comScore 'क्या तुम सच में अमेरिकी हो?': ट्रंप की 'MAGA' ब्रिगेड की नस्लीय कसौटी पर परखे जा रहे भारतीय मूल के नेता - Vibes Of India

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‘क्या तुम सच में अमेरिकी हो?’: ट्रंप की ‘MAGA’ ब्रिगेड की नस्लीय कसौटी पर परखे जा रहे भारतीय मूल के नेता

| Updated: September 21, 2026 13:28

विवेक रामास्वामी से लेकर निक्की हेली तक, ट्रंप के कट्टर समर्थक होने के बावजूद इन नेताओं को बार-बार देनी पड़ रही है अपनी 'अमेरिकी पहचान' की अग्निपरीक्षा।

लंबे समय से डोनाल्ड ट्रंप के इर्द-गिर्द रहने वाले भारतीय मूल के रूढ़िवादी नेता खुद को यह दिलासा देते रहे हैं कि अमेरिका में नस्ल नहीं, बल्कि विचारधारा मायने रखती है। लेकिन अब उन्हें एक बेहद चुभने वाली सच्चाई का सामना करना पड़ रहा है। ‘MAGA’ (मेक अमेरिका ग्रेट अगेन) की दुनिया में, आप वैचारिक परीक्षा तो पास कर सकते हैं, लेकिन नस्ल और खान-पान की कसौटी पर अक्सर फेल हो जाते हैं।

चंडीगढ़ में जन्मीं और ट्रंप की करीबी कानूनी विशेषज्ञ हरमीत ढिल्लों ने खुद को पूरी तरह ‘अमेरिकन’ साबित करने के लिए बीफ डिनर की एक तस्वीर पोस्ट की थी। इस पर उन्हें ‘MAGA’ ट्रोल्स के भारी मजाक का सामना करना पड़ा। इसी तरह रूढ़िवादी नेता दिनेश डिसूजा को नस्लीय हमलों से अपनी बेटी को बचाने के लिए यह तक कहना पड़ा कि उसकी मां श्वेत (White) है।

ओहियो के गवर्नर पद के उम्मीदवार विवेक रामास्वामी और ट्रंप की पूर्व यूएन राजदूत निक्की हेली को भी कई मौकों पर यह साबित करना पड़ा है कि वे ‘पर्याप्त रूप से अमेरिकी’ हैं।

दूसरी ओर, डेमोक्रेट्स और उदारवादी नेताओं ने इस नफरत को कहीं ज्यादा करीब से झेला है। वाशिंगटन की सांसद प्रमिला जयपाल लंबे समय से कट्टरपंथियों से “वापस भारत जाओ” जैसे ताने सुन रही हैं। उन्हें जान से मारने की धमकियां तक मिली हैं और एक बार उनके सिएटल स्थित घर के बाहर एक हथियारबंद शख्स भी पाया गया था।

हालांकि, कुछ नेताओं ने इसका करारा जवाब भी दिया है। पिछले हफ्ते एक ‘MAGA’ रिपब्लिकन ने इलिनोइस के डेमोक्रेट सांसद राजा कृष्णमूर्ति से कहा था कि “अपनी करी (Curry) लो और घर वापस जाओ।” कृष्णमूर्ति ने पलटवार करते हुए कहा, “मैं यहीं रहूंगा और मेरी करी भी। अमेरिका मेरा घर है। कोई भी कट्टरपंथी यह तय नहीं कर सकता कि कौन अमेरिकी है या कौन डिनर में क्या खाएगा।”

ट्रंप के खेमे में शामिल हुए भारतीय मूल के इन रिपब्लिकन नेताओं की इस दुर्दशा पर प्रगतिशील (Progressive) धड़े के लोग तंज कस रहे हैं। खुद भयानक नस्लीय हमलों का शिकार हो चुके उदारवादी टिप्पणीकार मेहदी हसन ने मुंबई मूल के दिनेश डिसूजा पर तीखा वार किया। हसन ने कहा, “सोचिए, आपको अपने भूरे रंग से कितनी नफरत होगी कि आप इंटरनेट पर दुनिया को यह बताते फिर रहे हैं कि आपकी बेटी की मां एक श्वेत महिला है।”

ओहियो से रिपब्लिकन नेता और खुद को हिंदू बताने वाले विवेक रामास्वामी इस पहचान के संकट से सबसे लंबे समय तक जूझते रहे हैं। पूर्व राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार रामास्वामी ने अपना राजनीतिक करियर वामपंथियों की नस्लीय राजनीति पर हमला करके बनाया था। लेकिन अब ओहियो के गवर्नर पद की रेस में उन्हें खुद दक्षिणपंथियों की नस्लीय शत्रुता का सामना करना पड़ रहा है।

रिपब्लिकन प्राइमरी चुनाव में रामास्वामी के प्रतिद्वंद्वी केसी पुच ने उन पर तीखा हमला बोला। पुच ने उन्हें एक “भारतीय लड़का” कहा जो सिर्फ एक “अमेरिकी होने का नाटक” कर रहा है। पुच ने उनकी असल राष्ट्रीयता पर ही सवाल खड़े कर दिए। इसके जवाब में रामास्वामी ने ‘MAGA’ समर्थकों की उस मानसिकता पर हमला बोला, जो मानती है कि अमेरिका पर सिर्फ “मूल अमेरिकियों” (Heritage Americans) का ही विशेषाधिकार है।

लगातार मिल रही नस्लीय गालियों और ‘वापस भारत जाओ’ जैसी मांगों से परेशान होकर रामास्वामी को एक्स (X) और इंस्टाग्राम पर अपने निजी पोस्ट तक बंद करने पड़े। यह कितनी बड़ी विडंबना है कि जो रामास्वामी कभी यह तर्क देते थे कि नस्ल से अमेरिकी पहचान तय नहीं होनी चाहिए, आज वही व्यक्ति उन लोगों को यह सिद्धांत समझा रहा है जो मानते हैं कि आपकी वंशावली ही सब कुछ है।

निक्की हेली भी इस विरोधाभास का शिकार हो चुकी हैं। दक्षिण कैरोलिना में सिख अप्रवासी माता-पिता के घर जन्मीं पूर्व गवर्नर और संयुक्त राष्ट्र की राजदूत हेली को 2023 के राष्ट्रपति अभियान के दौरान रूढ़िवादी टिप्पणीकार एन कूल्टर ने “अपने देश वापस जाने” को कहा था।

कूल्टर ने भारत में गाय और चूहे की पूजा का भी सार्वजनिक मजाक उड़ाया था। इतना ही नहीं, 2024 के रिपब्लिकन प्राइमरी अभियान के दौरान खुद डोनाल्ड ट्रंप ने कई बार हेली के जन्म के नाम ‘निमरता’ का मंच से मजाक बनाया था।

एक दिलचस्प और विवादित मामला उप-राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार जेडी वेंस का भी है, जिनकी शादी एक भारतीय-अमेरिकी महिला से हुई है। 2024 में ट्रंप का रनिंग मेट बनने के बाद वेंस की पत्नी उषा वेंस को श्वेत-राष्ट्रवादी निक फ्यूएंट्स और अन्य चरमपंथियों ने निशाना बनाया।

फ्यूएंट्स ने इस अंतरजातीय विवाह (Interracial marriage) पर हमला किया और उषा की भारतीय वंशावली को लेकर नफरत भरे बयान दिए। वेंस को मजबूरन अपनी पत्नी के बचाव में आलोचकों को बेहद सख्त और तीखा जवाब देना पड़ा।

इस साल मिशिगन सीनेट के उम्मीदवार अब्दुल अल-सईद के साथ एक बहस में भी उषा वेंस का जिक्र अप्रत्यक्ष रूप से नस्लीय तंज के रूप में हुआ। जब जेडी वेंस ने इस्लाम पर अल-सईद के विचारों की आलोचना करते हुए अपने दादा का जिक्र किया, तो अल-सईद ने तंज कसते हुए पूछा कि क्या वेंस उषा को अपने दादा से मिलवाने के लिए अतीत में ले जाएंगे।

इस पूरी स्थिति में एक अजीब सी विडंबना है, जो कहीं न कहीं अमेरिकी समाज की कड़वी सच्चाई दिखाती है। अप्रवासियों और उनके बच्चों से वे लोग देशभक्ति का प्रमाण मांग रहे हैं, जिनके अपने पूर्वजों को भी कभी इस देश में खुद को साबित करना पड़ा था।

खुद को अमेरिकी साबित करने के लिए हरमीत बीफ की प्लेट सजाती हैं, दिनेश अपनी श्वेत पत्नी का जिक्र करते हैं, विवेक ओहियो का अपना जन्म प्रमाण पत्र दिखाते हैं और निक्की चर्च जाती हैं। फिर भी, ‘MAGA’ के दरवाजे पर खड़ा कट्टरपंथी बाउंसर उनसे वही एक सवाल पूछता रहता है: “लेकिन क्या आप वाकई में अमेरिकी हैं?”

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