गुजरात वन विभाग गिरनार पर्वत क्षेत्र के लिए विशेष रूप से 25 ट्रैकर्स की तैनाती करने जा रहा है। यह अहम फैसला जुलाई में एक 12 वर्षीय बच्चे पर हुए जानलेवा शेर के हमले और उस मार्ग पर लगातार शेरों के देखे जाने के बाद लिया गया है। इन ट्रैकर्स का मुख्य काम सीढ़ियों के रास्ते ऊपर स्थित मंदिरों तक जाने वाले श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना होगा।
गुजरात के सबसे पवित्र तीर्थस्थलों में शुमार माउंट गिरनार पर इन पदों के लिए भारी उत्साह देखने को मिला है। वन विभाग को इस ट्रैकर पद के लिए लगभग 3,400 आवेदन प्राप्त हुए हैं। यह भर्ती 11 महीने के अनुबंध पर की जा रही है, जिसमें प्रत्येक ट्रैकर को 15,914 रुपये प्रति माह का वेतन दिया जाएगा।
गिरनार पर्वत की चोटी तक पहुंचने के लिए लगभग 10,000 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं। यहां हिंदू और जैन धर्म के कई महत्वपूर्ण मंदिर स्थित हैं, जिन तक पहुंचने के लिए पुरानी सीढ़ी, नई सीढ़ी और दातार सीढ़ी का इस्तेमाल किया जाता है। आमतौर पर तीर्थयात्री इन मंदिरों के दर्शन के लिए रात या तड़के ही चढ़ाई करते हैं, जिससे वन्यजीवों से सामना होने का खतरा बना रहता है।
लगातार रखी जा रही है शेरों पर नजर
हाल ही में 6 अगस्त की रात को भी पुरानी और नई सीढ़ियों को पार करते हुए तीन शेर देखे गए थे। जूनागढ़ के उप वन संरक्षक (डीसीएफ) अक्षय जोशी ने बताया कि वन अधिकारियों ने इन शेरों के जंगल में वापस जाने तक उन पर लगातार नजर रखी। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान किसी भी तरह का मानव-वन्यजीव संघर्ष नहीं हुआ।
वन विभाग ने लोगों से अपील की है कि वे रात के समय केवल समूहों में ही यात्रा करें। अधिकारियों ने तीर्थयात्रियों को सख्त हिदायत दी है कि वे अपने बच्चों को बिल्कुल भी अकेला न छोड़ें और विभाग के सभी निर्देशों का पूरी तरह से पालन करें।
गुजरात स्टेट लायन कंजर्वेशन सोसाइटी (जीएसएलसीएस) के सदस्य और जूनागढ़ के डीसीएफ ने पिछले महीने इस क्षेत्र के लिए फॉरेस्ट ट्रैकर्स की नई भर्तियों की घोषणा की थी। इसके लिए आवेदन की अंतिम तिथि 22 जुलाई थी। वर्तमान में साक्षात्कार चल रहे हैं और जल्द ही सत्यापन प्रक्रिया पूरी होने के बाद अंतिम नियुक्तियां कर दी जाएंगी।
इस पद के लिए उम्मीदवारों की उम्र 35 वर्ष से कम होनी चाहिए और उनका 10वीं कक्षा पास होना अनिवार्य है। इसके साथ ही उनकी वन्यजीवों में गहरी रुचि भी होनी चाहिए। न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता के अलावा भर्ती प्रक्रिया में उम्मीदवारों की शारीरिक फिटनेस और वन्यजीवों के बारे में उनके ज्ञान को प्रमुखता से परखा जाएगा।
जुलाई की घटना के बाद उठाए गए सख्त कदम
गौरतलब है कि 11 जुलाई को एक 12 वर्षीय लड़का अपने परिवार के साथ मंदिर की ओर चढ़ाई कर रहा था, तभी एक शेर उसे खींच ले गया था। इस दर्दनाक घटना ने तीर्थयात्रियों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे। इसके बाद वन एवं पर्यावरण मंत्री अर्जुन मोढवाडिया ने माउंट गिरनार पर श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए कई उपायों की घोषणा की थी और यह नई भर्ती उसी योजना का एक हिस्सा है।
वन अधिकारियों के अनुसार इन नए ट्रैकर्स को गिरनार पर्वत के आसपास ड्यूटी पर रखा जाएगा। उनका मुख्य काम यह देखना होगा कि शेर तीर्थयात्रा की सीढ़ियों की तरफ न आएं। यदि किसी कारणवश वे आ भी जाते हैं, तो उन्हें सुरक्षित तरीके से वापस जंगल की ओर निर्देशित किया जा सके।
फिलहाल श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए सासन से फॉरेस्ट ट्रैकर्स की एक विशेष टीम को इस क्षेत्र में तैनात किया गया है। 11 जुलाई की घटना के बाद से शेरों के झुंड ने कम से कम दो बार गिरनार पर्वत की सीढ़ियों को पार किया है।
गुजरात में शेर संरक्षण के मामले में वन ट्रैकर्स को एक महत्वपूर्ण कड़ी माना जाता है। वर्तमान में राज्य के शेर वाले इलाकों में करीब 200 वन ट्रैकर काम कर रहे हैं। ये ट्रैकर शेरों की आवाजाही के बारे में वास्तविक समय की जानकारी देते हैं। जब कोई शेर मानव बस्ती के बहुत करीब आ जाता है, तो वे तुरंत अलर्ट जारी करते हैं या ट्रेन की चपेट में आने से इन जानवरों को बचाने का प्रयास करते हैं।
चेकपोस्ट और एआई कैमरों से होगी निगरानी
गिरनार पर्वत के आसपास 25 ट्रैकर्स की भर्ती के अलावा जिला वन अधिकारियों ने राज्य सरकार को सुरक्षा के लिए एक और बड़ा प्रस्ताव भेजा है। इस प्रस्ताव में माउंट गिरनार की तीनों सीढ़ियों पर अलग-अलग स्थानों पर नौ स्थायी चेकपोस्ट स्थापित करने की योजना है।
सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए तीर्थस्थल के पास के इलाकों में एआई-सक्षम कैमरे लगाने की भी बात कही गई है। इस आधुनिक तकनीक से शेर या तेंदुए की किसी भी गतिविधि को तुरंत कैमरे में कैद किया जा सकेगा और समय रहते वन विभाग को इसकी सूचना मिल सकेगी। एक वरिष्ठ अधिकारी ने स्पष्ट किया है कि यह अत्याधुनिक सुरक्षा प्रस्ताव अभी राज्य सरकार की मंजूरी के अधीन है।
यह भी पढ़ें-
धारावी पुनर्विकास: गणेश नगर-मेघवाड़ी में बिना नोटिस कार्रवाई के आरोपों पर DRP का पलटवार
A4 पेपर और नए फॉन्ट नियमों के खिलाफ गुजरात के वकीलों का हल्ला बोल, अदालतों पर जड़े ताले











