भारत और यूनाइटेड किंगडम (ब्रिटेन) के बीच बहुप्रतीक्षित व्यापक आर्थिक और व्यापार समझौता (CETA) अब आधिकारिक तौर पर लागू हो गया है। इस ऐतिहासिक फ्री ट्रेड एग्रीमेंट के शुरू होते ही बुधवार को गुजरात के सूरत से चार प्रमुख ज्वैलर्स ने ब्रिटेन के लिए अपना पहला कंसाइनमेंट रवाना कर दिया है।
सूरत डायमंड बोर्स बिल्डिंग कॉम्प्लेक्स स्थित रत्न और आभूषण निर्यात संवर्धन परिषद (GJEPC) के कार्यालय से इन बेशकीमती आभूषणों को ब्रिटेन के विभिन्न शहरों में भेजा गया। निर्यात करने वाली इन चार कंपनियों में गौरव ज्वैलर्स, रॉय डायमंड्स, शीश ज्वेल्स और पार्वती ज्वेल्स एलएलपी शामिल हैं। यह खेप 1 करोड़ डॉलर (10 मिलियन डॉलर) के उस शुरुआती शिपमेंट का एक अहम हिस्सा है, जिसमें सोने, हीरे, चांदी और प्लैटिनम के शानदार आभूषण शामिल हैं।
इस नए समझौते ने भारतीय रत्न और आभूषण उद्योग के लिए एक नए युग का दरवाजा खोल दिया है। इसके लागू होने के पहले ही दिन से भारतीय कारोबारियों को ब्रिटेन के बाजार में शून्य-शुल्क (जीरो-ड्यूटी) पहुंच मिल गई है। पहले ब्रिटेन में आभूषण आयात पर 4 प्रतिशत तक का टैरिफ लगता था, जो अब पूरी तरह खत्म हो गया है। इससे भारतीय निर्यातकों को ब्रिटेन के 4 अरब डॉलर के आभूषण आयात बाजार में एक बड़ी प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त मिलेगी, जिससे निर्यात, निवेश और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
वाणिज्यिक खुफिया और सांख्यिकी महानिदेशालय (DGCI&S) के आंकड़ों के अनुसार, भारत से ब्रिटेन को होने वाले निर्यात में जबरदस्त संभावनाएं हैं। पॉलिश्ड प्राकृतिक हीरों का निर्यात साल 2023 में 44.51 मिलियन डॉलर था, जो 2024 में बढ़कर 170.19 मिलियन डॉलर और 2025 में 151.19 मिलियन डॉलर हो गया। वहीं, लैब में तैयार किए गए पॉलिश्ड हीरों (Lab Grown Diamonds) का निर्यात 2023 के 6.26 मिलियन डॉलर से बढ़कर 2024 में 26.06 मिलियन डॉलर और 2025 में 27.58 मिलियन डॉलर तक पहुंच गया।
इसी तरह, सोने के आभूषणों का निर्यात 2023 में 70.81 मिलियन डॉलर था, जो 2024 में 328.44 मिलियन डॉलर और 2025 में छलांग लगाकर 394.14 मिलियन डॉलर हो गया। भारत चांदी के अर्ध-निर्मित आभूषण, इमिटेशन ज्वैलरी और अन्य प्रकार के आभूषणों का भी भारी मात्रा में निर्यात करता है। कुल मिलाकर, ब्रिटेन को भारत का कुल रत्न और आभूषण निर्यात 2023 में 164.77 मिलियन डॉलर था, जो 2024 में उछाल के साथ 941 मिलियन डॉलर और 2025 में 754.11 मिलियन डॉलर दर्ज किया गया।
जीजेईपीसी (GJEPC) के चेयरमैन किरीट भंसाली ने इसे भारतीय रत्न और आभूषण उद्योग के लिए एक गौरवपूर्ण क्षण बताया। उन्होंने कहा कि यह केवल सामान की आवाजाही नहीं है, बल्कि भारत की वैश्विक व्यापार यात्रा में एक नए अध्याय की मजबूत शुरुआत है। भंसाली ने उम्मीद जताई कि शून्य-शुल्क पहुंच के कारण, अगले तीन वर्षों में ब्रिटेन को होने वाला भारत का रत्न और आभूषण निर्यात 754 मिलियन डॉलर से बढ़कर लगभग 2.5 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंच जाएगा। इससे कारीगरों, डिजाइनरों और एमएसएमई (MSME) सेक्टर के लिए विकास के नए रास्ते खुलेंगे।
सूरत डायमंड बोर्स में हुए इस फ्लैग-ऑफ कार्यक्रम में आभूषणों के अलावा कई अन्य उत्पादों को भी हरी झंडी दिखाई गई। इनमें सूरत विशेष आर्थिक क्षेत्र (SEZ) से शीश ज्वेल्स की स्टडेड गोल्ड ज्वैलरी, वराछा से गौरव ज्वेल्स की प्लेन स्टडेड ज्वैलरी, सुमुल डेयरी रोड से रॉय डायमंड और SEZ से पार्वती ज्वेल्स की ज्वैलरी शामिल थी। इसके अतिरिक्त, सचिन इलाके से ‘एबीएनएन फ्रेश एक्सपो’ का प्रीबायोटिक सोडा ड्रिंक, SEZ से ‘अको परफ्यूम्स’ (ACO perfumes) के उत्पाद और ‘न्यसा इंडस्ट्रीज’ के टेक्सटाइल उत्पादों का भी सफलतापूर्वक निर्यात किया गया।
गौरव ज्वेल्स के मालिक गौरव लिम्बानी ने अपनी खुशी जाहिर करते हुए बताया कि भारत-ब्रिटेन एफटीए के बाद यह उनका पहला कंसाइनमेंट है। वह पूर्वी लंदन में जयंत रनिंगा के स्वामित्व वाली एक फर्म को लगभग 39,000 डॉलर मूल्य के प्लेन गोल्ड और लैब-ग्रोन डायमंड जड़ित आभूषण भेज रहे हैं। उन्होंने कहा कि पहले 4 प्रतिशत आयात शुल्क लगने के कारण व्यापार सीमित था, लेकिन अब शून्य शुल्क होने से लंदन के खरीदार भारत की ओर अधिक आकर्षित होंगे। उन्हें शुरुआती चरण में अपना व्यापार दोगुना और आने वाले वर्षों में चार गुना होने की पूरी उम्मीद है। वे वर्तमान में ब्रिटेन के साथ-साथ कनाडा में भी अपने उत्पादों का निर्यात कर रहे हैं।
पार्वती ज्वेल्स के राहुलभाई खेनी ने बताया कि उनकी कंपनी मध्य लंदन के हैटन गार्डन स्थित एक फर्म को करीब 9,500 पाउंड (ब्रिटिश पाउंड) मूल्य के प्लैटिनम और प्राकृतिक हीरे जड़े सोने के आभूषण निर्यात कर रही है। वे पिछले पांच वर्षों से ब्रिटेन की विभिन्न कंपनियों के साथ लगातार व्यापार कर रहे हैं। उन्होंने भरोसा जताया कि इस नए व्यापार समझौते के लागू होने के बाद उनके निर्यात की मात्रा दोगुनी हो जाएगी।
रॉय डायमंड फर्म के मालिक आकाश रॉय ने जानकारी दी कि वे बर्मिंघम की एक ज्वैलरी फर्म को लगभग 3,000 डॉलर के लैब-ग्रोन डायमंड जड़ित सोने के आभूषण भेज रहे हैं। उनके अनुसार, यह समझौता न केवल उनके निजी व्यवसाय को गति देगा, बल्कि भारत और विशेष रूप से सूरत के लिए एक बहुत बड़ा अवसर है। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस सफलता को देखकर कई अन्य हीरा व्यापारी भी ब्रिटेन के बाजार में अपना कारोबार फैलाएंगे।
जीजेईपीसी गुजरात क्षेत्र के चेयरमैन जयंतीभाई एन. सावलिया ने सूरत की वैश्विक अहमियत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि सूरत ने दुनिया की हीरा राजधानी और आभूषण निर्माण के एक प्रमुख केंद्र के रूप में अपनी धाक जमाई है। सावलिया को पूरा विश्वास है कि निर्माताओं, निर्यातकों और कारीगरों का यह बेहतरीन इकोसिस्टम ब्रिटेन में भारत के आभूषण निर्यात को ऐतिहासिक ऊंचाई पर ले जाने में मुख्य भूमिका निभाएगा।
उन्होंने अपनी बात का समापन करते हुए कहा कि इस पहले कंसाइनमेंट का रवाना होना सूरत के नेतृत्व को मजबूती से स्थापित करता है। यह इस बात का भी सटीक प्रमाण है कि उद्योग जगत को इस व्यापार समझौते से कितनी सकारात्मक उम्मीदें हैं। अब जबकि भारतीय आभूषण बिना किसी शुल्क के पहली बार ब्रिटिश बाजार में प्रवेश कर रहे हैं, सूरत के कारोबारी और कारीगर भारत के वैश्विक आभूषण निर्यात को नई दिशा देने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं।
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