मध्य प्रदेश के देवास जिले में सोमवार तड़के अवैध शराब ले जा रहे एक ट्रक को रोकने की कोशिश में खातेगांव थाना प्रभारी इंस्पेक्टर दिलीप पुरी की कुचलकर हत्या कर दी गई। इस खौफनाक वारदात ने एक बार फिर मध्य प्रदेश और गुजरात के बीच चल रहे अवैध शराब तस्करी के गहरे गठजोड़ को बेनकाब कर दिया है।
मंगलवार को मध्य प्रदेश सरकार ने एक आधिकारिक बयान में यह स्वीकार किया कि अवैध शराब की यह बड़ी खेप आयशर कैंटर ट्रक (पंजीकरण संख्या MP-43-H-4786) के जरिए हरदा जिले के टिमरनी से गुजरात भेजी जा रही थी। इस खुलासे के बाद पुलिस टीमों ने ताबड़तोड़ छापेमारी की और अवैध शराब से लदे वाहन को जब्त कर लिया। मामले में खातेगांव पुलिस स्टेशन में आबकारी अधिनियम के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है।
पुलिस ने इस अवैध शराब नेटवर्क के कथित सरगना और टिमरनी निवासी राहुल जायसवाल को गिरफ्तार कर लिया है। इसके साथ ही अलीराजपुर के रहने वाले केराम सिंह चंगोड़ को भी हिरासत में लिया गया है। जांच में सामने आया है कि केराम ने ही ड्राइवर गजेंद्र उर्फ अक्कू रावत (निवासी अलीराजपुर) को यह ट्रक मुहैया कराया था।
इस पूरी घटना की शुरुआत 2 नवंबर की रात को हुई, जब पुलिस को गुप्त सूचना मिली कि टिमरनी से गुजरात भारी मात्रा में अवैध शराब की तस्करी की जा रही है। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (कन्नौद) के निर्देश पर इस खेप को पकड़ने के लिए चार अलग-अलग टीमों का गठन किया गया। नाकेबंदी के दौरान रात करीब 1:30 बजे संदलपुर फाटा स्थित नर्मदा ढाबे के सामने शराब से लदा यह आयशर वाहन खड़ा दिखाई दिया।
इंस्पेक्टर पुरी ने मौके पर पहुंचकर ड्राइवर से गाड़ी से बाहर आने और तलाशी देने को कहा। लेकिन तलाशी देने के बजाय, ड्राइवर ने जान से मारने की नीयत से वाहन सीधे इंस्पेक्टर पुरी पर चढ़ा दिया और शराब समेत वहां से फरार हो गया। इस दर्दनाक हमले में बुरी तरह घायल हुए इंस्पेक्टर दिलीप पुरी ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। आरोपी ड्राइवर ने मौके पर मौजूद कांस्टेबल सोहन जाट को भी कुचलने का प्रयास किया, जिससे उन्हें भी काफी चोटें आई हैं।
हत्याकांड के तुरंत बाद पुलिस ने सघन अभियान चलाते हुए शराब से लदे ट्रक को बरामद कर लिया। खातेगांव थाने में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 103(1), 109(1), 121(2) और 3(5) के साथ-साथ आबकारी अधिनियम की धारा 34(2) के तहत एफआईआर दर्ज की गई है।
अधिकारियों ने जानकारी दी है कि शराब का यह ठेका बड़वानी निवासी पतेन्द्र जायसवाल के नाम पर पंजीकृत है। इस कारोबार में राहुल जायसवाल, मनीष जायसवाल और मोहिन जायसवाल की 30-30 प्रतिशत की हिस्सेदारी है, जबकि पतेन्द्र की हिस्सेदारी 10 प्रतिशत है।
हरदा जिले के टिमरनी के रहने वाले राहुल जायसवाल को इस पूरे नेटवर्क का मास्टरमाइंड माना जा रहा है। उस पर इन तीनों शराब दुकानों के माध्यम से अवैध आपूर्ति का जाल बिछाने का आरोप है। पुलिस ने राहुल को हिरासत में ले लिया है, जबकि इस मामले में इंदौर निवासी विजय राव को भी गिरफ्तार किया गया है।
फरार आरोपियों की तलाश में फिलहाल पांच जिलों में पुलिस टीमों द्वारा लगातार छापेमारी की जा रही है। देवास के पुलिस अधीक्षक ने फरार आरोपियों की गिरफ्तारी में मदद करने वाली कोई भी पुख्ता सूचना देने वाले को 10,000 रुपये का नकद इनाम देने की घोषणा की है।
यह कोई पहला मामला नहीं है। इसी साल अगस्त में गुजरात के भावनगर जिले में जहरीली शराब पीने से 11 लोगों की मौत हो गई थी। उस त्रासदी में भी अवैध शराब बनाने और सप्लाई करने वाला मुख्य आरोपी मध्य प्रदेश के उज्जैन का ही रहने वाला था, जिसे बाद में गुजरात पुलिस ने उज्जैन से ही गिरफ्तार किया था।
इस ताज़ा घटनाक्रम पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए जीतू पटवारी ने टिप्पणी की कि यह नरेंद्र मोदी के ‘नए भारत’ का एक विडंबनापूर्ण उदाहरण है। उन्होंने कहा कि जहां मौतें हुईं और जहां से जहरीली शराब की आपूर्ति की गई, उन दोनों ही जगहों पर आधिकारिक तौर पर शराब पर पूर्ण प्रतिबंध लागू है।
उन्होंने आगे कहा कि गुजरात में शराब पर पूरी तरह से पाबंदी है, जबकि मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भी उज्जैन में शराब की बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध की घोषणा की हुई है। गुजरात पुलिस की जांच में यह पहले ही साफ हो गया था कि वह जहरीली शराब उज्जैन से ही वहां पहुंची थी। गौरतलब है कि मध्य प्रदेश और गुजरात दोनों ही भाजपा शासित राज्य हैं।
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