comScore सावधान! अगर आप भी खाते हैं पनीर तो हो जाएं सतर्क, गुजरात और महाराष्ट्र में 'नकली पनीर' पर लगा पूर्ण प्रतिबंध - Vibes Of India

Gujarat News, Gujarati News, Latest Gujarati News, Gujarat Breaking News, Gujarat Samachar.

Latest Gujarati News, Breaking News in Gujarati, Gujarat Samachar, ગુજરાતી સમાચાર, Gujarati News Live, Gujarati News Channel, Gujarati News Today, National Gujarati News, International Gujarati News, Sports Gujarati News, Exclusive Gujarati News, Coronavirus Gujarati News, Entertainment Gujarati News, Business Gujarati News, Technology Gujarati News, Automobile Gujarati News, Elections 2022 Gujarati News, Viral Social News in Gujarati, Indian Politics News in Gujarati, Gujarati News Headlines, World News In Gujarati, Cricket News In Gujarati

Vibes Of India
Vibes Of India

सावधान! अगर आप भी खाते हैं पनीर तो हो जाएं सतर्क, गुजरात और महाराष्ट्र में ‘नकली पनीर’ पर लगा पूर्ण प्रतिबंध

| Updated: August 6, 2026 14:59

पाम ऑयल और केमिकल से बने 'एनालॉग पनीर' से सेहत को हो रहे गंभीर नुकसान को देखते हुए सरकार का बड़ा फैसला, होटलों और रेस्टोरेंट में धड़ल्ले से परोसे जा रहे नकली उत्पादों पर अब होगी सख्त कार्रवाई।

आम जनता के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए गुजरात सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। राज्य में अब नकली (एनालॉग) पनीर, चीज़ और बटर के निर्माण, बिक्री और खपत पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है। इसी दिशा में कदम बढ़ाते हुए महाराष्ट्र सरकार ने भी एनालॉग पनीर के उत्पादन, वितरण और बिक्री पर एक साल के लिए प्रतिबंध लगा दिया है। यह फैसला इन सिंथेटिक उत्पादों से होने वाले स्वास्थ्य जोखिमों और ग्राहकों को धोखे में रखने की बढ़ती घटनाओं को रोकने के लिए लिया गया है।

स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव राजीव टोपनो ने इस कार्रवाई की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पिछले कुछ महीनों में एनालॉग पनीर समेत पनीर के कई सैंपल लिए गए थे। जांच के दौरान एक बड़ी संख्या में ये सैंपल क्वालिटी टेस्ट में फेल साबित हुए। खाद्य आपूर्ति श्रृंखला में बड़े पैमाने पर चल रही मिलावटखोरी के खुलासे के बाद ही राज्य में यह सख्त पाबंदी लगाई गई है।

इस साल अप्रैल में राज्य के खाद्य एवं औषधि नियंत्रण प्रशासन (FDCA) ने मिलावटखोरों के खिलाफ एक व्यापक अभियान चलाया था। छह दिनों तक चले इस राज्यव्यापी अभियान के तहत होटल, रेस्तरां, ढाबे और निर्माण इकाइयों जैसे 2,527 प्रतिष्ठानों की सघन जांच की गई थी। इस चेकिंग के दौरान अधिकारियों को बड़े स्तर पर अनियमितताएं मिली थीं।

कार्रवाई करते हुए एफडीसीए ने 703 किलोग्राम मिलावटी पनीर नष्ट कर दिया। इसके साथ ही 270 इकाइयों को नोटिस जारी किए गए और 18 प्रतिष्ठानों को सील कर दिया गया। जांच के लिए 95 सैंपल एकत्र किए गए और नियमों का उल्लंघन करने वाली इकाइयों पर कुल 2.8 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया। इसी अभियान के दौरान स्वास्थ्य विभाग ने खाने-पीने की जगहों को यह स्पष्ट रूप से बताने का निर्देश दिया था कि वे असली मिल्क पनीर परोस रहे हैं या एनालॉग पनीर।

हालांकि, कई प्रतिष्ठानों ने पारदर्शिता से जुड़े इस आदेश की खुलेआम अनदेखी की। मई महीने में अहमदाबाद नगर निगम (AMC) द्वारा की गई जांच में पाया गया कि कई भोजनालय बिना किसी जानकारी के मेन्यू में नकली पनीर का इस्तेमाल कर रहे थे। इसके बाद निगम ने सख्त रुख अपनाते हुए तुरंत जुर्माना लगाया और कई जगहों को बंद कराया। एएमसी के स्वास्थ्य विभाग ने तीन महीनों के दौरान रेस्तरां, होटल और खाद्य इकाइयों से पनीर के 250 सैंपल लिए थे।

प्रयोगशाला की जांच रिपोर्ट बेहद चौंकाने वाली थी, जिसमें 20 प्रतिशत यानी 50 सैंपल घटिया किस्म के पाए गए। इनमें से 27 मामलों में ग्राहकों को बिना बताए एनालॉग पनीर परोसा जा रहा था। कड़ी कार्रवाई करते हुए एएमसी ने 1,415 किलोग्राम संदिग्ध पनीर जब्त किया। नियमों का पालन न करने वाली इकाइयों को सील कर दिया गया और 10 मशहूर रेस्तरां पर 7,000 से लेकर 10,000 रुपये तक का जुर्माना लगाया गया। प्रमुख आपूर्तिकर्ताओं के ठिकानों पर भी छापेमारी की गई, जहां से 173 किलोग्राम अवैध स्टॉक बरामद हुआ।

सप्लाई चेन में यह गड़बड़ी काफी पहले से पनप रही थी। 3 मार्च को सूरत नगर निगम और स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप ने पांडेसरा स्थित एक निर्माण इकाई पर छापा मारा था। इस कार्रवाई में 1,401 किलोग्राम नकली पनीर बरामद किया गया था। प्रयोगशाला जांच में यह बात सामने आई कि इस पनीर में प्राकृतिक दूध के फैट की जगह वनस्पति तेल और इंडस्ट्रियल एसिड के अंश मौजूद थे। मौके से 28.4 लाख रुपये की मशीनरी भी जब्त की गई थी।

नेशनल रेस्टोरेंट एसोसिएशन ऑफ इंडिया (NRAI) के अहमदाबाद चैप्टर के प्रमुख दिलीप ठक्कर ने इस बैन पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उनका कहना है कि इस प्रतिबंध का सबसे ज्यादा असर असंगठित फूड सर्विस सेक्टर पर पड़ेगा, जहां लागत एक बहुत बड़ा मुद्दा होती है। असली डेयरी उत्पादों की बढ़ती कीमतों के कारण कई छोटे व्यापारी सस्ते विकल्प के तौर पर एनालॉग उत्पादों का रुख कर रहे हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी माना कि कम कीमत का यह लालच अक्सर उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य और गुणवत्ता पर भारी पड़ता है।

उपभोक्ता शिक्षा और अनुसंधान केंद्र (CERC) के अध्यक्ष सुनील पारेख ने सरकार के इस प्रतिबंध का स्वागत किया है और आगे की चुनौतियों को भी रेखांकित किया। पारेख ने कहा कि एनालॉग पनीर ने एक बड़ा बाजार बना लिया है, जहां कई उपभोक्ता अनजाने में प्रोटीन से भरपूर डेयरी उत्पादों के नाम पर पाम ऑयल आधारित विकल्प खरीद रहे हैं। उनके अनुसार, अब प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती इन नए नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित कराना होगी।

एनालॉग पनीर असल में एक सिंथेटिक और गैर-डेयरी उत्पाद है, जिसे मुख्य रूप से पाम ऑयल जैसे वनस्पति तेलों से बनाया जाता है। इसमें प्राकृतिक दूध का फैट बिल्कुल नहीं होता और यह असली पनीर की तुलना में काफी सस्ता होता है। पारंपरिक पनीर को उसमें मौजूद उच्च प्रोटीन और कैल्शियम के लिए जाना जाता है। वहीं दूसरी ओर, एनालॉग पनीर में प्रोटीन कम और कार्बोहाइड्रेट बहुत ज्यादा होता है, जिससे इसका पोषण मूल्य बेहद घटिया होता है। सस्ते मुनाफे के लालच में रेस्टोरेंट और कैटरिंग इकाइयां उपभोक्ताओं को बिना बताए यह नकली उत्पाद परोस रही थीं, जिस पर अब पूरी तरह से नकेल कसी गई है।

यह भी पढ़ें-

RTO का सख्त कदम: पेंडिंग ट्रैफिक ई-चालान नहीं भरा तो अटक जाएंगे वाहन से जुड़े आपके सभी काम

सावधान! व्हाट्सएप पर आ रहे हैं फर्जी इनकम टैक्स नोटिस, भूलकर भी न करें ये गलती वरना खाली हो जाएगा बैंक खाता

Your email address will not be published. Required fields are marked *