में आते ही उनका रौद्र रूप देखने को मिला। पूरी सीरीज में बनाए गए उनके कुल रनों का 44.5 प्रतिशत हिस्सा केवल इसी खिताबी मैच में आया।

इससे भी ज्यादा हैरानी की बात यह है कि शुरुआती चार पारियों में उन्होंने सिर्फ तीन छक्के लगाए थे, जबकि अकेले फाइनल में आठ छक्के जड़ दिए। इसका सीधा सा अर्थ है कि टूर्नामेंट के 72.7 प्रतिशत छक्के उनके बल्ले से सबसे बड़े मुकाबले में ही निकले।

उनकी इस बेखौफ बल्लेबाजी के कारण इंडिया ए ने मात्र नौ ओवर में 132 रन बोर्ड पर टांग दिए थे। इस आक्रामक शुरुआत के दम पर श्रीलंका ए को 378 रनों का एक पहाड़ जैसा लक्ष्य मिला, जिसने विपक्षी टीम को पूरी तरह से बैकफुट पर धकेल दिया।

यह पहली बार नहीं है जब वैभव ने किसी अहम मुकाबले में अपनी छाप छोड़ी हो। इसी साल अंडर-19 विश्व कप के फाइनल में इंग्लैंड के खिलाफ उन्होंने 80 गेंदों पर 175 रनों की ऐतिहासिक पारी खेली थी।

उस खिताबी मैच में 15 चौके और 15 छक्के जड़कर उन्होंने भारत को 100 रनों से जीत दिलाई थी। यह अंडर-19 विश्व कप फाइनल के इतिहास का सर्वोच्च व्यक्तिगत स्कोर है। यहाँ भी मंच छोटा नहीं था और उनकी बल्लेबाजी में कोई भी हिचकिचाहट नहीं दिखी।

आईपीएल नॉकआउट मुकाबलों में भी उनका यही जलवा कायम रहा। सनराइजर्स हैदराबाद के खिलाफ एलिमिनेटर मैच में राजस्थान रॉयल्स की तरफ से खेलते हुए उन्होंने महज 29 गेंदों में 97 रन ठोके। इस ताबड़तोड़ पारी ने हैदराबाद को टूर्नामेंट से बाहर का रास्ता दिखा दिया था और राजस्थान को क्वालीफायर 2 में पहुँचाया।

इसके ठीक दो दिन बाद, गुजरात टाइटंस के खिलाफ क्वालीफायर 2 में वैभव ने 47 गेंदों पर 96 रनों की एक और बेहतरीन पारी खेली। हालांकि राजस्थान वह मैच हार गया, लेकिन भयंकर दबाव वाले इस मुकाबले में भी उन्होंने खुद को एक सर्वाइवर के बजाय एक आक्रामक योद्धा की तरह पेश किया।

अगर इन चारों अहम पारियों को एक साथ देखा जाए तो तस्वीर बिल्कुल साफ हो जाती है। अंडर-19 विश्व कप फाइनल में 175, आईपीएल एलिमिनेटर में 97, आईपीएल क्वालीफायर 2 में 96 और ए-सीरीज फाइनल में 94 रनों की पारी कोई सामान्य उपलब्धि नहीं है।

इन चार हाई-प्रेशर मैचों में वैभव ने 185 गेंदों का सामना करते हुए कुल 462 रन बनाए हैं। इस दौरान उनका स्ट्राइक रेट 249.73 का रहा है। एक 15 साल के खिलाड़ी के लिए यह आंकड़े पूरी तरह से अविश्वसनीय हैं।

इन आंकड़ों से यह बात एकदम स्पष्ट हो जाती है कि बड़े मैचों का दबाव वैभव को रक्षात्मक नहीं बनाता है। इसके विपरीत, यह दबाव उन्हें और भी ज्यादा आक्रामक होने के लिए प्रेरित करता है।

भारत को एक ऐसा दुर्लभ टैलेंट मिला है जो बड़े मंच पर घबराने के बजाय अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करता है। फिलहाल वह बहुत युवा हैं और आगे चुनौतियां कठिन होंगी, लेकिन उनके ये शुरुआती कदम एक महान करियर की ओर इशारा कर रहे हैं। जब भी मैदान पर रोशनी तेज होती है और उम्मीदों का बोझ बढ़ता है, वैभव की आँखें नहीं झपकतीं, बल्कि उनका बल्ला और भी ज्यादा ताकत से घूमने लगता है।

यह भी पढ़ें-

अपनी कंपनी 14,110 करोड़ में बेची और 540 कर्मचारियों में बांट दिए 1,992 करोड़ रुपये; रातों-रात सब बने करोड़पति

अंबुजा सीमेंट्स और लीलैक का करार: गुजरात में तैयार होगा दुनिया का सबसे बड़ा लो-कार्बन सीमेंट प्रोजेक्ट

Your email address will not be published. Required fields are marked *