comScore ओडिशा के जंगलों में मिले 5 दुर्लभ बेबी ओरांगुटान: 25 लाख है एक की कीमत, जानें हजारों किलोमीटर दूर भारत कैसे पहुंचे ये वनमानुष - Vibes Of India

Gujarat News, Gujarati News, Latest Gujarati News, Gujarat Breaking News, Gujarat Samachar.

Latest Gujarati News, Breaking News in Gujarati, Gujarat Samachar, ગુજરાતી સમાચાર, Gujarati News Live, Gujarati News Channel, Gujarati News Today, National Gujarati News, International Gujarati News, Sports Gujarati News, Exclusive Gujarati News, Coronavirus Gujarati News, Entertainment Gujarati News, Business Gujarati News, Technology Gujarati News, Automobile Gujarati News, Elections 2022 Gujarati News, Viral Social News in Gujarati, Indian Politics News in Gujarati, Gujarati News Headlines, World News In Gujarati, Cricket News In Gujarati

Vibes Of India
Vibes Of India

ओडिशा के जंगलों में मिले 5 दुर्लभ बेबी ओरांगुटान: 25 लाख है एक की कीमत, जानें हजारों किलोमीटर दूर भारत कैसे पहुंचे ये वनमानुष

| Updated: September 9, 2026 20:31

दक्षिण-पूर्व एशिया के जंगलों में रहने वाले 5 दुर्लभ ओरांगुटान ओडिशा में लावारिस हालत में मिले हैं। वन विभाग को अंतरराष्ट्रीय वन्यजीव तस्करी की गहरी आशंका है, जानिए इस मामले की पूरी सच्चाई।

ओडिशा के एक जंगल से पांच बेबी ओरांगुटान को रेस्क्यू किया गया है। यह घटना इसलिए भी बेहद चौंकाने वाली है क्योंकि ये जानवर मूल रूप से भारत में नहीं पाए जाते हैं। इनका प्राकृतिक आवास यहां से हजारों किलोमीटर दूर दक्षिण-पूर्व एशिया में है। इस असामान्य खोज के बाद अधिकारी इस बात की गहन जांच कर रहे हैं कि ये छोटे वनमानुष आखिर भारत कैसे पहुंचे।

बालासोर जिले के उदयपर-तलसारी इलाके में स्थित एक कैसुरीना (झाऊ) के बागान में इन पांचों ओरांगुटान को लावारिस हालत में पाया गया। वन्यजीव अधिकारियों को गहरी आशंका है कि इन जानवरों को अवैध रूप से भारत लाया गया है। हालांकि, उन्हें यहां तक पहुंचाने की सटीक परिस्थितियों और मास्टरमाइंड की फिलहाल जांच चल रही है।

क्वारंटाइन में रखे गए जानवर और तस्करी का शक

रेस्क्यू किए गए इन सभी जानवरों को सुरक्षित रूप से भुवनेश्वर के नंदनकानन जूलॉजिकल पार्क में स्थानांतरित कर दिया गया है। वहां उन्हें क्वारंटाइन में रखा गया है और पशु चिकित्सकों द्वारा उनके स्वास्थ्य की कड़ी जांच की जा रही है। ओडिशा के वन एवं पर्यावरण मंत्री गणेश राम सिंहखुंटिया ने एक चौंकाने वाला खुलासा करते हुए बताया कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में एक ओरांगुटान की कीमत 20 लाख से 25 लाख रुपये तक हो सकती है।

इस भारी कीमत से यह साफ अंदेशा होता है कि ये जानवर किसी बड़े अवैध वन्यजीव तस्करी गिरोह का हिस्सा हो सकते हैं। प्रशासन अब हवाई, जल और रेल मार्गों से इनकी संभावित तस्करी के सुराग तलाश रहा है ताकि अपराधियों तक पहुंचा जा सके।

आखिर क्या होते हैं ओरांगुटान?

कई बार लोग अज्ञानतावश इन्हें बंदर समझ लेते हैं, लेकिन ओरांगुटान वास्तव में ‘ग्रेट एप’ (विशाल वानर) प्रजाति का हिस्सा हैं। ये उसी परिवार से ताल्लुक रखते हैं जिसमें गोरिल्ला, चिंपैंजी, बोनोबो और इंसान आते हैं। बंदरों से इनका सबसे बड़ा शारीरिक अंतर यह है कि ग्रेट एप की पूंछ नहीं होती है। ये ‘पोंगो’ जीनस से संबंधित हैं और एशिया में प्राकृतिक रूप से पाए जाने वाले एकमात्र ग्रेट एप हैं। मलय और इंडोनेशियन भाषा में इनके नाम का अर्थ “जंगल का इंसान” होता है।

ये अपने लंबे, घने नारंगी या लाल-भूरे बालों और बेहद लंबे हाथों की वजह से आसानी से पहचाने जाते हैं। इनका शरीर पेड़ों पर जीवन बिताने के लिए पूरी तरह से अनुकूल होता है, जिसके कारण इन्हें दुनिया का सबसे बड़ा पेड़ों पर रहने वाला स्तनधारी जीव माना जाता है।

इनके हाथ इनके पैरों की तुलना में काफी लंबे होते हैं, जो इन्हें टहनियों पर चढ़ने और झूलने में मदद करते हैं। अन्य प्राइमेट्स के विपरीत, ओरांगुटान काफी एकांत जीवन जीना पसंद करते हैं। इनमें सबसे मजबूत और लंबा सामाजिक रिश्ता केवल एक मां और उसके बच्चे के बीच ही देखा जाता है।

प्राकृतिक आवास और इनकी प्रजातियां

जंगली ओरांगुटान दुनिया में केवल दक्षिण-पूर्व एशियाई द्वीपों बोर्नियो और सुमात्रा में ही पाए जाते हैं। बोर्नियो द्वीप इंडोनेशिया, मलेशिया और ब्रुनेई के बीच बंटा हुआ है, लेकिन ये जानवर सिर्फ इंडोनेशियाई और मलेशियाई हिस्सों में ही मिलते हैं। वहीं, सुमात्रा के ओरांगुटान सिर्फ सुमात्रा क्षेत्र में रहते हैं।

इसके अलावा तपनौली ओरांगुटान भी होते हैं, जिनका दायरा उत्तरी सुमात्रा के बतांग तोरू इकोसिस्टम तक ही सीमित है। ओडिशा में इनकी मौजूदगी इसलिए भी हैरान करती है क्योंकि ये अपने प्राकृतिक उष्णकटिबंधीय जंगलों से मीलों दूर पाए गए हैं।

वैज्ञानिक ओरांगुटान की तीन जीवित प्रजातियों को मान्यता देते हैं। इनमें बोर्नियन ओरांगुटान (पोंगो पिग्मेअस), सुमात्रन ओरांगुटान (पोंगो एबेली) और तपनौली ओरांगुटान (पोंगो तपनूलिएंसिस) शामिल हैं। बोर्नियन और सुमात्रन प्रजाति दिखने में काफी हद तक एक जैसे होते हैं, हालांकि सुमात्रन ओरांगुटान के बाल थोड़े लंबे होते हैं। फिलहाल अधिकारियों ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि ओडिशा से बचाए गए ये पांचों बच्चे किस विशिष्ट प्रजाति के हैं।

क्या खाते हैं ओरांगुटान और क्यों हैं खतरे में?

इनका मुख्य भोजन फल होता है, लेकिन ये पत्तियां, फूल, पेड़ों की छाल, कीड़े-मकोड़े और अन्य वनस्पतियां भी बड़े चाव से खाते हैं। भोजन की कमी होने पर ये पक्षियों के अंडे और कभी-कभार छोटे जानवरों का भी शिकार कर लेते हैं। रेस्क्यू के बाद ओडिशा में इन बच्चों को केले खाते हुए देखा गया था, हालांकि जंगली माहौल में केला हमेशा इनका प्राकृतिक आहार नहीं होता है।

आज यह प्रजाति अपने मूल आवासों में विलुप्ति के गंभीर खतरे का सामना कर रही है। जंगलों की कटाई, ताड़ के तेल (पाम-ऑयल) के बागानों का विस्तार, आग, शिकार और अवैध तस्करी ने इनकी आबादी को भारी नुकसान पहुंचाया है। अवैध पालतू व्यापार के लिए ओरांगुटान के बच्चों को सबसे ज्यादा निशाना बनाया जाता है।

बच्चों को पकड़ने के लिए शिकारी अक्सर उनकी मां को मार देते हैं। इनकी धीमी प्रजनन दर इस संकट को और गहरा कर देती है, क्योंकि एक बार आबादी घटने के बाद उसे दोबारा सामान्य होने में कई दशक लग जाते हैं।

यह भी पढ़ें-

नेपाल बाढ़ त्रासदी: 1200 मृतकों की पहचान के लिए भारत ने बढ़ाया मदद का हाथ, डीएनए सैंपलिंग में जुटीं भारतीय टीमें

3,260 फर्जी दलों के जरिए 10,000 करोड़ का काला धन सफेद, कांग्रेस का भाजपा पर सीधा हमला

Your email address will not be published. Required fields are marked *