नई दिल्ली के ऐतिहासिक भारत मंडपम में 25 अगस्त 2026 को एवीपीएन (AVPN) ग्लोबल कॉन्फ्रेंस 2026 का भव्य शुभारंभ हुआ। इस अवसर पर अदाणी फाउंडेशन की चेयरपर्सन डॉ. प्रीति अदाणी ने दुनिया भर से आए प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए परोपकारी रणनीतियों में बड़े बदलाव का आह्वान किया। भारत में पहली बार आयोजित हो रहे इस प्रतिष्ठित सम्मेलन में उन्होंने ‘क्षमता के लिए पूंजी’ (Capital for Capacity) के निवेश पर जोर दिया।
डॉ. अदाणी ने स्पष्ट किया कि परोपकार का अर्थ केवल लोगों का जीवन बदलना नहीं है, बल्कि उन्हें अपना जीवन स्वयं बदलने में सक्षम बनाना है। उन्होंने जोर देकर कहा कि आज के समय की सबसे बड़ी जरूरत महज जीवन निर्वाह के लिए दिए जाने वाले फंड से आगे बढ़कर स्थायी प्रभाव पैदा करने वाले निवेश की ओर बढ़ने की है। उनका मानना है कि आने वाले समय में व्यवहारिक बदलाव, संस्था निर्माण, कौशल विकास और जलवायु कार्रवाई के लिए किया गया निवेश ही परोपकार के नए युग को परिभाषित करेगा।
भारत की विकास यात्रा को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि आज का भारत ‘विकसित भारत 2047’ के विजन के साथ एकजुट है। देश का सामाजिक क्षेत्र का फंड 310 बिलियन डॉलर को पार कर गया है, जो 13 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि दर से बढ़ रहा है। डॉ. अदाणी ने इसे ‘आत्मनिर्भर विकास’ का एक उत्कृष्ट उदाहरण बताया, जहां भारत के विकास की कहानी खुद भारतीयों द्वारा लिखी जा रही है।
देश में जमीनी स्तर पर हो रहे नवाचार की सराहना करते हुए उन्होंने बताया कि भारत में अब दो लाख से अधिक मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स हैं। खास बात यह है कि इनमें से अधिकांश महानगरों के बजाय छोटे शहरों और गांवों में फैले हैं। उन्होंने अदाणी ग्रुप के हालिया अभियान ‘वंदे भारतम’ का जिक्र किया, जिसमें 26 हजार से अधिक स्टार्टअप्स ने हिस्सा लिया और समाज व पर्यावरण पर सकारात्मक प्रभाव डालने वाले समाधान प्रस्तुत किए।

वैश्विक चुनौतियों पर चिंता व्यक्त करते हुए डॉ. अदाणी ने जलवायु परिवर्तन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के बढ़ते प्रभाव और सोशल मीडिया के अत्यधिक उपयोग से बच्चों और वयस्कों में बढ़ रहे अवसाद व तनाव का भी उल्लेख किया। उन्होंने इसे आज के समय का विरोधाभास बताया, जहां हमारे पास अभूतपूर्व क्षमता और पूंजी होने के बावजूद उनके उपयोग को लेकर भारी विखंडन मौजूद है।
वर्ष 2026 को अदाणी फाउंडेशन के लिए एक मील का पत्थर बताते हुए डॉ. अदाणी ने संस्था के 30 साल पूरे होने का जश्न भी साझा किया। फाउंडेशन की सफलता को उन्होंने महाराष्ट्र के चुरडी गांव की किरण हरिनखेड़े की प्रेरक कहानी से जोड़ा। पशुधन विकास पहल से जुड़कर किरण ने बेहतर दुग्ध उत्पादन किया और महिलाओं द्वारा संचालित डेयरी उद्यम का हिस्सा बनीं। आज वह अपनी आय से अपने बच्चों की उच्च शिक्षा का खर्च उठा रही हैं।
डॉ. अदाणी ने अपने संबोधन का समापन करते हुए कहा कि अदाणी फाउंडेशन ने ऐसे हजारों लाभार्थी तैयार किए हैं, जिससे सालाना 10 मिलियन डॉलर से अधिक की वैल्यू चेन बनी है। उन्होंने आर्थिक स्वतंत्रता और अवसरों की समानता को ही सच्ची आज़ादी बताते हुए वैश्विक समुदाय से भारत के युवाओं, गैर-लाभकारी संस्थाओं और समुदायों को और अधिक सक्षम बनाने के लिए आगे आने की अपील की।
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