ग्रेटर गिर क्षेत्र में पिछले 45 दिनों के भीतर शेर और इंसानों के बीच संघर्ष की दस खौफनाक घटनाएं सामने आई हैं। इन विचलित करने वाले आंकड़ों ने प्रशासन की नींद उड़ा दी है। गुजरात के गौरव यानी एशियाई शेरों और स्थानीय लोगों की सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए राज्य सरकार ने अब एक बेहद सख्त कदम उठाया है। अभयारण्य की सड़कों पर अनियंत्रित आवाजाही, बेलगाम पर्यटन और गैरकानूनी रिसॉर्ट्स पर भारी शिकंजा कसने की पूरी तैयारी कर ली गई है।
वन विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने स्पष्ट किया है कि जब तक पर्यटन के बुनियादी ढांचे की व्यापक समीक्षा पूरी नहीं हो जाती, तब तक गिर और उसके आसपास के इलाकों में किसी भी नए रिसॉर्ट या होटल को अनुमति नहीं दी जाएगी। दरअसल, होमस्टे की आड़ में यहां तेजी से रिसॉर्ट्स कुकुरमुत्ते की तरह उग आए हैं।
इससे शेरों के महत्वपूर्ण प्राकृतिक आवासों में इंसानी दखल काफी बढ़ गया है। इन व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर अक्सर अवैध लॉयन शो और अनधिकृत वन्यजीव पर्यटन जैसी गतिविधियों से जुड़े होने के आरोप लगते रहे हैं, जिसकी पर्यावरणविदों ने भी हमेशा से कड़ी आलोचना की है।
राज्य के वन एवं पर्यावरण मंत्री अर्जुन मोढवाडिया ने दो टूक शब्दों में कहा है कि सरकार ने गिर और ग्रेटर गिर क्षेत्र में किसी भी नए रिसॉर्ट या होटल को मंजूरी नहीं देने का फैसला किया है। इसके साथ ही जो प्रतिष्ठान बिना उचित अनुमति के चल रहे हैं, उन्हें तत्काल बंद करवाकर उनके ढांचे को जमींदोज कर दिया जाएगा।
ऐसे अवैध निर्माणों की पहचान के लिए अधिकारियों द्वारा जल्द ही एक व्यापक सर्वेक्षण शुरू किया जाएगा। इस दौरान धारी-तुलसीश्याम कॉरिडोर पर विशेष नजर रखी जाएगी, जहां पहले से ही करीब 30 रिसॉर्ट्स खुल चुके हैं। दीव जाने वाले यात्रियों और श्रद्धालुओं की सेवा करने के अलावा, यह मार्ग संरक्षित सफारी क्षेत्रों के बाहर शेरों को देखने की चाहत रखने वाले पर्यटकों के लिए एक लोकप्रिय ठिकाना बन गया है।
अधिकारियों के अनुमान के मुताबिक तालाला, सासन और मेंडरडा बेल्ट में लगभग 550 होमस्टे चल रहे हैं, जो मुख्य रूप से गिर आने वाले पर्यटकों पर निर्भर हैं। वन विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि इनमें से कई को केवल होमस्टे के रूप में अनुमति दी गई थी, लेकिन बाद में नियमों को ताक पर रखकर इन्हें पूरी तरह से कमर्शियल रिसॉर्ट्स में तब्दील कर दिया गया।
हैरानी की बात यह है कि धारी में एक होमस्टे का परमिट रद्द होने के बावजूद वह धड़ल्ले से चल रहा है। विडंबना यह रही कि अवैध घोषित होने के बावजूद धारी वन प्रभाग ने उसी संपत्ति को रास्ता देने के लिए वन भूमि के डायवर्जन का प्रस्ताव तक पेश कर दिया था। आपको बता दें कि गुजरात उच्च न्यायालय भी कई मौकों पर वन विभाग को इन अवैध रिसॉर्ट्स के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने का सख्त निर्देश दे चुका है।
सरकार अब अभयारण्य के बीच से गुजरने वाली आंतरिक सड़कों पर वाहनों की आवाजाही को लेकर भी कड़े नियम लागू करने की योजना बना रही है। हालांकि ये सड़कें स्थानीय लोगों और सार्वजनिक परिवहन के लिए खुली रहती हैं, लेकिन अधिकारी बताते हैं कि पर्यटक अक्सर शेरों की तलाश में अपने वाहन रोककर इनका जमकर दुरुपयोग करते हैं।
इसे रोकने के लिए चेकपोस्ट पर निगरानी और कड़ी की जाएगी और तकनीक की मदद से वाहनों पर पैनी नजर रखी जाएगी। सासन-तालाला रोड पर पहले से ही एक ऐसी प्रणाली काम कर रही है, जहां वाहनों की गति पर नजर रखी जाती है। अगर कोई वाहन 30 किलोमीटर प्रति घंटे की तय सीमा को पार करता है, तो तुरंत अलर्ट जारी हो जाता है। अब संवेदनशील रास्तों पर लंबे समय तक रुकने वाले वाहनों का पता लगाने के लिए भी एक नया तकनीकी तंत्र जोड़ा जाएगा।
इसके अलावा, वन विभाग गिर के जंगलों के अंदर स्थित मंदिरों में आने वाले श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को नियंत्रित करने के तरीकों पर भी विचार कर रहा है। सफारी पर्यटकों की संख्या तो सीमित होती है, लेकिन वर्तमान में श्रद्धालुओं की आवाजाही काफी हद तक अनियंत्रित है।
नए प्रस्तावों के तहत पीक सीजन के दौरान इनकी संख्या को सीमित किया जाएगा। श्रद्धालुओं को अब प्रशिक्षित फॉरेस्ट ट्रैकर्स की देखरेख में छोटे-छोटे समूहों में ही जाने की अनुमति होगी। साथ ही, पहाड़ी मंदिरों तक तीर्थयात्रियों को ले जाने वाले स्थानीय डोलीवालों को भी खास ट्रेनिंग दी जाएगी, ताकि वे तय समूहों के साथ ही चलें और शेरों की शांति में कम से कम खलल पड़े।
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