comScore अहमदाबाद में गगनचुंबी इमारतें बढ़ाएंगी कार्बन का भारी संकट: अगले 25 सालों में चाहिए 31 लाख नए घर - Vibes Of India

Gujarat News, Gujarati News, Latest Gujarati News, Gujarat Breaking News, Gujarat Samachar.

Latest Gujarati News, Breaking News in Gujarati, Gujarat Samachar, ગુજરાતી સમાચાર, Gujarati News Live, Gujarati News Channel, Gujarati News Today, National Gujarati News, International Gujarati News, Sports Gujarati News, Exclusive Gujarati News, Coronavirus Gujarati News, Entertainment Gujarati News, Business Gujarati News, Technology Gujarati News, Automobile Gujarati News, Elections 2022 Gujarati News, Viral Social News in Gujarati, Indian Politics News in Gujarati, Gujarati News Headlines, World News In Gujarati, Cricket News In Gujarati

Vibes Of India
Vibes Of India

अहमदाबाद में गगनचुंबी इमारतें बढ़ाएंगी कार्बन का भारी संकट: अगले 25 सालों में चाहिए 31 लाख नए घर

| Updated: July 16, 2026 14:35

2050 तक शहर को चाहिए 31 लाख नए घर, गगनचुंबी इमारतों के अंधाधुंध निर्माण से मंडरा रहा है भारी कार्बन उत्सर्जन का खतरा

साल 2050 तक अहमदाबाद में हर छह में से पांच घर गगनचुंबी इमारत (हाईराइज) के रूप में होंगे। एक हालिया अध्ययन में यह चौंकाने वाला अनुमान सामने आया है। इस रिपोर्ट के अनुसार, शहर को अगले पच्चीस वर्षों में करीब 3.1 मिलियन (31 लाख) नए घरों की दरकार होगी।

शहर जिस ऊंचाई, घनत्व और गति से इन इमारतों के निर्माण की योजना बना रहा है, उसके कारण 2031 से 2050 के बीच 30.2 मिलियन टन सीमेंट और 13.3 मिलियन टन स्टील की खपत होने का अनुमान है।

शोधकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि इतने बड़े पैमाने पर होने वाले निर्माण से भारी मात्रा में कार्बन उत्सर्जन होगा, जो जलवायु के लिए निर्धारित सुरक्षित सीमा के एक बड़े हिस्से को खत्म कर सकता है।

जमीन की भारी कमी और लगातार बढ़ती एफएसआई (FSI) सीमाएं शहर के इस वर्टिकल विस्तार का मुख्य कारण हैं। यह जानकारी “असेसिंग स्ट्रेटेजीज टू डीकार्बोनाइज एंबॉडि़ड कार्बन इम्पैक्ट्स ऑफ रेजिडेंशियल बिल्डिंग्स इन इंडियन सिटीज: केस ऑफ अहमदाबाद” नामक अध्ययन में दी गई है। यह विस्तृत शोध ‘एनवायरनमेंटल रिसर्च: इंफ्रास्ट्रक्चर एंड सस्टेनेबिलिटी’ में प्रकाशित हुआ है।

इस अध्ययन के लेखक अहमदाबाद यूनिवर्सिटी की चैताली त्रिवेदी और मीनल पाठक तथा यूएनईपी कोपेनहेगन क्लाइमेट सेंटर के सुभाष धर हैं। उनके अनुसार, शहर की आबादी जो 2015 के बेसलाइन के आधार पर 7.1 मिलियन थी, वह 2050 तक बढ़कर 12.4 मिलियन हो जाने की उम्मीद है।

ये 3.1 मिलियन नई आवासीय इकाइयां अहमदाबाद शहरी विकास प्राधिकरण (Auda) के 1,866 वर्ग किलोमीटर के अधिकार क्षेत्र में बनाई जाएंगी।

शहर में जमीन की कमी ने योजनाकारों को अनुमत फ्लोर स्पेस इंडेक्स (FSI) बढ़ाने पर मजबूर कर दिया है, जिससे आवास के प्रकार में एक नाटकीय बदलाव आ रहा है। अध्ययन के मुताबिक, 2015 में कुल आवासों में फ्लैटों की हिस्सेदारी 51 प्रतिशत थी, जो 2050 तक बढ़कर 83 प्रतिशत हो जाएगी।

वर्तमान गुजरात व्यापक विकास नियंत्रण विनियम (GDCR) के तहत, इमारतों को 23 मंजिलों तक बनाने की अनुमति है। लेकिन शोधकर्ताओं का अनुमान है कि 2050 तक 20 प्रतिशत किफायती (अफोर्डेबल) और 15 प्रतिशत लग्जरी फ्लैट 50 मंजिलों तक ऊंचे हो जाएंगे।

इस बड़े निर्माण दौर में अकेले सीमेंट से 102.2 मिलियन टन संचयी कार्बन उत्सर्जन होगा, जो 2015 के बेसलाइन के मुकाबले दोगुना है। वहीं, स्टील से होने वाले उत्सर्जन के 1.8 गुना बढ़कर 52.7 मिलियन टन तक पहुंचने का अनुमान है।

वर्तमान स्थिति यह है कि अहमदाबाद में इमारतों को उनकी निर्धारित उम्र से काफी पहले ही गिराकर दोबारा बनाया जा रहा है। अध्ययन में बताया गया है कि नई निर्माण परियोजनाओं के लिए पुरानी इमारतों को उनके वास्तविक जीवनकाल से बहुत पहले ही ढहा दिया जाता है। इस कारण एक इमारत का औसत जीवनकाल मात्र 45 वर्ष आंका गया है।

मध्यम ऊंचाई वाली इमारतों की तुलना में गगनचुंबी इमारतें प्रति वर्ग मीटर कहीं अधिक सीमेंट और स्टील की खपत करती हैं। इसके अलावा, अहमदाबाद में निर्माण और ध्वस्तीकरण से निकलने वाले कचरे (मलबे) के पुनर्चक्रण की व्यवस्था भी प्रभावी रूप से चरमरा गई है।

नगर निगम प्रतिदिन इस तरह का केवल 1,000 टन कचरा ही इकट्ठा कर पाता है, जो शहर के कुल निर्माण मलबे का मात्र एक-चौथाई है। बाकी का तीन-चौथाई हिस्सा अनौपचारिक बाजारों में खो जाता है।

अध्ययन के लेखकों ने बताया कि कचरा इकट्ठा करने वाले लोग लैंडफिलिंग (जमीन भरने) से कमाई करते हैं, जिस वजह से वे कचरे को निर्धारित प्लॉटों पर नहीं डालते। सबसे बड़ी चिंता यह है कि जीडीसीआर (GDCR) सहित राष्ट्रीय और राज्य स्तर के किसी भी नियम में नए निर्माण में रीसायकल की गई सामग्री के उपयोग को अनिवार्य नहीं बनाया गया है।

यह भी पढ़ें-

अहमदाबाद में चेक बाउंस मामलों पर बड़ा बदलाव: स्पेशल कोर्ट अब सिर्फ बैंकों के लिए, आम आदमी को जाना होगा नियमित अदालत

गुजरात के समुद्री तटों का हाल: छोटे जीवों ने खोली ‘ब्लू फ्लैग’ शिवराजपुर बीच के भारी प्लास्टिक प्रदूषण की पो…

Your email address will not be published. Required fields are marked *