साइबर सुरक्षा के लिहाज से ‘ब्लैक अक्टूबर’ ने एक और बड़े शिकार को अपनी चपेट में ले लिया है। इस बार दुनिया के सबसे बड़े क्रिप्टो एक्सचेंज ‘बाइनेंस’ को निशाना बनाया गया है। सुरक्षा में हुई इस भारी सेंधमारी की जांच के दौरान कंपनी ने अपने प्लेटफॉर्म पर सभी तरह के डिपॉजिट और विड्रॉल पर अस्थाई रोक लगा दी थी।
ताजा अपडेट के मुताबिक बाइनेंस ने डिपॉजिट सेवा फिर से शुरू कर दी है। एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर दी गई जानकारी में कंपनी ने बताया कि डिपॉजिट सामान्य रूप से काम कर रहे हैं और प्रभावित नहीं हुए हैं। हालांकि, ग्राहकों की निकासी (विड्रॉल) पर अभी रोक जारी है। कंपनी को उम्मीद है कि अगले 48 घंटों के भीतर निकासी सेवाएं भी बहाल कर दी जाएंगी। एक्सचेंज फिलहाल एक कर्मचारी के हैक हुए लैपटॉप के जरिए हमले की पूरी कड़ियों को जोड़ने में जुटा है।
शुरुआती जांच में बाइनेंस ने अंदेशा जताया है कि इस हैकिंग के कारण 6.3 अरब डॉलर की संपत्तियों पर असर पड़ सकता है। कंपनी ने ग्राहकों को आश्वस्त किया है कि इस घटना से होने वाले हर नुकसान की भरपाई वह खुद करेगी। यह साइबर सेंधमारी इतिहास की सबसे बड़ी क्रिप्टो हैकिंग मानी जा रही है। इससे पहले साल 2025 में बायबिट (Bybit) से 1.5 अरब डॉलर की चोरी हुई थी, जो अब तक का सबसे बड़ा सार्वजनिक रिकॉर्ड था।
इस हमले को अंजाम देने के लिए हैकर्स ने बाइनेंस के सर्वर में सेंध लगाकर अनधिकृत लेनदेन किए हैं। फिलहाल कंपनी अपने ब्लॉकचेन पार्टनर्स के साथ मिलकर लगभग 3 अरब डॉलर की प्रभावित संपत्ति को ऑन-चेन फ्रीज करने में कामयाब रही है। बाइनेंस के पूर्व सीईओ चांगपेंग झाओ, जिन्हें ‘सीजेड’ के नाम से भी जाना जाता है, ने एक्स पर लिखा कि यह पूरी तरह से एक हैक जैसा लग रहा है। हालांकि, इससे पहले उन्होंने ग्राहकों से कहा था कि उनका पैसा सुरक्षित है। झाओ ने 2017 में बाइनेंस की स्थापना की थी, लेकिन अमेरिकी अधिकारियों के साथ हुए एक समझौते के तहत 2023 में उन्होंने प्रबंधन छोड़ दिया था। वह अब भी कंपनी के प्रमुख शेयरधारक हैं।
इस घटना से प्रभावित होने वाले यूजर्स की सटीक संख्या अभी साफ नहीं है। राहत की बात यह है कि बाइनेंस की अमेरिकी शाखा (बाइनेंस यूएस) का परिचालन इससे सुरक्षित है। वैश्विक स्तर पर 100 से ज्यादा देशों में बाइनेंस के 30 करोड़ से अधिक रजिस्टर्ड यूजर्स हैं। कंपनी से विस्तृत जानकारी मिलने के बाद ही प्रभावित उपयोगकर्ताओं की वास्तविक संख्या का पता चल सकेगा। भारत में इसके कितने उपभोक्ता प्रभावित हुए हैं, इसके आधिकारिक आंकड़े भी अभी सामने नहीं आए हैं।
बाइनेंस ने खुलासा किया है कि यह साइबर हमला संभवतः उनके एक डेवऑप्स (DevOps) इंजीनियर के लैपटॉप के कॉम्प्रोमाइज होने से जुड़ा है। इसी के जरिए हैकर्स ने सर्विस कंटेनर तक पहुंच बनाई और अनधिकृत विड्रॉल को अंजाम दिया। कंपनी का कड़ाई से कहना है कि किसी भी यूजर के क्रिप्टो वॉलेट की प्राइवेट की (key) लीक होने के कोई सबूत नहीं मिले हैं। जांच पूरी होने के बाद बाइनेंस पूरी जानकारी के साथ एक विस्तृत तकनीकी पोस्ट-मॉर्टम रिपोर्ट साझा करेगा।
हालात को काबू में करने के लिए एक्सचेंज ने कानूनी एजेंसियों और ब्लॉकचेन इंटेलिजेंस पार्टनर्स से मदद ली है ताकि फंड को ट्रेस करके वापस लाया जा सके। ग्राहकों के नुकसान की भरपाई के लिए कंपनी अपने ‘सिक्योर एसेट फंड फॉर यूजर्स’ (SAFU) और कॉर्पोरेट फंड का इस्तेमाल करेगी। यह इमरजेंसी रिजर्व फंड 2018 में ऐसे ही संकटों से निपटने के लिए बनाया गया था और इसमें आमतौर पर एक अरब डॉलर की राशि सुरक्षित रखी जाती है। सुधार कार्य पूरा होने पर बाइनेंस अपना नया ‘प्रूफ ऑफ रिजर्व’ भी प्रकाशित करेगा।
इस हैकिंग ने पूरी क्रिप्टोकरेंसी इंडस्ट्री में हड़कंप मचा दिया है। टीथर (Tether) के सीईओ पाओलो अर्दोइनो ने बताया कि उन्होंने इस संभावित हैक से जुड़ी अपनी 1.55 अरब से 1.6 अरब डॉलर की क्रिप्टोकरेंसी फ्रीज कर दी है। उन्होंने कहा कि उद्योग और साझेदारों की सुरक्षा उनकी सबसे बड़ी प्राथमिकता है। इसी तरह, सर्कल (Circle) के सीईओ जेरेमी अलेयर ने भी इस घटनाक्रम पर करीबी नजर रखते हुए 80 करोड़ डॉलर से ज्यादा की संपत्ति को फ्रीज करने की पुष्टि की है।
इस घटना के बाद क्रिप्टो मार्केट में भारी गिरावट दर्ज की गई। बिटकॉइन 3.2 से 5 प्रतिशत तक टूटकर 77,000 डॉलर के स्तर से नीचे आ गया। एथेरियम (Ethereum) और सोलाना (Solana) जैसी लोकप्रिय क्रिप्टोकरेंसी की कीमतों में भी बड़ी गिरावट देखी गई। इसी दिन, एक थर्ड-पार्टी प्रोवाइडर की सुरक्षा में सेंध लगने के बाद पॉलीमार्केट (Polymarket) ने भी अपनी ट्रेडिंग अस्थाई रूप से रोक दी। प्लेटफॉर्म ने वादा किया है कि प्रभावित लोगों के नुकसान की पूरी भरपाई की जाएगी।
अक्टूबर का यह महीना साइबर सुरक्षा के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है। इस हफ्ते की शुरुआत में क्रिप्टो प्लेटफॉर्म कॉइनबेस (Coinbase) ने भी स्वीकार किया था कि एक थर्ड-पार्टी वेंडर के जरिए कुछ ग्राहकों का डेटा लीक हुआ है, हालांकि वहां कोई फंड चोरी नहीं हुआ।
इससे पहले ई-मुद्रा (eMudhra) के डिजिटल सर्टिफिकेट और पीएचपी (PHP) की कमजोरियां भी उजागर हुई थीं। इसके अलावा भारतीय स्टेट बैंक (SBI) में भी सुरक्षा में चूक का मामला सामने आया था, जिसमें करीब 3,900 ग्राहकों का रिकॉर्ड एक्सपोज हो गया था।
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