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छात्रों के आगे झुका सर्बिया का सबसे कद्दावर नेता: अलेक्जेंडर वुसिक की 10 साल की सत्ता का ऐतिहासिक अंत

| Updated: October 26, 2026 13:48

सर्बिया में बड़ा सियासी उलटफेर: 10 साल तक सत्ता पर राज करने वाले अलेक्जेंडर वुसिक को 'स्टूडेंट लिस्ट' ने दी करारी मात, जानिए कैसे एक हादसे ने पलट दी देश की राजनीति।

सर्बिया की राजनीति पर एक दशक से अधिक समय तक राज करने वाले अलेक्जेंडर वुसिक को एक बड़े सियासी फेरबदल का सामना करना पड़ा है। लगभग दो वर्षों तक चले भारी विरोध प्रदर्शनों के बाद, वुसिक को संसदीय चुनावों में छात्र-नेतृत्व वाले आंदोलन के हाथों करारी शिकस्त मिली है।

रविवार को हुए मतदान में देश ने पिछले 30 वर्षों में सबसे अधिक वोटिंग प्रतिशत देखा। इस कड़े मुकाबले के बाद, अलेक्जेंडर वुसिक ने ‘स्टूडेंट लिस्ट’ के सामने अपनी हार स्वीकार कर ली है।

सर्बियन प्रोग्रेसिव पार्टी (SNS) के नेता ने चुनाव नतीजों के रुझान आने के बाद अपने समर्थकों से स्पष्ट रूप से कहा कि वे यह चुनाव हार चुके हैं। आंकड़ों के अनुसार, सर्बिया की 250 सीटों वाली संसद में वुसिक की पार्टी को 105 सीटें मिलने का अनुमान है, जबकि स्टूडेंट लिस्ट ने 135 से 140 सीटों पर शानदार बढ़त बनाई है।

इस शक्तिशाली छात्र आंदोलन की नींव 1 नवंबर 2024 को पड़ी थी। उस दिन नोवी साद शहर में रेलवे स्टेशन की छतरी गिरने से 16 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई थी, जिसके बाद पूरे देश में आक्रोश फैल गया।

युवाओं के नेतृत्व में शुरू हुआ यह विरोध जल्द ही एक बड़े सामाजिक आंदोलन में बदल गया। इसने राजनीतिक रूप लेते हुए खुद को ‘स्टूडेंट लिस्ट’ के तौर पर स्थापित किया। इस मंच ने देश से भ्रष्टाचार खत्म करने, सरकारी संस्थाओं को राजनीति से मुक्त करने और नागरिकों के अधिकारों की बहाली का वादा किया।

इस पूरे चुनावी अभियान के दौरान, आंदोलन का कुशल नेतृत्व नोवी साद में मेडिसिन फैकल्टी के प्रोफेसर इलिजा सर्डानोविक ने किया।

वहीं, वुसिक ने इन प्रदर्शनकारियों को लगातार निशाना बनाया। उन्होंने विश्वविद्यालय के प्रोफेसरों, डॉक्टरों और कर्मचारियों सहित सभी आंदोलनकारियों को ‘अवरोधक’ करार दिया और उन पर सर्बिया को अस्थिर करने का गंभीर आरोप लगाया।

एक पूर्व कट्टरपंथी नेता के रूप में शुरुआत करने वाले वुसिक ने खुद को एक व्यावहारिक राजनेता के तौर पर स्थापित किया था। उन्होंने अपने कार्यकाल में यूरोपीय संघ, रूस, चीन और हाल के वर्षों में इजरायल के साथ भी कूटनीतिक संबंध मजबूत किए।

साल 1970 में बेलग्रेड में जन्मे लगभग दो मीटर (6.5 फीट) लंबे वुसिक ने यूनिवर्सिटी ऑफ बेलग्रेड की लॉ फैकल्टी से पढ़ाई की है। उन्होंने 1993 में वोजिस्लाव सेसेलज के नेतृत्व वाली सर्बियन रेडिकल पार्टी में शामिल होकर अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत की थी।

नब्बे के दशक में उनकी राजनीति पूरी तरह से कट्टरपंथी बयानबाजी पर आधारित थी। जुलाई 1995 में, स्रेब्रेनिका नरसंहार के ठीक नौ दिन बाद उन्होंने संसद में एक बेहद विवादास्पद बयान दिया था। बोस्निया और हर्जेगोविना में रिपब्लिका श्रीप्सका की सेना पर संभावित नाटो हमलों की बहस के दौरान उन्होंने कहा था कि एक सर्ब को मारो, और हम 100 मुसलमानों को मार डालेंगे।

उस दौर में वुसिक के राजनीतिक गुरु रहे सेसेलज को 2018 में अंतरराष्ट्रीय ट्रिब्यूनल ने 10 साल जेल की सजा सुनाई थी। उन्हें 1990 के दशक में बाल्कन युद्धों के दौरान गैर-सर्बों के उत्पीड़न और उनके जबरन स्थानांतरण का दोषी पाया गया था।

दिलचस्प बात यह है कि रविवार के चुनावों में वोजिस्लाव सेसेलज के बेटे अलेक्जेंडर सेसेलज भी वुसिक की चुनावी सूची में शामिल थे।

सर्बियन रेडिकल पार्टी में विभाजन के बाद, साल 2008 में वुसिक और टोमिस्लाव निकोलिक ने मिलकर सर्बियन प्रोग्रेसिव पार्टी (SNS) की स्थापना की। इस नई पार्टी का मुख्य उद्देश्य यूरोपीय मुख्यधारा की राजनीति के करीब जाना था।

लंबे समय से वुसिक के राजनीतिक करियर को कवर करने वाली वरिष्ठ पत्रकार सफेता बिसेवैक के अनुसार, शुरुआती दिनों में वुसिक अपने साथी निकोलिक की तुलना में कम लोकप्रिय थे। बिसेवैक बताती हैं कि वुसिक लोकप्रियता में पीछे थे और मुख्य रूप से नवगठित पार्टी के एक आयोजक की भूमिका निभा रहे थे, जबकि निकोलिक आम नागरिकों के ज्यादा करीब माने जाते थे।

साल 2012 में, SNS ने पिछली सरकारों के दौरान हुए भ्रष्टाचार और संगठित अपराधों को खत्म करने का वादा करके सत्ता हासिल की।

इनका एक प्रमुख कदम दिसंबर 2012 में व्यवसायी मिरोस्लाव मिस्कोविक और उनके बेटे मार्को की गिरफ्तारी था। उन पर वित्तीय अनियमितताओं और कर चोरी का संदेह था। हालांकि, वर्षों की कानूनी प्रक्रिया के बाद दोनों को बरी कर दिया गया और सरकार को उन्हें भारी मुआवजा तक देना पड़ा।

पत्रकार बिसेवैक का मानना है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई के परिणाम बेहद मामूली रहे। इसके विपरीत सरकार ने देश की संस्थाओं, मीडिया और राजनीतिक व्यवस्था पर अपना पूर्ण नियंत्रण स्थापित कर लिया।

वुसिक ने 2012 से 2014 तक देश के प्रथम उप-प्रधानमंत्री के रूप में कार्य किया। साल 2014 में वह प्रधानमंत्री बने और तीन साल बाद 2017 में सर्बिया के राष्ट्रपति पद पर काबिज हो गए। उन्होंने 2022 में फिर से चुनाव जीता और उनका यह कार्यकाल 2027 तक चलने वाला था।

लेकिन छात्र आंदोलन के भारी दबाव के कारण, उन्हें सितंबर में इस्तीफा देना पड़ा और समय से पहले चुनाव बुलाने पड़े। संवैधानिक सीमाओं के बावजूद, वुसिक का अपनी पार्टी और देश की नीतियों पर हमेशा दबदबा कायम रहा।

बिसेवैक के अनुसार, वुसिक ने बहुत सारे वादे किए लेकिन उनमें से कुछ ही पूरे किए, हालांकि इस पूरी प्रक्रिया में उन्होंने राज्य तंत्र पर अपना पूरा नियंत्रण जरूर स्थापित कर लिया।

अगर अर्थव्यवस्था की बात करें, तो 2012 में वुसिक के सत्ता में आने के बाद से सर्बिया की आर्थिक स्थिति का विस्तार हुआ है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, बेरोजगारी दर 26 प्रतिशत से गिरकर 8 से 9 प्रतिशत रह गई। वहीं, नॉमिनल सकल घरेलू उत्पाद (GDP) लगभग तिगुना होकर 90 अरब यूरो (101 अरब डॉलर) तक पहुंच गया।

प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) 2012 के लगभग 800 मिलियन यूरो (896 मिलियन डॉलर) से बढ़कर 2024 में 5.2 बिलियन यूरो (5.8 बिलियन डॉलर) के रिकॉर्ड स्तर पर आ गया। देश भर में आधुनिक मोटरमार्गों का एक बड़ा नेटवर्क भी बिछाया गया।

हालांकि, बढ़ती मजदूरी के बावजूद जीवन स्तर में समानुपातिक सुधार नहीं देखा गया। बढ़ती महंगाई और बढ़ता सार्वजनिक कर्ज सरकार के आर्थिक दावों पर सवाल खड़े करते रहे हैं।

राजनीतिक वैज्ञानिक डुस्को राडोसावलजेविक का कहना है कि छात्रों ने असल में आम नागरिकों के जायज गुस्से को एक मजबूत आवाज दी है।

वुसिक की नीतियों का विश्लेषण करते हुए राडोसावलजेविक स्पष्ट करते हैं कि पिछले एक दशक को सामाजिक संस्थाओं पर व्यवस्थित दबाव और उनके विनाश के लिए जाना जाएगा। उनके अनुसार, खुफिया एजेंसियों ने अपने मूल काम पर कम ध्यान दिया और राजनीतिक विरोधियों की निगरानी ज्यादा की, जबकि सार्वजनिक मीडिया से आलोचनात्मक सोच को पूरी तरह से बाहर कर दिया गया।

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