दक्षिण कोरिया के बुसान में आयोजित यूनेस्को की 48वीं विश्व धरोहर समिति (WHC) की बैठक में अहमदाबाद को लेकर गंभीर चिंताएं व्यक्त की गई हैं। समिति ने शहर के भीतर हाल ही में पूरे हुए दो बड़े निर्माण प्रोजेक्ट्स पर कड़ी आपत्ति जताई है। यूनेस्को का मानना है कि विशेषज्ञों की स्पष्ट चेतावनी और अनिवार्य हेरिटेज असेसमेंट प्रक्रियाओं की अनदेखी करते हुए इन प्रोजेक्ट्स को पूरा किया गया। इससे अहमदाबाद के ‘आउटस्टैंडिंग यूनिवर्सल वैल्यू’ (OUV) यानी इसके अद्वितीय वैश्विक महत्व को भारी नुकसान पहुंचने का खतरा पैदा हो गया है।
यह सख्त टिप्पणियां 19 से 29 जुलाई के बीच चले सत्र के दौरान सामने आईं। इस बैठक में एक ‘जॉइंट रिएक्टिव मॉनिटरिंग मिशन’ के निष्कर्षों की गहन समीक्षा की गई। इस विशेष टीम ने इसी साल मार्च के महीने में अहमदाबाद का दौरा कर वहां के जमीनी हालात का जायजा लिया था।
समिति ने दानापीठ फायर स्टेशन और वहां बनी मल्टी-लेवल पार्किंग सुविधा का विशेष रूप से जिक्र किया। रिपोर्ट के अनुसार, एक व्यापक ‘हेरिटेज इम्पैक्ट असेसमेंट’ (HIA) के बिना ही इस प्रोजेक्ट को खड़ा कर दिया गया।
साल 2023 में हुई एक तकनीकी समीक्षा में साफ तौर पर चेतावनी दी गई थी कि इस निर्माण को आगे नहीं बढ़ाया जाना चाहिए। विशेषज्ञों ने तब भी कहा था कि इसका शहर की ऐतिहासिक पहचान पर सीधा और स्थायी नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा, लेकिन इसके बावजूद काम जारी रहा।
इसके अलावा, कालूपुर रेलवे क्षेत्र के पुनर्विकास को लेकर भी यूनेस्को ने गहरी नाराजगी जाहिर की है। इस इलाके को पहले ही विश्व धरोहर के ‘बफर जोन’ में होने के कारण एक संभावित खतरे के रूप में चिह्नित किया गया था। निरीक्षकों ने पाया कि 2025 की शुरुआत तक यहां इमारतें लगभग पूरी तरह से बन चुकी थीं।
वहीं, भारत द्वारा जनवरी में सौंपी गई अंतरिम रिपोर्ट में न तो इन तैयार हो चुकी संरचनाओं का जिक्र था और न ही विरासत स्थल पर पड़ने वाले इनके वास्तविक प्रभाव का कोई आकलन किया गया था।
इन दोनों मामलों पर गहरा खेद जताते हुए यूनेस्को ने कहा कि यह अहमदाबाद के योजना नियमों में मौजूद एक बड़ी प्रणालीगत खामी को उजागर करता है। समिति ने मुख्य रूप से ‘कॉम्प्रिहेंसिव जनरल डेवलपमेंट कंट्रोल रेगुलेशंस’ (CGDCR), 2017 के क्लॉज 7.3 पर सवाल उठाए। इस नियम के तहत इमारतों की ऊंचाई केवल सड़क की चौड़ाई और प्लॉट के आकार के आधार पर तय की जाती है, जबकि इसमें विरासत संरक्षण को पूरी तरह से नजरअंदाज कर दिया गया है।
विश्व धरोहर की रक्षा सुनिश्चित करने के लिए समिति ने भारत से इस प्रावधान में तुरंत संशोधन करने को कहा है। यूनेस्को ने विशेष रूप से सिफारिश की है कि हेरिटेज क्षेत्र के भीतर किसी भी इमारत की अधिकतम ऊंचाई 15 मीटर तक ही सीमित रखी जानी चाहिए।
वहीं, जो प्रोजेक्ट्स पूरे हो चुके हैं, उनके प्रभाव को कम करने के लिए बड़े पैमाने पर पौधारोपण, लैंडस्केपिंग और सार्वजनिक स्थानों के डिजाइन में सुधार करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही, ऐतिहासिक कोर तक पैदल यात्रियों की पहुंच आसान बनाने और ऐतिहासिक मीनारों के तत्काल संरक्षण पर जोर दिया गया है।
अधिकारियों को हेरिटेज संरक्षण, प्रबंधन और पर्यटन से जुड़ी नई और संशोधित योजनाएं विश्व धरोहर केंद्र को सौंपने का निर्देश दिया गया है। यूनेस्को ने 1 दिसंबर 2027 तक एक व्यापक ‘स्टेट ऑफ कंजर्वेशन’ रिपोर्ट पेश करने को भी कहा है।
इन तमाम चिंताओं के बावजूद, यूनेस्को ने अहमदाबाद में चल रही कुछ संरक्षण पहलों की खुलकर तारीफ भी की। समिति ने ऐतिहासिक पोल घरों की निरंतर जीआईएस (GIS) मैपिंग और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा भद्र किले में किए जा रहे रूटीन संरक्षण कार्य की सराहना की।
इसके अलावा, सरदार पटेल भवन को एक संग्रहालय में बदलने की योजना और एक प्रस्तावित बस स्टॉप प्रोजेक्ट के दौरान हेरिटेज संरक्षण के प्रति गुजरात राज्य सड़क परिवहन निगम (GSRTC) को जागरूक करने के प्रयासों का भी स्वागत किया गया।
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