एक मजबूत निवेश पोर्टफोलियो तैयार करने का मतलब सिर्फ इक्विटी, डेट और गोल्ड में से किसी एक को चुनना नहीं होता है। आप किस एसेट में अपना कितना पैसा लगाते हैं, यह समय के साथ आपके ओवरऑल रिटर्न और बाजार के उतार-चढ़ाव से निपटने की क्षमता को पूरी तरह बदल सकता है।
FundsIndia Research ने जनवरी 2000 से जुलाई 2026 तक के रोलिंग रिटर्न का इस्तेमाल करते हुए इक्विटी, डेट और गोल्ड के कई संयोजनों का तुलनात्मक अध्ययन किया है। इस गहन विश्लेषण में ऐसे पोर्टफोलियो शामिल किए गए जिनमें इक्विटी की हिस्सेदारी बहुत अधिक थी, साथ ही उन विकल्पों को भी परखा गया जिनमें डेट और गोल्ड का अनुपात ज्यादा रखा गया था।
आंकड़े स्पष्ट रूप से बताते हैं कि ऐसा कोई एक जादुई फॉर्मूला नहीं है जिसने हर दौर में सबसे ज्यादा मुनाफा दिया हो। हालांकि, सात साल की अवधि के दौरान 70% इक्विटी, 15% डेट और 15% गोल्ड का संयोजन अपने संतुलित रिटर्न और बेहतरीन निरंतरता के कारण सबसे शानदार विकल्प बनकर सामने आया है।
कौन सा एसेट कॉम्बिनेशन रहा सबसे बेहतरीन?
FundsIndia ने सात साल की रोलिंग अवधि में कुल छह अलग-अलग संयोजनों की तुलना की है। इनमें तीन केवल इक्विटी-डेट वाले पोर्टफोलियो थे, जबकि बाकी तीन में निवेश के सुरक्षित विकल्प के तौर पर गोल्ड को भी शामिल किया गया था।
इन सभी छह एसेट-एलोकेशन संयोजनों में 70:15:15 (इक्विटी:डेट:गोल्ड) वाले पोर्टफोलियो ने सबसे अधिक 15% का औसत रिटर्न दर्ज किया। सबसे खास बात यह रही कि इस संयोजन ने सात साल की रोलिंग अवधि के 92% समय में 10% से अधिक का शानदार सालाना रिटर्न दिया है।
इसकी तुलना में, 70% इक्विटी और 30% डेट वाले पोर्टफोलियो ने औसतन 13.8% का रिटर्न दिया और 87% बार 10% का आंकड़ा पार किया। वहीं, 30% इक्विटी और 70% डेट वाले अधिक रूढ़िवादी पोर्टफोलियो का औसत रिटर्न महज 10.7% रहा, जो केवल 49% अवधियों में ही 10% से ऊपर जा सका।
डेटा से यह भी साफ होता है कि पोर्टफोलियो में ज्यादा सोना शामिल करने से हमेशा नतीजे बेहतर नहीं होते। 50:25:25 के अनुपात वाले पोर्टफोलियो ने 14.2% का औसत रिटर्न दिया, जबकि 30:35:35 के संयोजन का औसत 13.2% रहा। यह रुझान दर्शाता है कि केवल कई एसेट क्लास होना ही काफी नहीं है, बल्कि डेट और गोल्ड का सही अनुपात तय करना सबसे ज्यादा मायने रखता है।
क्या डेट और गोल्ड से कम हुआ जोखिम?
सात साल के रोलिंग डेटा से पता चलता है कि जिन पोर्टफोलियो में डेट और गोल्ड शामिल थे, उनमें शुद्ध इक्विटी की तुलना में अधिकतम गिरावट (मैक्सिमम ड्रॉडाउन) काफी कम थी।
70:15:15 वाले पोर्टफोलियो में अधिकतम 40% की गिरावट देखी गई, जो 70% इक्विटी और 30% डेट वाले पोर्टफोलियो के बिल्कुल बराबर थी। वहीं 50:25:25 वाले पोर्टफोलियो में अधिकतम 27% की गिरावट दर्ज की गई, जबकि 30:35:35 वाले पोर्टफोलियो में यह आंकड़ा महज 17% रहा। इसके विपरीत, इसी समयावधि के दौरान Nifty 50 TRI में अधिकतम 59% की भारी गिरावट दर्ज की गई थी।
जब हम न्यूनतम सात-वर्षीय रिटर्न पर नजर डालते हैं, तो यह तुलना और भी दिलचस्प हो जाती है। Nifty 50 TRI का न्यूनतम रोलिंग रिटर्न 5% था, जबकि 70:15:15 वाले पोर्टफोलियो के लिए यह 7% रहा। इसी तरह 50:25:25 और 30:35:35 वाले संयोजनों ने भी क्रमशः 7% और 6% का न्यूनतम रिटर्न दिया।
क्या पांच साल की अवधि में भी कारगर है यह रणनीति?
यह शानदार प्रदर्शन केवल सात साल की लंबी अवधि तक सीमित नहीं है। पांच साल की रोलिंग अवधि में, 70:15:15 वाले पोर्टफोलियो ने 15.6% का औसत सालाना रिटर्न दिया। इसकी तुलना में 70:30 इक्विटी-डेट ने 14.4% और Nifty 50 TRI ने 16% का रिटर्न दिया है।
निरंतरता के मामले में भी 70:15:15 वाले पोर्टफोलियो ने अपना दबदबा बनाए रखा और पांच साल की रोलिंग अवधि के 85% समय में 10% से अधिक का सालाना रिटर्न दिया। 70:30 इक्विटी-डेट पोर्टफोलियो के लिए यह आंकड़ा 79% और Nifty 50 TRI के लिए 77% था।
यह विश्लेषण इस बात का दावा नहीं करता कि 70:15:15 हर किसी के लिए दुनिया का सबसे बेहतरीन पोर्टफोलियो है। कोई भी अंतिम परिणाम निवेशक की समय सीमा, जोखिम सहने की क्षमता और भविष्य के वित्तीय लक्ष्यों पर निर्भर करता है।
इस पूरी रिसर्च में यह मानकर चला गया है कि जब भी कोई एसेट अपने लक्षित आवंटन से 5% से अधिक भटक जाता है, तो पोर्टफोलियो को सालाना आधार पर रीबैलेंस किया जाता है। इसलिए, ये रिटर्न संपत्तियों को एक बार खरीदकर छोड़ने के बजाय तय आवंटन को बनाए रखने की एक सक्रिय रणनीति पर आधारित हैं।
25 साल के इन ऐतिहासिक आंकड़ों से सबसे बड़ा सबक यह मिलता है कि एसेट एलोकेशन किसी भी निवेशक के अनुभव को पूरी तरह बदल सकता है, भले ही रिटर्न का मुख्य जरिया इक्विटी ही क्यों न हो। सही संयोजन का मतलब केवल रिटर्न को अधिकतम करना नहीं है, बल्कि मुनाफे की संभावना और बड़े नुकसान को झेलने की क्षमता के बीच एक परफेक्ट संतुलन बनाना है।
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