गांधीनगर: सड़क सुरक्षा और ट्रैफिक प्रबंधन को एक नई और आधुनिक दिशा देने के लिए अहमदाबाद जिले के विरमगाम में एक ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ (CoE) स्थापित किया जा रहा है। यह प्रस्तावित केंद्र विशेष रूप से फेशियल रिकग्निशन (चेहरा पहचानने वाली) तकनीक पर गहन शोध करेगा। इसका मुख्य उद्देश्य यह समझना है कि बार-बार ट्रैफिक नियम तोड़ने वालों या पुलिस की नजरों से बच रहे वांछित अपराधियों की पहचान करने के लिए, इस तकनीक को ‘त्रिनेत्र’ प्रणाली के साथ कानूनी और नैतिक रूप से कैसे जोड़ा जा सकता है।
अधिकारियों ने इस बात पर जोर दिया है कि ऐसी किसी भी तकनीक का उपयोग पूरी तरह से कानूनी ढांचे और आम नागरिकों की निजता से जुड़े नियमों के दायरे में ही किया जाएगा। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए इसी महीने की शुरुआत में भूमिपूजन समारोह आयोजित किया गया था। यह खास प्रोजेक्ट अहमदाबाद ग्रामीण पुलिस और होंडा मोटर कंपनी लिमिटेड (Honda Motor Company Ltd) का एक संयुक्त उद्यम है।
इस नए केंद्र में ट्रैफिक व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और एडवांस्ड एनालिटिक्स का भरपूर इस्तेमाल किया जाएगा। अधिकारियों के अनुसार, यह प्रस्तावित सुविधा राज्य के ‘त्रिनेत्र’ सर्विलांस नेटवर्क के तहत लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज का रणनीतिक उपयोग करेगी। इससे सड़क सुरक्षा को बढ़ावा मिलेगा और नियमों को सख्ती से लागू करने में मदद मिलेगी।
सूत्रों का कहना है कि शुरुआत में यह सेंटर मौजूदा त्रिनेत्र ढांचे से मिलने वाले लाइव वीडियो फीड का विश्लेषण करने पर अपना ध्यान केंद्रित करेगा। इसके जरिए बिना हेलमेट पहने या सीटबेल्ट लगाए बिना ड्राइविंग करने वालों पर निगरानी रखी जाएगी। साथ ही, ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन की सटीक पहचान करके कानून लागू करने वाली एजेंसियों के लिए महत्वपूर्ण खुफिया जानकारी जुटाई जाएगी।
नियमों के उल्लंघन का पता लगाने के अलावा, यह केंद्र विस्तृत रिपोर्ट, हीट मैप और ट्रेंड एनालिसिस भी तैयार करेगा। इन वैज्ञानिक आंकड़ों से प्रशासन को दुर्घटना संभावित क्षेत्रों (ब्लैक स्पॉट्स) की पहचान करने में काफी मदद मिलेगी। इसी डेटा के आधार पर पुलिसकर्मियों की अधिक प्रभावी तैनाती, जन जागरूकता अभियानों की सटीक योजना और बुनियादी ढांचे में आवश्यक सुधार किए जा सकेंगे।
आने वाले समय में यह सेंटर कई अन्य तकनीक-आधारित समाधानों को लागू करने की संभावनाओं का भी मूल्यांकन करेगा। इनमें ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR), AI-आधारित ट्रैफिक व्यवहार विश्लेषण और मोबाइल-आधारित रिपोर्टिंग सिस्टम मुख्य रूप से शामिल हैं। इन अत्याधुनिक उपकरणों को मौजूदा बुनियादी ढांचे, तकनीकी तैयारी और संसाधनों की उपलब्धता के आधार पर अलग-अलग चरणों में अपनाया जाएगा।
विभागीय अधिकारियों का कहना है कि इस पूरी पहल का मकसद केवल भौतिक बुनियादी ढांचे या कैमरों की संख्या बढ़ाना नहीं है, बल्कि राज्य के मौजूदा निगरानी नेटवर्क से अधिकतम और सटीक परिणाम प्राप्त करना है।
त्रिनेत्र प्लेटफॉर्म के साथ AI-पावर्ड एनालिटिक्स का तालमेल बिठाकर, सरकार ट्रैफिक नियमों के पालन को और अधिक सख्त बनाने की उम्मीद कर रही है। डेटा पर आधारित इन जानकारियों के जरिए शहरी यातायात को सुगम बनाने के साथ-साथ सड़क सुरक्षा में एक बड़ा बदलाव लाया जा सकेगा।
यह भी पढ़ें-
गुजरातियों ने बदला निवेश का तरीका, प्रॉपर्टी बेचकर म्यूचुअल फंड पर जता रहे भरोसा
सावधान! सोशल मीडिया और AI बिगाड़ रहे बच्चों की मानसिक सेहत, WHO ने सरकारों से की सख्त नियमों की मांग








