पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और कमर्शियल जहाजों पर हो रहे हालिया हमलों के बीच भारत सरकार ने एक बेहद अहम कदम उठाया है। केंद्रीय पोत परिवहन मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने संघर्ष वाले क्षेत्रों में मौजूद भारतीय नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जहाजों की रियल-टाइम ट्रैकिंग के आदेश दिए हैं। अब इस क्षेत्र से गुजरने वाले हर उस जहाज की बारीक निगरानी की जाएगी, जिस पर भारतीय क्रू सदस्य सवार हैं, चाहे उस जहाज पर किसी भी देश का झंडा क्यों न लगा हो।
इस कड़े निर्देश के बाद समुद्री नियामक ‘डीजी शिपिंग’ एक विस्तृत ऑपरेशनल डैशबोर्ड तैयार कर रहा है। यह खास ऑनलाइन डैशबोर्ड फारस की खाड़ी, होर्मुज जलडमरूमध्य और ओमान की खाड़ी में जहाजों की आवाजाही पर नजर रखेगा। इसके जरिए जहाज की सटीक लोकेशन, स्वामित्व, माल, क्रू की कुल संख्या और उनकी स्थिति से जुड़ी हर जानकारी पल-पल मिलती रहेगी। इसके अलावा, खतरे के आकलन, अगले बंदरगाह, भोजन, ईंधन, दवाओं और संचार सुविधाओं की उपलब्धता का भी रियल-टाइम डेटा सरकार तक पहुंचता रहेगा।
यह महत्वपूर्ण फैसला पश्चिम एशिया में दो विदेशी झंडे वाले कमर्शियल जहाजों पर हुए ताज़ा हमलों के ठीक बाद लिया गया है। इन प्रभावित जहाजों पर 30 भारतीय नाविक सवार थे। मंत्रालय का स्पष्ट निर्देश है कि इस युद्धग्रस्त क्षेत्र में मौजूद एक-एक भारतीय नाविक का पूरा हिसाब रखा जाए। इसी कड़ी में, प्रभावित नाविकों और उनके परिवारों की त्वरित मदद के लिए विशेष संपर्क अधिकारियों (Liaison Officers) की नियुक्ति की जा रही है।
ये संपर्क अधिकारी परिवारों के लिए सिंगल पॉइंट ऑफ कॉन्टैक्ट के रूप में काम करेंगे। इनका मुख्य काम मेडिकल अपडेट, यात्रा संबंधी दस्तावेज़, परिवार की सहायता, स्वदेश वापसी और नाविक कल्याण कोष से मिलने वाली मदद का समन्वय करना होगा। साथ ही, बकाया वेतन, अनुबंध से जुड़े अधिकार और अन्य मुआवजे दिलाने में भी ये अधिकारी नाविकों और उनके परिजनों की पूरी मदद करेंगे।
इस गंभीर मुद्दे पर मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने विभिन्न मंत्रालयों और ओमान तथा ईरान में मौजूद भारतीय दूतावासों के प्रतिनिधियों के साथ एक उच्च-स्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक में भारतीय नाविकों के सामने आने वाले जोखिमों का आकलन किया गया और भारत की आपातकालीन प्रतिक्रिया तंत्र की भी समीक्षा की गई। प्राप्त जानकारी के अनुसार, वर्तमान में होर्मुज जलडमरूमध्य के पश्चिम में सात भारतीय झंडे वाले जहाज मौजूद हैं, जिन पर 148 भारतीय नाविक सवार हैं। इसके अतिरिक्त, उर्वरक (फर्टिलाइजर) ले जा रहे पांच विदेशी झंडे वाले जहाज भी भारत की ओर आ रहे हैं।
सुरक्षा ग्रिड को और मजबूत करने के लिए अधिकारियों को विदेश मंत्रालय (MEA) के साथ मिलकर ईरान, ओमान, यूएई और क्षेत्र के अन्य प्रभावित देशों में भारतीय मिशनों के साथ निकटता से काम करने को कहा गया है। इसका मकसद नेविगेशनल सुरक्षा, तटीय राज्यों की एडवाइजरी, सुरक्षित बंदरगाहों की व्यवस्था, अस्पतालों, मेडिकल इवैक्यूएशन, स्वदेश वापसी प्रक्रियाओं और चल रही जांच की स्थिति के बारे में सटीक जानकारी तुरंत हासिल करना है।
पोत परिवहन मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि प्रभावित क्षेत्र से गुजरने वाले हर जहाज की आवाजाही अब नए सिरे से किए गए खतरे के आकलन के बाद ही होगी। इसके लिए जहाज के मास्टर के पेशेवर फैसले और सक्षम समुद्री अधिकारियों के साथ सख्त समन्वय को पूरी तरह से अनिवार्य कर दिया गया है।
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