नई दिल्ली: कांग्रेस पार्टी ने देश के इतिहास के सबसे बड़े टैक्स घोटाले का पर्दाफाश करने का दावा किया है। एआईसीसी के राष्ट्रीय प्रवक्ता और पूर्व राज्यसभा सांसद शक्तिसिंह गोहिल ने एक बड़ा खुलासा करते हुए आरोप लगाया है कि भारतीय जनता पार्टी के संरक्षण में 3,260 फर्जी राजनीतिक दलों के जरिए 10,000 करोड़ रुपये से अधिक का काला धन सफेद किया गया है।
गोहिल के अनुसार, भाजपा के करीबियों और उनकी ‘सी टीम’ ने देश भर में रजिस्टर्ड अनरिकॉग्नाइज्ड पॉलिटिकल पार्टी (आरयूपीपी) यानी फर्जी राजनीतिक दल बनाए। इन दलों का मुख्य उद्देश्य देश के सिस्टम को तोड़कर सरेआम टैक्स की लूट करना और करोड़ों रुपये की आमदनी वाले लोगों के काले धन को सफेद करना था।
वर्तमान इनकम टैक्स कानून के तहत 5 करोड़ रुपये से अधिक की आय वाले करोड़पतियों पर बेस टैक्स, 37 प्रतिशत सरचार्ज और 4 प्रतिशत सेस मिलाकर कुल लगभग 42.7 प्रतिशत का भारी-भरकम टैक्स लगता है। इसी टैक्स से बचने के लिए रिप्रेजेंटेशन ऑफ द पीपल एक्ट के उस प्रावधान का गलत फायदा उठाया गया, जिसमें राजनीतिक दलों को दिए गए चंदे पर जीरो टैक्स लगता है।
कांग्रेस नेता ने बताया कि इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 80जीजीसी और 80जीजीबी के तहत इन 3,260 फर्जी पार्टियों को 10,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का चंदा दिया गया। फर्जी दलों का संचालन करने वालों ने 2 से 15 प्रतिशत तक का मोटा कमीशन अपने पास रखा और बाकी रकम काले धन के रूप में वापस उन्हीं करोड़पतियों को लौटा दी गई।
इस खुले भ्रष्टाचार के सबूत सामने आने के बावजूद कड़ा एक्शन न होने पर कांग्रेस ने गंभीर सवाल उठाए हैं। गोहिल ने कहा कि अखबारों में खबरें छपने और टैक्स ट्रिब्यूनल द्वारा इसे साफ तौर पर फर्जीवाड़ा करार देने के बावजूद दोषियों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। इससे यह स्पष्ट होता है कि मोदी सरकार अपने चहेते लोगों को बचाने के लिए सुरक्षा कवच प्रदान कर रही है।
इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 276सी(1) और 277 के तहत इस तरह की टैक्स चोरी और फर्जी एंट्री के अपराध में 7 साल तक की सजा का प्रावधान है। इसके अलावा डिडक्शन रद्द होने के साथ-साथ 200 प्रतिशत का जुर्माना और कैश रिसिप्ट पर 78 प्रतिशत अतिरिक्त टैक्स लगना चाहिए था, लेकिन किसी भी आरोपी पर यह कार्रवाई नहीं की गई।
चुनाव आयोग की भूमिका पर भी सवाल खड़े किए गए हैं। वर्ष 2014 में चुनाव आयोग ने राजनीतिक फंडिंग में पारदर्शिता के लिए गाइडलाइन जारी की थी। इसके तहत स्टेट इलेक्शन ऑफिसर्स को चंदे और खर्च की पूरी डिटेल वेबसाइट पर डालनी थी और इनकम टैक्स विभाग को रिपोर्ट करनी थी, लेकिन नियमों की खुलेआम अनदेखी की गई।
इस महाघोटाले में कुछ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स की संलिप्तता भी सामने आई है जिन्होंने गलत तरीके से अकाउंटिंग कर इस पूरे खेल को अंजाम दिया। झारखंड आयकर विभाग के कुछ ईमानदार अधिकारियों ने इन चार्टर्ड अकाउंटेंट्स और फर्जीवाड़े के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करने की सिफारिश की थी, लेकिन सत्ता में बैठे आकाओं ने उस कार्रवाई को भी रोक दिया।
कांग्रेस ने इस घोटाले की निष्पक्ष जांच के लिए तत्काल प्रभाव से संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) के गठन की जोरदार मांग की है। पार्टी का स्पष्ट कहना है कि फर्जी दलों के कर्ताधर्ताओं, भ्रष्ट चार्टर्ड अकाउंटेंट्स और टैक्स चोरी करने वाले बोगस डोनर्स के खिलाफ तुरंत क्रिमिनल केस दर्ज कर जेल भेजा जाए और उन पर 200 प्रतिशत का जुर्माना लगाया जाए।
कांग्रेस ने सरकार से यह भी स्पष्ट करने को कहा है कि इन फर्जी पार्टियों को करोड़ों का चंदा देने वाले लोग और कंपनियां कौन थीं, उनका पूरा ब्योरा सार्वजनिक डोमेन में रखा जाए। अंत में पार्टी ने सरकार से जवाब मांगा है कि इन 3,260 फर्जी राजनीतिक दलों को चलाने वाले कितने लोग आज भाजपा में शामिल होकर पदाधिकारी बनकर बैठे हैं, इसका भी खुलासा होना चाहिए।
यह भी पढ़ें-









