अहमदाबाद: भारत की सबसे बड़ी निजी ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी अडाणी एनर्जी सॉल्यूशंस लिमिटेड (AESL) ने एक प्रमुख ट्रांसमिशन प्रोजेक्ट हासिल किया है। यह प्रोजेक्ट कर्नाटक में उत्पन्न होने वाली रिन्यूएबल एनर्जी को महाराष्ट्र के प्रमुख लोड केंद्रों तक पहुंचाने के लिए है।
करीब 4,700 करोड़ रुपये के अनुमानित पूंजीगत व्यय वाले इस प्रोजेक्ट से सतारा, पुणे और मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन (MMR) में पंप स्टोरेज इकोसिस्टम को एक बड़ा समर्थन मिलेगा। इस महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट का नाम “नेटवर्क एक्सपेंशन स्कीम इन वेस्टर्न रीजन टू कैटर टू पंप स्टोरेज पोटेंशियल नियर सतारा (अप टू 4500 MW) – पार्ट ए” है।
कंपनी ने इसे टैरिफ बेस्ड कॉम्पिटिटिव बिडिंग (TBCB) प्रक्रिया के जरिए जीता है। इस पारदर्शी बिडिंग में एईएसएल सबसे कम बोली लगाने वाली कंपनी बनकर उभरी। यह प्रोजेक्ट स्पेशल पर्पज व्हीकल (SPV) ‘सतारा पावर ट्रांसमिशन लिमिटेड’ के तहत पूरा किया जाएगा।
इस बड़े प्रोजेक्ट को 36 महीनों के भीतर पूरा कर राष्ट्र को समर्पित करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके चालू होने से कंपनी के पोर्टफोलियो में 562 सर्किट किलोमीटर (ckm) ट्रांसमिशन लाइन और 9,000 एमवीए (MVA) ट्रांसफॉर्मेशन क्षमता जुड़ जाएगी।
इस नए विस्तार के साथ एईएसएल का कुल ट्रांसमिशन नेटवर्क बढ़कर 29,739 सर्किट किलोमीटर और ट्रांसफॉर्मेशन क्षमता 1,43,425 एमवीए तक पहुंच जाएगी। इस बड़ी कामयाबी के बाद कंपनी की कुल ट्रांसमिशन ऑर्डर बुक अब लगभग 85,000 करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गई है।
अडाणी एनर्जी सॉल्यूशंस लिमिटेड के सीईओ कंदर्प पटेल ने कहा कि पंप स्टोरेज प्रोजेक्ट्स भारत के क्लीन एनर्जी ट्रांजिशन में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। यह बड़े पैमाने पर रिन्यूएबल एनर्जी को ग्रिड में एकीकृत करने के लिए जरूरी लचीलापन और विश्वसनीयता प्रदान करते हैं।
उन्होंने आगे बताया कि सतारा ट्रांसमिशन प्रोजेक्ट रिन्यूएबल एनर्जी की निकासी और एनर्जी स्टोरेज डिप्लॉयमेंट दोनों को समर्थन देने के लिए एक अहम ट्रांसमिशन बैकबोन तैयार करेगा। इससे दक्षिण और पश्चिमी ग्रिड के बीच पावर फ्लो और मजबूत होगा।
प्रोजेक्ट के बुनियादी ढांचे की बात करें तो इसके तहत सतारा में 765/400 केवी (kV) सबस्टेशन की स्थापना की जाएगी। इसके अलावा कोल्हापुर-सतारा 765 केवी डबल-सर्किट ट्रांसमिशन लाइन बिछाई जाएगी और कोल्हापुर पूलिंग स्टेशन का विस्तार भी किया जाएगा।
भारत ने 2030 तक 500 गीगावाट नॉन-फॉसिल एनर्जी क्षमता स्थापित करने का लक्ष्य रखा है, जिसमें अत्याधुनिक ट्रांसमिशन इंफ्रास्ट्रक्चर एक अनिवार्य रीढ़ की तरह काम कर रहा है। एईएसएल सोलर, विंड और पंप स्टोरेज जैसे ग्रीन एनर्जी हब को भारत के प्रमुख औद्योगिक और शहरी केंद्रों से जोड़कर इस सेक्टर का लगातार नेतृत्व कर रही है।
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