एस्सेल ग्रुप के चेयरमैन और दिग्गज मीडिया कारोबारी सुभाष चंद्रा अपने हजारों करोड़ रुपये के कर्ज के निपटारे के बाद अब नई व्यावसायिक पारी शुरू करने जा रहे हैं। नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) द्वारा उनकी पुनर्भुगतान योजना को मंजूरी मिलने के बाद, उन्होंने स्विट्जरलैंड में निवेश पेशेवरों के साथ मिलकर काम करने की रूपरेखा तैयार की है। इसके साथ ही, वह भविष्य के होनहार स्टार्टअप्स में पैसा लगाने के लिए अपने परिवार से भी आर्थिक मदद ले सकते हैं।
हाल ही में NCLT ने सुभाष चंद्रा की व्यक्तिगत दिवाला समाधान प्रक्रिया के तहत एक अहम फैसला सुनाया था। ट्रिब्यूनल द्वारा मंजूर की गई योजना के अनुसार, चंद्रा 22,006.57 करोड़ रुपये के कुल स्वीकृत कर्ज दावों के एवज में केवल 6.5 करोड़ रुपये का भुगतान करेंगे। इसका सीधा मतलब यह है कि कर्जदाताओं को करीब 99.97 प्रतिशत का भारी-भरकम नुकसान (हेयरकट) उठाना पड़ा है। कर्ज के बदले रिकवरी महज 0.03 फीसदी ही हो पाई है, क्योंकि बकाये के भुगतान के लिए केवल 6.5 करोड़ रुपये की राशि ही उपलब्ध होगी।
इस पूरे घटनाक्रम के बाद सुभाष चंद्रा ने एक वीडियो संदेश जारी कर अपनी स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने बेहद सादगी से कहा कि वह खुद को एक ऐसा इंसान बिल्कुल नहीं मानते जिसने अपनी जिंदगी में सब कुछ खो दिया हो। चंद्रा ने बताया कि उनके पास बचे हुए आखिरी 6.5 करोड़ रुपये भी इस समाधान योजना के तहत चुकाने होंगे। फिलहाल उनके पास एक छोटा सा आवासीय घर है जिसे उन्होंने किराए पर दिया हुआ है, और उसी किराये की आय से उनकी रोजमर्रा की जिंदगी और खर्चे चल रहे हैं।
अपने हौसले को बुलंद रखते हुए इस दिग्गज कारोबारी ने कहा कि उन्हें अपने हालातों पर कोई पछतावा नहीं है और वह भविष्य में फिर से कमाई करेंगे। खुद को एक ‘पायनियर’ (अग्रणी) बताते हुए चंद्रा ने विश्वास जताया कि वह हमेशा से नए और बेहतरीन काम करना जानते हैं और आगे भी ऐसा ही करते रहेंगे। अपने नए वेंचर को लेकर उन्होंने बताया कि वह स्विट्जरलैंड में निवेश के क्षेत्र से जुड़े अपने दोस्तों के साथ काम करने की योजना बना रहे हैं। इस नए प्रोजेक्ट की विस्तृत जानकारी वे आने वाले एक से दो सप्ताह के भीतर साझा करेंगे।
अपने इस नए सफर को रफ्तार देने के लिए चंद्रा अपने परिवार से 2 से 4 करोड़ रुपये उधार लेने पर भी विचार कर रहे हैं। इस रकम का इस्तेमाल वे उन उभरते हुए स्टार्टअप्स में निवेश करने के लिए करेंगे, जिनमें उन्हें भविष्य के विकास की मजबूत संभावनाएं नजर आती हैं।
75 वर्षीय सुभाष चंद्रा, जिनका व्यापारिक साम्राज्य कभी मीडिया, इंफ्रास्ट्रक्चर और एम्यूजमेंट पार्क तक फैला हुआ था, अब एक बार फिर कॉर्पोरेट जगत में नए सिरे से अपनी छाप छोड़ने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।
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