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महाराष्ट्र: ग्रामीणों के फिल्मी चेज ने नाकाम की 36 करोड़ की बैंक डकैती, बर्खास्त पुलिस अफसर समेत 4 गिरफ्तार

| Updated: November 2, 2026 12:20

जलगांव में हथियारों के बल पर हुई 36 करोड़ की लूट को ग्रामीणों ने अपनी जान पर खेलकर नाकाम किया, चंद घंटों में 27 किलो सोना और कैश के साथ 4 खूंखार डकैत गिरफ्तार।

महाराष्ट्र के जलगांव जिले के भोकर गांव में शनिवार को एक दुस्साहसिक बैंक डकैती देखने को मिली। हालांकि, बैंक कर्मचारियों, ग्रामीणों और पुलिस की सतर्कता ने इस लूट को पूरी तरह नाकाम कर दिया। नकाबपोश डकैतों ने बैंक में घुसकर कर्मचारियों पर हमला किया और करोड़ों रुपये का सोना व नकदी लूट ली।

लेकिन इसके बाद जो हुआ, वह किसी एक्शन फिल्म से कम नहीं था। ग्रामीणों ने अपनी जान की परवाह किए बिना बदमाशों का पीछा किया और चंद घंटों के भीतर चारों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया, जिसके बाद लूटा गया पूरा माल भी सुरक्षित बरामद हो गया।

इस गिरोह ने आग्नेयास्त्रों के बल पर बैंक पर धावा बोला था। बदमाशों ने कर्मचारियों के साथ मारपीट की, फायरिंग की और 12.3 लाख रुपये की नकदी के साथ 36.4 करोड़ रुपये कीमत का 27 किलो गिरवी रखा सोना लूटकर भागने लगे। जलगांव तालुका पुलिस के इंस्पेक्टर शशिकांत पाटिल ने बताया कि पकड़े गए आरोपियों में एक बर्खास्त पुलिस सब-इंस्पेक्टर शंकर जसक भी शामिल है। जसक पहले रायगढ़ जिला पुलिस में तैनात था और हाल ही में एक अन्य बैंक डकैती के मामले में जमानत पर बाहर आया था। गिरफ्तार किए गए चारों आरोपी आदतन अपराधी हैं।

यह खौफनाक घटना दोपहर 2:45 से 3:15 बजे के बीच करीब पांच हजार की आबादी वाले भोकर गांव में हुई। बैंक मैनेजर के अनुसार, शाखा में आम कामकाज चल रहा था, तभी हेलमेट और रूमाल से मुंह छिपाए चार लोग अंदर घुसे। उस वक्त कोई ग्राहक वहां मौजूद नहीं था। कुछ ही सेकंड में एक बदमाश ने बंदूक निकालकर सुरक्षा गार्ड और क्लर्क को धमकाया। इसी बीच कैशियर ने चुपके से अलार्म बजा दिया, जिससे डकैत भड़क गए। उन्होंने कैशियर पर लकड़ी के डंडे से हमला कर दिया और अलार्म बंद करने का दबाव बनाया।

बदमाशों ने चार कर्मचारियों को टेप से बांधकर फर्श पर बिठा दिया। जब कर्मचारियों ने विरोध किया तो डकैतों ने मारपीट और तेज कर दी। यहां तक कि सुरक्षा गार्ड पर गोली भी चलाई गई, लेकिन गनीमत रही कि निशाना चूक गया। इसके बाद डकैतों ने मैनेजर और कैशियर को स्ट्रॉन्ग रूम की ओर धकेला। वहां से उन्होंने तिजोरी का सारा कैश और गिरवी रखे आभूषणों से भरे कई बैग लूट लिए। भागने से पहले उन्होंने कर्मचारियों को वॉशरूम के पास ले जाकर उनके हाथ बांधे, मुंह पर टेप लगाया और उन्हें अंदर लॉक कर दिया।

हालांकि, डकैतों के सुरक्षित भाग निकलने की यह योजना जल्द ही धरी की धरी रह गई। दो कर्मचारी किसी तरह खुद को छुड़ाकर बैंक से बाहर निकले और उन्होंने अलग-अलग मोटरसाइकिलों पर भाग रहे डकैतों को देख लिया। उन्होंने तुरंत ग्रामीणों को इसकी सूचना दी और खुद भी उनके पीछे दौड़ पड़े। इसके बाद पूरे गांव ने जो एकजुटता दिखाई, वह मिसाल बन गई। मिनटों में यह खबर पूरे इलाके में फैल गई और ग्रामीण अपनी बाइकों पर सवार होकर ग्रामीण रास्तों पर डकैतों का पीछा करने लगे।

स्थानीय गांव के पुलिस पाटिल के ससुर संभाजी पवार ने बताया कि उनके भतीजे ने उन्हें बैंक के अंदर कुछ गड़बड़ होने की सूचना दी थी। उन्होंने तुरंत 30 किमी दूर स्थित पुलिस स्टेशन को खबर की, लेकिन तब तक ग्रामीण लुटेरों का पीछा करना शुरू कर चुके थे। इंस्पेक्टर पाटिल के अनुसार, भोकर चार प्रमुख सड़कों से जुड़ा है। पुलिस ने तुरंत इलाके में निगरानी तेज कर दी और पुलिस पाटिल की मदद से भागने के संभावित रास्तों को सील कर दिया। आस-पास के गांवों के लोगों को भी संदिग्ध वाहनों पर नजर रखने के लिए अलर्ट कर दिया गया।

गांव की कच्ची और संकरी सड़कों पर करीब 17 किलोमीटर तक यह रोमांचक पीछा चलता रहा। पहली बड़ी कामयाबी दीक्साई गांव में मिली, जहां ग्रामीणों ने दो आरोपियों को उस वक्त धर दबोचा जब पुलिस की टीम भी मौके पर पहुंच गई थी। इन दोनों की पहचान मध्य प्रदेश के बुरहानपुर निवासी अंकुश तुलसीराम पवार उर्फ चव्हाण (25) और जलगांव के अंकुश श्रवण चव्हाण (30) के रूप में हुई। घटना स्थल पर ही इनसे हुई पूछताछ के बाद बाकी दोनों डकैतों के भागने की दिशा का अहम सुराग मिल गया।

इस सटीक जानकारी पर तेजी से कार्रवाई करते हुए धरणगांव के इंस्पेक्टर रमाकांत गायकवाड़ ने सड़क पर नाकाबंदी कर दी। इसके परिणामस्वरूप नासिक के गजानन पवार (32) और पूर्व पुलिसकर्मी शंकर जसक को भी गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस ने 27 किलो सोना और पूरी नकदी सहित लूटा गया सारा माल बरामद कर लिया है।

गिरफ्तार आरोपियों का लंबा आपराधिक इतिहास है, जिसमें गजानन पर हत्या का मामला और अंकुश तुलसीराम पर मुक्ताईनगर व जामनेर में लूट के कई केस दर्ज हैं। इस सफल ऑपरेशन के बाद पुलिस अधीक्षक श्रीकांत धिवरे ने उन साहसी ग्रामीणों को सम्मानित किया, जिनकी मुस्तैदी से यह बड़ी वारदात चंद घंटों में सुलझ गई।

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