प्राचीन ज्ञान केवल इसलिए मूल्यवान नहीं हो जाता क्योंकि वह पुराना है, बल्कि इसकी महत्ता तब साबित होती है जब यह समकालीन समस्याओं को सुलझाने में प्रासंगिक बने। सोमवार, 02 नवंबर 2026 को वाराणसी में आयोजित “आधुनिक चुनौतियों के लिए प्राचीन ज्ञान” विश्व संगोष्ठी के उद्घाटन सत्र में अडाणी फाउंडेशन की चेयरपर्सन डॉ. प्रीति अडाणी ने यह प्रभावशाली बात कही। उन्होंने मानवीय पीड़ा, असमानता और संघर्ष को दूर करने के लिए भारत के सभ्यतागत ज्ञान को सहेजने और उसे आधुनिक समय में लागू करने का मजबूत आह्वान किया।

डॉ. अडाणी ने अरस्तू, भगवान बुद्ध और कन्फ्यूशियस के दर्शन को भारत की ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ की भावना से जोड़ते हुए कहा कि ज्ञान हमें दुनिया बदलने की ताकत देता है, जबकि बुद्धिमत्ता यह सुनिश्चित करती है कि हम इसे बेहतरी के लिए बदलें। उन्होंने आधुनिक समय में योग और मोटे अनाज (मिलेट्स) की वैश्विक स्वीकार्यता को प्राचीन भारतीय ज्ञान की प्रासंगिकता का बेहतरीन उदाहरण बताया।
विकास को लोगों पर पड़ने वाले प्रभाव से मापने पर जोर देते हुए उन्होंने अडाणी फाउंडेशन के जमीनी कार्यों का उल्लेख किया। वर्ष 1996 में स्थापित यह फाउंडेशन वर्तमान में 22 राज्यों के 7,000 गांवों में काम करते हुए 13 मिलियन लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रहा है। उन्होंने बताया कि गौतम अडाणी के 60वें जन्मदिन पर उनके परिवार ने ‘सेवा ही साधना है’ के मंत्र को अपनाते हुए कल्याणकारी कार्यों के लिए छह अरब डॉलर देने का संकल्प लिया था।
इसके अलावा, भारत के सभ्यतागत ज्ञान को सुलभ बनाने के लिए अडाणी ग्रुप ने ‘भारत नॉलेज ग्राफ’ के लिए 10 मिलियन डॉलर की प्रतिबद्धता जताई है, जिससे 14 डॉक्टरेट शोधार्थियों को भी मदद मिल रही है।
आर्थिक और ढांचागत विकास के मोर्चे पर, संयुक्त राष्ट्र सतत विकास समाधान नेटवर्क के अध्यक्ष प्रोफेसर जेफ्री डी. सैक्स ने भारत के बुनियादी ढांचे के विस्तार में अडाणी ग्रुप के बड़े योगदान की सराहना की। उन्होंने बताया कि वैश्विक उत्पादन में भारत की हिस्सेदारी 2000 के 5.2% से बढ़कर 2026 में 8.5% हो गई है, जिसके 2100 तक 15.1% तक पहुंचने का मजबूत अनुमान है। इसके साथ ही, डॉ. अडाणी ने देश को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने के विजन के तहत ऊर्जा परिवर्तन और इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए 100 अरब डॉलर के निवेश और गुजरात के खावड़ा में बनाए गए दुनिया के सबसे बड़े रिन्यूएबल एनर्जी पार्क का भी जिक्र किया।
इस अहम कार्यक्रम में भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के सचिव श्री विवेक अग्रवाल ने प्राचीन ग्रंथों को समझने और उन्हें भविष्य के लिए सुलभ बनाने में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की भूमिका पर भी प्रकाश डाला। वहीं, कोलंबिया यूनिवर्सिटी के वरिष्ठ शोधकर्ता डॉ. निरुपम बाजपेयी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की शुभकामनाएं प्रेषित करते हुए वाराणसी की ऐतिहासिक और आध्यात्मिक महत्ता को रेखांकित किया।
अंत में डॉ. अडाणी ने ‘धर्म’ को आधुनिक उद्यम के लिए प्रासंगिक बताते हुए कहा कि सच्ची विरासत केवल धन नहीं, बल्कि करुणा, सहानुभूति और सेवा के मूल्य हैं, जिन्हें पवित्र गंगा की तरह निरंतर बहते रहना चाहिए।
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