अहमदाबाद। गुजरात यूनिवर्सिटी (GU) में प्रभारी कुलपति का पदभार संभालने के एक महीने के भीतर ही जगदीश जोशी ने सख्त कदम उठाया है। उन्होंने पूर्व कार्यकाल के दौरान विवादित तरीके से नियुक्त किए गए करीब 10 अस्थायी कर्मचारियों को निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई छात्र संगठनों के भारी विरोध के बाद गठित की गई तीन सदस्यीय जांच समिति की सिफारिशों के आधार पर की गई है।
सूत्रों के अनुसार, इन कर्मचारियों की नियुक्ति पूर्व कुलपति नीरजा गुप्ता के कार्यकाल में विश्वविद्यालय के अहम पदों पर अस्थायी रूप से की गई थी। आरोप है कि इन भर्तियों के दौरान किसी भी प्रकार की पारदर्शी चयन प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। चौंकाने वाली बात यह है कि इनमें से कई लोग बैंक और ओएनजीसी (ONGC) के पूर्व अधिकारी थे।
इन अस्थायी कर्मचारियों को दिए जा रहे भारी-भरकम वेतन ने भी कई सवाल खड़े किए हैं। इन सभी का मासिक वेतन 1.5 लाख रुपये से लेकर 5 लाख रुपये के बीच था। एक बेहद हैरान करने वाला मामला गुसेक (GUSEC) का सामने आया है, जहां नियुक्त किए गए एक अधिकारी को 5 लाख रुपये प्रतिमाह का वेतन दिया जा रहा था। आरोप है कि इस अधिकारी ने पिछले तीन वर्षों के दौरान लगभग 1.75 करोड़ रुपये प्राप्त किए हैं।
इस तरह की मनमानी नियुक्तियों के कारण विश्वविद्यालय के नियमित फैकल्टी सदस्यों में भी भारी नाराजगी पनप रही थी। हालात तब और बिगड़ गए जब सेंटर फॉर प्रोफेशनल कोर्सेस के एक निदेशक को प्रतिष्ठित केएस स्कूल ऑफ बिजनेस मैनेजमेंट का अतिरिक्त प्रभार सौंप दिया गया। इस फैसले ने परिसर के भीतर असंतोष को और ज्यादा भड़का दिया।
पूर्व कुलपति नीरजा गुप्ता का कार्यकाल समाप्त होने के बाद छात्र संगठनों ने इन नियुक्तियों को लेकर जोरदार प्रदर्शन शुरू कर दिया था। इसके बाद गुजरात यूनिवर्सिटी प्रशासन को मजबूरन एक जांच समिति का गठन करना पड़ा। इसी समिति ने मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए इन सभी कर्मचारियों को निलंबित करने की सिफारिश की थी। अब इन कर्मचारियों की योग्यता, पात्रता और इनकी पूरी नियुक्ति प्रक्रिया की गहराई से पड़ताल की जा रही है।
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