विदेशी धरती से भारतीय डीप-टेक प्रतिभाओं की घर वापसी स्पेस सेक्टर में नई उम्मीदें जगा रही है। इसी कड़ी में आईआईएमए (IIMA) वेंचर्स में इनक्यूबेट हुआ स्टार्टअप ‘कॉस्मोशूट’ (Cosmochute) एक मून सरफेस सिम्युलेटर तैयार कर रहा है। यह सिम्युलेटर जनवरी तक पूरी तरह काम करने लगेगा, जिसका मुख्य उद्देश्य स्टार्टअप के मॉड्यूलर लूनर रोवर के महत्वपूर्ण सबसिस्टम्स का परीक्षण करना है।
इस स्टार्टअप की नींव अमित चौधरी, जाह्नवी गोरे और ध्रुव संगल ने रखी है। स्कॉटलैंड की स्पेस लॉन्च कंपनी ‘ऑर्बेक्स’ (Orbex) में लगभग चार साल तक साथ काम करने के बाद यह टीम यूके से अहमदाबाद लौट आई। दुनिया भर में चांद को लेकर बढ़ती व्यावसायिक दिलचस्पी के बीच यह टीम खुद को उभरती ‘लूनर इकॉनमी’ (Lunar Economy) के लिए तैयार कर रही है। हाल ही में इस स्टार्टअप ने प्री-सीड राउंड में 1.5 मिलियन डॉलर की फंडिंग भी जुटाई है।
अक्टूबर में मनाए गए विश्व अंतरिक्ष सप्ताह के साथ ही यह महीना अहमदाबाद के अन्य स्पेसटेक स्टार्टअप्स के लिए भी कई बड़ी उपलब्धियां लेकर आया। एक तरफ जहां ‘ऑर्बिट स्पेस’ (Orbitt Space) ने अपने स्वदेशी प्रोपल्शन सिस्टम का सफल परीक्षण किया, वहीं ‘ओम स्पेस’ (Om Space) ने अपने महत्वकांक्षी रॉकेट प्रोजेक्ट के लिए नोज़ कोन और लैंडिंग सिस्टम तैयार कर लिया।
कॉस्मोशूट के सह-संस्थापक और सीओओ अमित चौधरी ने कहा कि अमेरिका, यूरोप, जापान, यूएई, तुर्की से लेकर भारत तक कई देशों ने चांद के लिए मिशन की योजना बनाई है। उनका स्टार्टअप इंटरऑपरेबल और दोबारा इस्तेमाल होने वाले मून रोवर बना रहा है, जिससे विभिन्न देशों के लिए चांद की सतह पर मोबिलिटी की लागत काफी कम हो जाएगी।
एयरोनॉटिकल इंजीनियरिंग और एवियोनिक्स जैसे क्षेत्रों के विशेषज्ञ ये तीनों संस्थापक फिलहाल आईआईएमए वेंचर्स से लूनर मोबिलिटी प्लेटफॉर्म का ग्राउंड इंफ्रास्ट्रक्चर बना रहे हैं। कॉस्मोशूट की सह-संस्थापक और सीईओ जाह्नवी गोरे ने बताया कि मून सिम्युलेटर का मकसद रेगोलिथ (चांद की मिट्टी) और कम गुरुत्वाकर्षण जैसी चंद्र स्थितियों को सटीकता से रीक्रिएट करना है। इसके लिए रोवर का वजन कम करके और एक विशेष रिग डिजाइन का इस्तेमाल किया जाएगा।
जाह्नवी ने बताया कि कैमरों पर सीधे पड़ने वाली धूप से नेविगेशन में होने वाली दिक्कतों को दूर करने के लिए सिम्युलेटर में एक ‘कृत्रिम सूर्य’ भी होगा, जिससे कंट्रोल एल्गोरिदम को ऑप्टिमाइज़ किया जाएगा। इस टीम को इसरो के चंद्रयान-1 मिशन के पूर्व कार्यक्रम निदेशक मायलस्वामी अन्नादुरई का मार्गदर्शन प्राप्त है।
अहमदाबाद के ही एक अन्य स्टार्टअप ऑर्बिट स्पेस के सह-संस्थापक और सीईओ क्रिस्टोफर परमार ने हाल ही में ‘ईएसटीआईसी 2026’ (ESTIC 2026) में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को वेरी लो-अर्थ ऑर्बिट (VLEO) सैटेलाइट्स के लिए स्वदेशी प्रोपल्शन सिस्टम की जानकारी दी। इसरो के पूर्व वैज्ञानिकों का यह स्टार्टअप पृथ्वी से 200 किमी ऊपर काम करने वाले सैटेलाइट्स के लिए एयर-ब्रीदिंग इलेक्ट्रिक प्रोपल्शन (ABEP) का उपयोग कर रहा है, जो वायुमंडल को ही ईंधन बनाता है।
क्रिस्टोफर के अनुसार, उन्होंने केवल 18 महीनों के भीतर अक्टूबर में 18 मिलीन्यूटन (mN) थ्रस्ट का माइलस्टोन हासिल कर लिया है, जिसके सभी उपकरण पूरी तरह भारत में इन-हाउस बने हैं। यह सफलता भविष्य के ऑर्बिटल डेमोंस्ट्रेशन का मार्ग प्रशस्त करती है।
उधर ओम स्पेस ने भी अपने दोबारा इस्तेमाल होने वाले रॉकेट ‘इन्फिनिटी वन’ (Infinity One) के लिए अहम नोज़ कोन और किक स्टेज का निर्माण पूरा कर लिया है। स्टार्टअप के संस्थापक और सीईओ रवींद्र राज ने कहा कि इस सफलता के बाद अब टीम इंटीग्रेशन, स्ट्रक्चरल और फंक्शनल टेस्टिंग तथा सबसिस्टम वैलिडेशन के अगले चरण में प्रवेश करेगी। इससे पहले इसी साल मार्च में ओम स्पेस ने धोलेरा से अपने साउंडिंग रॉकेट का सफलतापूर्वक परीक्षण किया था।
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