अहमदाबाद की एक सत्र अदालत ने रेप के एक मामले में 22 वर्षीय युवक को बरी कर दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता महिला के बयानों में कई विरोधाभास पाए और उसकी भूमिका पर बेहद सख्त टिप्पणी की। मामले की सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा कि 43 वर्षीय यह महिला संभवतः कई पुरुषों के साथ अपनी मर्जी से कैजुअल शारीरिक संबंध बनाने की आदी है।
कोर्ट की यह तीखी टिप्पणी मेडिकल और डीएनए सबूतों के आधार पर सामने आई है। इन जांच रिपोर्टों ने यह साफ कर दिया कि महिला ने घटना वाली रात किसी अन्य अज्ञात व्यक्ति के साथ भी शारीरिक संबंध बनाए थे। कोर्ट के अनुसार, महिला ने पुलिस से यह अहम बात छिपाई, जबकि उसका दावा था कि उसी रात उसके साथ गैंगरेप की वारदात हुई थी।
यह पूरा मामला जुलाई 2022 का है। एक 44 वर्षीय महिला ने खोखरा पुलिस स्टेशन पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई थी कि उसके 22 वर्षीय पड़ोसी और एक नाबालिग ने घर छोड़ने के बहाने उसका दोपहिया वाहन पर अपहरण कर लिया। महिला के मुताबिक, वे दोनों उसे मणिनगर रेलवे ट्रैक के पास ले गए, जहां उन्होंने उसके साथ कथित तौर पर मारपीट और दुष्कर्म किया।
अपनी शिकायत में महिला ने बताया था कि वारदात के बाद दोनों आरोपी उसे दोबारा मिले और लिफ्ट देकर जडेजा कॉर्नर चौराहे के पास छोड़ दिया। महिला का दावा था कि उसने वहीं रात बिताई और अगली सुबह पुलिस में जाकर मामला दर्ज कराया। इसके बाद पुलिस ने चार्जशीट दायर की और नाबालिग का मामला किशोर न्याय बोर्ड को भेज दिया गया।
ट्रायल के दौरान, 22 वर्षीय आरोपी ने कोर्ट में दलील दी कि दोनों परिवारों के बीच पैसों का विवाद चल रहा है और इसी पुरानी रंजिश के चलते उसे इस मामले में झूठा फंसाया गया है। सुनवाई के दौरान महिला ने अपने बयान में नाबालिग पर कोई आरोप नहीं लगाया। अदालत ने गवाही में कई मनगढ़ंत बातों, अतिशयोक्ति और तथ्यों के छिपाव पर भी गौर किया।
अदालत ने रेलवे ट्रैक के पास जबरन संबंध बनाने और आरोपियों द्वारा उसे घर छोड़ने के महिला के दावों को झूठा करार दिया। इस केस में असली सच्चाई डीएनए विश्लेषण से सामने आई, जिसने मामले की पूरी दिशा ही बदल दी। इस रिपोर्ट ने नाबालिग को पूरी तरह से दोषमुक्त साबित कर दिया।
डीएनए रिपोर्ट से यह चौंकाने वाला खुलासा भी हुआ कि शिकायतकर्ता के कपड़ों पर आरोपी राणा के अलावा किसी अज्ञात व्यक्ति का डीएनए भी मौजूद था। कोर्ट ने कहा कि यह रिपोर्ट इस बात का संकेत है कि आरोपी द्वारा कथित रेप के बाद महिला ने खोखरा पुलिस स्टेशन के पास किसी दुकान के बरामदे में रात नहीं बिताई थी। इसके बजाय, उसने किसी अन्य व्यक्ति के साथ शारीरिक संबंध बनाए थे।
अदालत ने सख्त लहजे में कहा कि महिला ने यह तथ्य पुलिस से छिपाया। इससे यह संभावना पैदा होती है कि 43 वर्षीय यह महिला कई पुरुषों के साथ अपनी मर्जी से संबंध बनाने की आदी है। कोर्ट ने यह भी निष्कर्ष निकाला कि महिला के निजी अंगों पर पाई गई चोटें उसी अज्ञात व्यक्ति के साथ संबंध बनाने का परिणाम हो सकती हैं।
अपने अंतिम फैसले में अदालत ने स्पष्ट किया कि इस बात की पूरी संभावना है कि महिला और आरोपी के बीच आपसी सहमति से संबंध बने हों। कोर्ट के अनुसार, आरोपी के पिता के साथ पुराना हिसाब चुकता करने के लिए महिला द्वारा इस झूठे मामले को रचने की थ्योरी को खारिज नहीं किया जा सकता। इन्ही सब पुख्ता आधारों पर कोर्ट ने युवक को बरी कर दिया।
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