comScore महिला सहकारिता में गुजरात पिछड़ा, 5 साल में मिले मात्र 1 करोड़ रुपये, आंध्र को 4200 करोड़ का फंड - Vibes Of India

Gujarat News, Gujarati News, Latest Gujarati News, Gujarat Breaking News, Gujarat Samachar.

Latest Gujarati News, Breaking News in Gujarati, Gujarat Samachar, ગુજરાતી સમાચાર, Gujarati News Live, Gujarati News Channel, Gujarati News Today, National Gujarati News, International Gujarati News, Sports Gujarati News, Exclusive Gujarati News, Coronavirus Gujarati News, Entertainment Gujarati News, Business Gujarati News, Technology Gujarati News, Automobile Gujarati News, Elections 2022 Gujarati News, Viral Social News in Gujarati, Indian Politics News in Gujarati, Gujarati News Headlines, World News In Gujarati, Cricket News In Gujarati

Vibes Of India
Vibes Of India

महिला सहकारिता में गुजरात पिछड़ा, 5 साल में मिले मात्र 1 करोड़ रुपये, आंध्र को 4200 करोड़ का फंड

| Updated: August 27, 2026 14:24

NCDC के आंकड़ों में हुआ बड़ा खुलासा; देश के सबसे मजबूत सहकारी अर्थतंत्र वाले गुजरात की महिला समितियों को वित्तीय वर्ष 2025-26 में मिले मात्र 25 लाख रुपये, अन्य राज्यों के मुकाबले काफी पीछे छूटा गुजरात।

अहमदाबाद। भारत के सबसे मजबूत सहकारी अर्थतंत्र वाले राज्यों में गिने जाने वाले गुजरात के आंकड़े बेहद चौंकाने वाले हैं। सहकारिता मंत्रालय द्वारा राज्यसभा में पेश किए गए हालिया दस्तावेजों के अनुसार, राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (NCDC) से पिछले पांच वर्षों में गुजरात की महिला सहकारी समितियों को वित्तीय सहायता के तौर पर मात्र 1.01 करोड़ रुपये ही प्राप्त हुए हैं।

देशभर के राज्यों को दिए गए फंड के आंकड़ों से पता चलता है कि महिला सहकारिता के लिए कुल फंडिंग में भारी उछाल आया है। वित्तीय वर्ष 2023-24 में सभी सूचीबद्ध राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को दी गई कुल NCDC सहायता 711.78 करोड़ रुपये थी। साल 2025-26 में यह आंकड़ा बढ़कर 4,926.49 करोड़ रुपये तक पहुंच गया।

हालांकि, इस शानदार राष्ट्रीय वृद्धि के विपरीत गुजरात की स्थिति बेहद कमजोर नजर आती है। वित्तीय वर्ष 2024-25 में खाली हाथ रहने के बाद, इस नवीनतम वित्तीय वर्ष में गुजरात के हिस्से में केवल 25 लाख रुपये की सहायता राशि ही आ सकी है।

सीधे शब्दों में समझें तो गुजरात को मिलने वाली सहायता राशि बेहद निचले स्तर पर अटकी रही और इसमें कोई निरंतर वृद्धि देखने को नहीं मिली। राज्य को साल 2022-23 में सबसे ज्यादा 50 लाख रुपये की सहायता मिली थी। इसके बाद गिरावट का दौर शुरू हुआ और अगले वर्ष यह आंकड़ा 26 लाख रुपये रह गया। साल 2024-25 में तो एक भी पैसा नहीं मिला और 2025-26 में मामूली सुधार के साथ यह राशि महज 25 लाख रुपये दर्ज की गई।

यह स्थिति तब और भी ज्यादा निराशाजनक लगती है जब अन्य राज्यों को प्राप्त हुए फंड से इसकी तुलना की जाती है। अकेले वित्तीय वर्ष 2025-26 में आंध्र प्रदेश को 4,200 करोड़ रुपये का भारी-भरकम फंड दिया गया है।

इसी अवधि के दौरान तेलंगाना को 500 करोड़ रुपये, राजस्थान को 190.16 करोड़ रुपये, महाराष्ट्र को 35 करोड़ रुपये और मध्य प्रदेश को 0.58 करोड़ रुपये प्राप्त हुए। वहीं गुजरात को केवल 0.25 करोड़ (25 लाख) रुपये से ही संतोष करना पड़ा। इसका सीधा सा मतलब यह है कि 2025-26 में जारी कुल 4,926.49 करोड़ रुपये की सहायता राशि में गुजरात की हिस्सेदारी 0.005 प्रतिशत से भी कम रही है।

फंडिंग की यह भारी असमानता इसलिए भी हैरान करती है क्योंकि खुद सहकारिता मंत्रालय ने महिलाओं के नेतृत्व वाली और स्वयं सहायता समूहों (SHG) से जुड़ी सहकारी समितियों के लिए विशेष वित्तपोषण तंत्र को रेखांकित किया है। इन तंत्रों में ‘स्वयं शक्ति सहकार योजना’ प्रमुख है।

इसके अलावा डेयरी, पशुधन और खाद्य प्रसंस्करण जैसे क्षेत्रों की महिला समितियों के लिए ‘नंदिनी सहकार योजना’ और युवा महिला उद्यमियों के लिए ‘युवा सहकार योजना’ जैसी बेहतरीन योजनाएं मौजूद हैं।

सरकार के जवाब से यह पूरी तरह स्पष्ट है कि फंड प्राप्त करने के कई रास्ते मौजूद हैं। राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम योग्य महिला सहकारी समितियों को राज्य सरकारों के माध्यम से या फिर सीधे तौर पर वर्किंग कैपिटल लोन, मार्जिन मनी और टर्म लोन मुहैया कराता है।

सामान्य नियमों के तहत, सीधे वित्तपोषित होने वाली सहकारी समितियों का कम से कम तीन साल से संचालित होना और बिना पेड-अप शेयर कैपिटल गंवाए सकारात्मक नेटवर्थ बनाए रखना जरूरी होता है। इसके अलावा ‘युवा सहकार योजना’ के तहत उन नई पात्र महिला समितियों को भी समर्थन दिया जाता है, जिन्हें काम करते हुए कम से कम तीन महीने हो चुके हों।

तमाम योजनाओं, नियमों और स्पष्ट वित्तीय विकल्पों के बावजूद गुजरात से सामने आए ये आंकड़े एक बड़ा सवाल खड़ा करते हैं। आखिर जब फंडिंग के इतने सारे शानदार विकल्प उपलब्ध हैं, तो फिर गुजरात में महिला सहकारी समितियों को मिलने वाली NCDC की सहायता लगातार इतनी कम क्यों बनी हुई है।

यह भी पढ़ें-

दिल्ली: तिलक नगर में 21 वर्षीय मॉडल मुस्कान की घर में घुसकर चाकुओं से गोदकर हत्या, आरोपी जिम ट्रेनर इमरान फरार

पंजाब में गोलियां बरसाकर फरार हुआ जग्गू भगवानपुरिया का गुर्गा, गुजरात ATS ने होटल से दबोचा

Your email address will not be published. Required fields are marked *