गुजरात में वाहनों के पंजीकरण के मामले में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है। हमेशा से इस रेस में सबसे आगे रहने वाला अहमदाबाद अब सूरत से पिछड़ गया है। आंकड़ों के मुताबिक, 15 सितंबर तक सूरत में 1.8 लाख वाहनों का पंजीकरण हो चुका था। यह संख्या पूरे साल 2025 में दर्ज किए गए 2.2 लाख वाहनों का लगभग 80 प्रतिशत है। व
हीं, इसी अवधि के दौरान अहमदाबाद (GJ01-सुभाष ब्रिज सीरीज) में केवल 1.4 लाख वाहन ही पंजीकृत हुए, जो साल 2025 में दर्ज कुल 1.8 लाख वाहनों का 76 फीसदी है।
पंजीकरण की विकास दर में भी सूरत काफी तेजी से आगे बढ़ रहा है। साल 2024 में सूरत की विकास दर 6 प्रतिशत से अधिक थी, जो 2025 में बढ़कर 9 प्रतिशत हो गई। इसके विपरीत, अहमदाबाद में यह वृद्धि दर 2024 में 3 प्रतिशत और 2025 में मात्र 5.6 प्रतिशत ही रही।
सूरत के क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी (RTO) एच.एम. पटेल ने इस तेजी की मुख्य वजह बताई है। उनका कहना है कि सूरत में तेजी से हो रहे विकास और बढ़ती आबादी के कारण लोग नए विकसित इलाकों में बस रहे हैं। जब तक इन नए क्षेत्रों में सार्वजनिक परिवहन की पर्याप्त सुविधा विकसित नहीं हो जाती, तब तक लोग अपने कार्यस्थल तक पहुंचने के लिए निजी वाहन खरीदना पसंद कर रहे हैं।
एच.एम. पटेल ने एक और महत्वपूर्ण कारण का जिक्र करते हुए बताया कि हाल ही में आई बाढ़ के बाद पिछले दो महीनों में 80 करोड़ रुपये के 4,516 वाहन बीमा क्लेम पास किए गए हैं। इसके चलते बड़ी संख्या में लोगों ने नए वाहन खरीदे हैं। चूंकि बीमा की प्रक्रिया अभी भी जारी है, इसलिए आने वाले समय में भी नए वाहनों की खरीदारी का यह सिलसिला जारी रहने की उम्मीद है।
परिवहन विशेषज्ञों का मानना है कि सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था के अपर्याप्त होने के कारण सूरत में निजी वाहनों पर निर्भरता बहुत अधिक है। एसवीएनआईटी (SVNIT) के परिवहन प्रणाली विभाग के प्रोफेसर गौरांग जोशी ने बताया कि अहमदाबाद में 12 प्रतिशत लोग सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करते हैं, जबकि सूरत में यह आंकड़ा मात्र 3 प्रतिशत है।
प्रोफेसर जोशी ने सूरत के लोगों की उच्च आय को भी इस वृद्धि का एक बड़ा कारण बताया है। उनके अनुसार, सूरत के कुछ घरों में तो स्थिति यह है कि परिवार के हर सदस्य के पास अपना एक निजी वाहन मौजूद है।
दूसरी तरफ, अहमदाबाद में वाहनों का पंजीकरण तीन अलग-अलग आरटीओ मंडलों में बंटा हुआ है, जिनमें वस्त्राल, सुभाष ब्रिज और बावला शामिल हैं। अधिकारियों का कहना है कि शहर का अधिकांश नया विकास बाहरी इलाकों, खासकर साणंद, गोधावी और मणिपुर की तरफ हो रहा है, जो सीधे तौर पर बावला आरटीओ के अंतर्गत आते हैं। पूर्वी अहमदाबाद में भी काफी विकास हो रहा है, जिससे वस्त्राल आरटीओ में पंजीकरण की संख्या में उछाल देखा जा रहा है।
सुभाष ब्रिज आरटीओ के अधिकारियों के अनुसार, उनके क्षेत्र में 2 से 4 प्रतिशत की सामान्य वृद्धि दर्ज की जा रही है। इसका मुख्य कारण लोगों द्वारा अपने पुराने वाहनों को कबाड़ में देकर उनकी जगह नए वाहन खरीदना है।
इन सबके बीच बावला महंगे वाहनों के पंजीकरण का एक महत्वपूर्ण केंद्र बनकर उभरा है। यहां विशेष रूप से 15 से 20 लाख रुपये या उससे अधिक कीमत वाली गाड़ियां भारी संख्या में पंजीकृत हो रही हैं।
सूत्रों का कहना है कि बावला में महंगे वाहनों के बढ़ते पंजीकरण के पीछे मुख्य वजह यह है कि कई खरीदार अहमदाबाद शहर में लगने वाले कुछ विशेष नगरपालिका करों (म्युनिसिपल टैक्स) से बचने के लिए अपने वाहनों का पंजीकरण शहर के बाहर करवा रहे हैं।
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