मंगलवार, 14 जुलाई को विदेश मंत्रालय ने भारतीय पासपोर्ट की कानूनी अहमियत और इसकी मूल परिभाषा को लेकर स्थिति स्पष्ट की। मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारतीय पासपोर्ट मुख्य रूप से देश के नागरिकों के भारत से प्रस्थान को विनियमित (रेगुलेट) करने के उद्देश्य से बनाया गया एक दस्तावेज है।
एक नियमित प्रेस वार्ता के दौरान सवालों का जवाब देते हुए जायसवाल ने इस प्रक्रिया की कानूनी पृष्ठभूमि पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि यह अहम दस्तावेज पासपोर्ट अधिनियम, 1967 के प्रावधानों के तहत सीधे भारत सरकार द्वारा जारी किया जाता है। किसी भी आवेदक को यह दस्तावेज सौंपने से पहले एक स्थापित प्रक्रिया के तहत पूरी गहन जांच और वेरिफिकेशन की जाती है।
प्रवक्ता ने आगे बताया कि किसी भी भारतीय नागरिक या अन्य व्यक्ति को पासपोर्ट जारी करने की पूरी व्यवस्था पासपोर्ट अधिनियम, 1967 और पासपोर्ट नियम, 1980 के सख्त दिशा-निर्देशों द्वारा संचालित होती है। इसी प्रेस वार्ता के दौरान जायसवाल ने एक बेहद दिलचस्प और हैरान करने वाला आंकड़ा भी साझा किया। उन्होंने जानकारी दी कि वर्तमान समय में देश के 8 प्रतिशत से भी कम नागरिकों के पास अपना पासपोर्ट मौजूद है।
विदेश मंत्रालय का यह विस्तृत आधिकारिक बयान उस हालिया चर्चा के कुछ हफ्तों बाद सामने आया है, जब एक सरकारी अधिकारी ने इसकी मान्यता पर बड़ी टिप्पणी की थी।
उस अधिकारी ने भारतीय पासपोर्ट को महज़ एक “यात्रा दस्तावेज” (ट्रैवल डॉक्यूमेंट) करार देते हुए कहा था कि यह किसी भी व्यक्ति का “नागरिकता का दस्तावेज” (सिटीजनशिप डॉक्यूमेंट) नहीं है। इसी पृष्ठभूमि में सरकार द्वारा पासपोर्ट की सटीक परिभाषा और नियम स्पष्ट किए गए हैं।
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