अहमदाबाद में एक चाय वाले के लिए 20 रुपये का डिजिटल पेमेंट अप्रत्याशित कानूनी मुसीबत का कारण बन गया है। तेलंगाना पुलिस द्वारा एक कथित साइबर धोखाधड़ी मामले की जांच के दौरान पैसों के लेन-देन में यह छोटी सी यूपीआई पेमेंट सामने आई थी। इसके चलते चाय बेचने वाले का पूरा बैंक खाता ही फ्रीज कर दिया गया, जिसके बाद उन्हें न्याय के लिए अदालत की शरण लेनी पड़ी।
यह मामला अहमदाबाद के मिर्जापुर इलाके का है, जहां सुल्तान अहमद शेख ‘अल-सफर पान एंड टी कॉर्नर’ नाम से अपनी दुकान चलाते हैं। बीते 19 अप्रैल को एक ग्राहक ने उन्हें यूपीआई के जरिए चाय-पान के लिए 20 रुपये का भुगतान किया था। इसी पेमेंट के बाद एचडीएफसी बैंक ने उनके खाते पर पूरी तरह से रोक लगा दी, जिसके खिलाफ उन्होंने अब गुजरात उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है।
जांच में यह तथ्य सामने आया कि यह छोटी सी रकम तेलंगाना की साइबराबाद साइबर क्राइम पुलिस की जांच के दायरे में आने वाले एक लेनदेन का हिस्सा थी। सुल्तान की याचिका के अनुसार, चूंकि धोखाधड़ी से जुड़ी चेन के विवादित 20 रुपये उनके खाते में पहुंचे थे, इसलिए जांच एजेंसी ने बैंक को उनका अकाउंट फ्रीज करने का निर्देश दिया। साइबर मामले में सीधे तौर पर आरोपी या संदिग्ध न होने के बावजूद, उन्हें अपनी ही जमा पूंजी तक पहुंच से वंचित कर दिया गया।
खाता फ्रीज होने का वास्तविक कारण पता चलने के बाद शेख ने इसे दोबारा चालू करवाने के लिए कई बार बैंक अधिकारियों से गुहार लगाई। हालांकि, बैंक ने यह कहते हुए खाता अनफ्रीज करने से साफ इनकार कर दिया कि वे तेलंगाना पुलिस के कड़े निर्देशों का पालन कर रहे हैं और यह कार्रवाई एक चल रही जांच का अहम हिस्सा है।
हर तरफ से निराशा हाथ लगने के बाद सुल्तान शेख ने अधिवक्ता शहजाद अंसारी और फहीम मेमन के माध्यम से उच्च न्यायालय का रुख किया। उनके वकीलों ने अदालत में मजबूती से दलील दी कि यह 20 रुपये की रकम सामान्य कारोबारी प्रक्रिया के तहत एक ग्राहक से प्राप्त हुई थी। अदालत के समक्ष बैंक रिकॉर्ड पेश करते हुए यह साबित किया गया कि यह महज एक नियमित भुगतान था और इसका कथित साइबर धोखाधड़ी से दूर-दूर तक कोई लेना-देना नहीं है।
याचिकाकर्ता का कहना है कि विवादित राशि केवल 20 रुपये थी, लेकिन खाते पर पूरी तरह से रोक लगने के कारण वे अपने पूरे बैंक बैलेंस का इस्तेमाल नहीं कर पा रहे हैं। इस अचानक हुई कार्रवाई ने उनके दैनिक वित्तीय कामकाज को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है, जिसमें उनके जरूरी खर्च और ईएमआई का भुगतान भी शामिल है।
मामले की गंभीरता से सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति निखिल करियल ने एक बेहद अहम टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि जब कोई व्यक्ति किसी आपराधिक मामले में आरोपी नहीं होता है, तो अधिकारी आमतौर पर पूरे बैंक खाते को ब्लॉक करने के बजाय केवल विवादित राशि को ही फ्रीज करते हैं।
अदालत ने राज्य सरकार को इस मामले में आवश्यक निर्देश प्राप्त करने को कहा है और शेख को राज्य के गृह विभाग को प्रतिवादी बनाने की आधिकारिक अनुमति भी दे दी है। सरकारी वकील को याचिका की एक प्रति सौंपने का निर्देश देते हुए अदालत ने कहा कि राज्य 24 जुलाई की अगली तारीख तक उचित निर्देश ले। फिलहाल इस मामले की सुनवाई आगे के लिए लंबित रखी गई है।
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