अहमदाबाद के वाहन मालिकों के लिए एक बेहद जरूरी खबर है। अगर आपके वाहन पर कोई ट्रैफिक ई-चालान बकाया है, तो आपको आरटीओ (RTO) से जुड़ी कई महत्वपूर्ण सेवाओं से हाथ धोना पड़ सकता है। अधिकारी अब इंटीग्रेटेड डिजिटल सिस्टम के जरिए नियमों को सख्ती से लागू कर रहे हैं। अब स्थिति यह है कि आधार और मोबाइल नंबर से जुड़े ड्राइविंग लाइसेंस की भी गहन जांच की जाएगी। इससे यह पता लगाया जाएगा कि वाहन मालिक के नाम पर रजिस्टर्ड किसी अन्य वाहन पर कोई चालान पेंडिंग तो नहीं है।
इस नए इंटीग्रेटेड डिजिटल सिस्टम में वाहन के स्वामित्व हस्तांतरण (ओनरशिप ट्रांसफर), रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट (RC) में पते का बदलाव, हाइपोथैकेशन रद्द करने और डुप्लीकेट आरसी जारी करने जैसी तमाम सेवाएं शामिल हैं। जब भी आप इन सेवाओं के लिए आवेदन करते हैं, तो सिस्टम स्वचालित रूप से आपके पेंडिंग ई-चालान की जांच करता है। सिर्फ सिस्टम ही नहीं, बल्कि आवेदनों को मंजूरी देने वाले अधिकारी भी बकाया राशि का पूरा हिसाब चेक करते हैं। यदि कोई ई-चालान पेंडिंग पाया जाता है, तो आवेदन को तुरंत वापस भेज दिया जाता है और पहले बकाया चुकाने का निर्देश दिया जाता है।
आंकड़ों पर गौर करें तो पूरे गुजरात में वाहन से जुड़े लगभग 50 प्रतिशत आवेदन सिर्फ इसलिए अटके हुए हैं क्योंकि आवेदकों ने अपना जुर्माना नहीं भरा है। हालांकि, इस मामले में अहमदाबाद की स्थिति थोड़ी बेहतर है, जहां यह दर लगभग 35 फीसदी है। अधिकारियों का मानना है कि अहमदाबाद में ज्यादातर काम एजेंटों के माध्यम से होता है। ये एजेंट कागजी कार्रवाई जमा करने से पहले ही यह सुनिश्चित कर लेते हैं कि सभी पुराने चालान भर दिए गए हों। आमतौर पर, आधार प्रमाणीकरण के साथ आगे बढ़ने वाले ऐसे आवेदन पूरी तरह से ‘फेसलेस’ होते हैं, यानी आवेदक को आरटीओ जाने की कोई आवश्यकता नहीं होती है।
गुजरात में ट्रैफिक नियमों की अनदेखी करने वालों की कोई कमी नहीं है। साल 2024 से लेकर अब तक पूरे राज्य में लगभग 1.80 करोड़ ट्रैफिक चालान जारी किए जा चुके हैं। अगर हम सिर्फ इस साल के आंकड़ों की बात करें, तो 1 जनवरी से 31 जुलाई 2026 के बीच ही 50.6 लाख ई-चालान काटे गए हैं। ऑटोमेटेड सिस्टम के बढ़ते उपयोग के बावजूद, चालान भरने वालों की संख्या काफी निराशाजनक बनी हुई है।
इस स्थिति को राष्ट्रीय स्तर के आंकड़ों से और भी बेहतर ढंग से समझा जा सकता है। इस साल मई महीने में पूरे देश में 88.2 लाख चालान जारी किए गए थे। इनमें से 75.21 लाख, यानी 85 प्रतिशत से भी अधिक चालान का भुगतान ही नहीं किया गया। अधिकारियों का कहना है कि ज्यादातर वाहन मालिकों को अपने पेंडिंग चालान के बारे में तभी पता चलता है जब वे आरटीओ की किसी सेवा के लिए आवेदन करते हैं। एक बार जब उन्हें इस बकाये की जानकारी मिल जाती है, तो वे अपना काम आगे बढ़ाने के लिए तुरंत जुर्माने की रकम भर देते हैं।
प्रशासन अब इस दिशा में और भी सख्त कदम उठाने जा रहा है। अधिकारियों के मुताबिक, राज्य सरकार यातायात प्रवर्तन (एन्फोर्समेंट) और परिवहन डेटाबेस के बीच एकीकरण को लगातार मजबूत कर रही है। एक बार जब यह पूरी प्रक्रिया पूरी तरह से लागू हो जाएगी, तो सिस्टम किसी भी ऐसे वाहन के आवेदन को स्वचालित रूप से ब्लॉक कर देगा जिस पर ट्रैफिक चालान बकाया है। यानी, भविष्य में आरटीओ से जुड़े किसी भी काम के लिए अपना पुराना जुर्माना चुकाना एक अनिवार्य शर्त बन जाएगी।
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