हम सभी के लिए किसी शॉपिंग मॉल में जाना या पेट्रोल पंप से गाड़ी में ईंधन भरवाना एक बहुत ही सामान्य और रोजमर्रा का काम है। लेकिन अमेरिका में अवैध रूप से रह रहे गुजरातियों के लिए अब ये छोटे-छोटे काम भी किसी बुरे सपने से कम नहीं हैं।
जिन लोगों के पास वैध इमिग्रेशन दस्तावेज नहीं हैं, उनके मन में अमेरिकी इमिग्रेशन और कस्टम एनफोर्समेंट (ICE) का खौफ इस कदर बैठ गया है कि उन्हें हर कदम पर पकड़े जाने का डर सता रहा है।
हिरासत में लिए जाने और सीधे डिपोर्ट (निर्वासित) कर दिए जाने की यह दहशत इतनी गहरी हो चुकी है कि कई शरणार्थी (asylum seekers) अब अपनी पहचान पूरी तरह छिपाकर रहने को मजबूर हैं।
ये लोग लगातार अपनी नौकरियां और फोन नंबर बदल रहे हैं। बात यहां तक पहुंच गई है कि वे इमिग्रेशन कोर्ट की सुनवाई में जाने से भी कतरा रहे हैं, जबकि उन्हें पता है कि सुनवाई में न जाने से उनके डिपोर्ट होने का खतरा सबसे ज्यादा होता है।
जैसे-जैसे ICE की सख्ती और कार्रवाई बढ़ रही है, ये अवैध प्रवासी किसी भी तरह के वित्तीय लेन-देन से बच रहे हैं। ऐसा इसलिए किया जा रहा है ताकि उनका कोई लिखित रिकॉर्ड (पेपर ट्रेल) न बन सके और एजेंसियां उन तक न पहुंच पाएं।
हालात इतने खराब हैं कि कुछ लोगों ने अपने वकीलों से भी किनारा कर लिया है। उनके मन में अब यह अविश्वास पैदा हो गया है कि हजारों डॉलर पानी की तरह बहाने के बाद भी वे कानूनी तौर पर अमेरिका में टिक पाएंगे या नहीं।
हाल ही में सार्वजनिक जगहों से गुजरातियों को हिरासत में लिए जाने और उन्हें तुरंत डिपोर्ट किए जाने की कुछ घटनाओं ने इस खौफ को और ज्यादा बढ़ा दिया है।
अगस्त के महीने में गांधीनगर जिले के कलोल तालुका स्थित करजीसन गांव के चार युवकों को टेनेसी के एक पेट्रोल पंप से ICE अधिकारियों ने धर दबोचा था। इन सभी युवकों को उसी दिन डिपोर्ट कर दिया गया।
गिरफ्तार किए गए सभी युवकों की उम्र 25 साल के आसपास थी। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ये युवक हाल ही में अक्टूबर 2024 में डंकी रूट के जरिए एक चार्टर्ड फ्लाइट से अमेरिका पहुंचे थे।
एक अन्य हैरान करने वाला मामला फ्लोरिडा से सामने आया है। यहां मेहसाणा जिले के भाटासन गांव की एक 34 वर्षीय महिला को एक शॉपिंग मॉल से हिरासत में ले लिया गया।
बाद में उस महिला को उसके चार साल के बेटे के साथ भारत डिपोर्ट कर दिया गया। उसका बेटा जन्म से अमेरिकी नागरिक है, लेकिन महिला के एक रिश्तेदार के अनुसार उसने बच्चे को अपने साथ ले जाना इसलिए चुना क्योंकि वह पूरी तरह से अपनी मां पर निर्भर था।
राजनीतिक कारणों से अपने देश में उत्पीड़न का दावा करके अमेरिका में शरण मांगने वाले एक अन्य गुजराती शख्स के मन में गिरफ्तारी का डर इस कदर हावी हो चुका है कि वह इमिग्रेशन कोर्ट की अपनी अगली सुनवाई में न जाने का मन बना रहा है।
उसे अच्छी तरह पता है कि कोर्ट न जाने पर सीधे डिपोर्टेशन का आदेश जारी हो सकता है, लेकिन मामले से जुड़े सूत्रों का कहना है कि वह किसी भी कीमत पर कोर्ट जाने को तैयार नहीं है।
इस व्यक्ति ने अपना फोन नंबर बदल लिया है। साथ ही उसने चेक के जरिए सैलरी लेना और टैक्स चुकाना भी पूरी तरह बंद कर दिया है। सूत्रों के मुताबिक, अब उसकी इकलौती प्राथमिकता अमेरिका में छिपकर रहते हुए ज्यादा से ज्यादा पैसे कमाना रह गई है।
शिकागो में रह रहे एक अन्य गुजराती के लिए इस अनिश्चितता की कीमत बहुत भारी पड़ी है। इस शख्स ने अपने परिवार के शरण आवेदन की कानूनी प्रक्रिया के लिए न्यूयॉर्क के एक इमिग्रेशन वकील को करीब 50,000 डॉलर (लगभग 47 लाख रुपये) का भारी-भरकम भुगतान किया था।
इतनी बड़ी रकम देने के बावजूद, उसने अपनी पत्नी और बेटी को ICE की तयशुदा अपॉइंटमेंट में नहीं भेजा। शख्स का आरोप है कि वकील ने यात्रा, ठहरने और अन्य खर्चों के नाम पर 8,000 डॉलर (लगभग 7.6 लाख रुपये) की अतिरिक्त मांग कर दी थी, जिसके बाद उसने अपॉइंटमेंट में जाने का इरादा ही छोड़ दिया।
इमिग्रेशन वकीलों का कहना है कि प्रशासन के सख्त रवैये ने उन प्रवासियों की चिंताएं कई गुना बढ़ा दी हैं, जिनके शरण के दावे कमजोर हैं या जिनकी कानूनी स्थिति साफ नहीं है।
वकीलों के अनुसार, जो लोग पहले सामान्य रूप से नौकरी करते थे और टैक्स भरते थे, वे अब बैंकिंग ट्रांजेक्शन से बच रहे हैं। ये प्रवासी अब अपने वर्क परमिट को रिन्यू कराने जैसे जरूरी कामों को लेकर भी भारी दुविधा में हैं।
इमिग्रेशन एजेंसियों के इस खौफ ने अब लोगों के अमेरिका में रुकने या न रुकने के फैसलों को भी प्रभावित करना शुरू कर दिया है।
मेहसाणा के रहने वाले एक 45 वर्षीय व्यक्ति ने 2022 में अपने परिवार के साथ अमेरिका में प्रवेश किया था। इस व्यक्ति का कहना है कि डोनाल्ड ट्रम्प की सत्ता में वापसी से पहले ही वह और उसकी पत्नी सख्त इमिग्रेशन नीतियों के डर से अमेरिका छोड़ आए।
हालांकि, उनका 19 साल का बेटा अभी भी अमेरिका में ही छिपा हुआ है। रिपोर्ट्स के अनुसार, वह भी हिरासत में लिए जाने के डर से कोर्ट की किसी भी सुनवाई में जाने से बच रहा है।
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