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ब्रिटेन में सुरक्षित नहीं हैं हिंदू? हेट क्राइम के मामलों में 15% की भारी वृद्धि, सरकारी अनदेखी पर उठे सवाल

| Updated: October 14, 2026 16:22

यूके होम ऑफिस के आंकड़ों से बड़ा खुलासा: ब्रिटेन में हिंदुओं के खिलाफ हिंसक हमलों में 15% का इजाफा, मंदिरों की सुरक्षा पर सरकारी अनदेखी से ब्रिटिश हिंदू समुदाय में भारी आक्रोश।

ब्रिटेन में धार्मिक नफरत और भेदभाव के मामलों में लगातार चिंताजनक वृद्धि देखी जा रही है। यूके होम ऑफिस (गृह मंत्रालय) के ताजा आंकड़ों के अनुसार, देश में हिंदुओं को निशाना बनाकर किए जाने वाले हेट क्राइम (नफरत भरे अपराधों) में 15 प्रतिशत का इजाफा हुआ है।

आंकड़े बताते हैं कि मार्च 2025 से लेकर इस साल मार्च के बीच इंग्लैंड और वेल्स की पुलिस ने कुल 1,46,825 हेट क्राइम के मामले दर्ज किए हैं। इस समयावधि में धार्मिक आधार पर होने वाले अपराधों में कुल 13 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

सिर्फ हिंदू ही नहीं, बल्कि अन्य समुदायों के खिलाफ भी ऐसे मामले बढ़े हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, ईसाइयों के खिलाफ नफरत के मामलों में 24 फीसदी, मुसलमानों के खिलाफ 15 फीसदी, यहूदियों के खिलाफ 10 फीसदी और सिखों को निशाना बनाने वाले अपराधों में 3 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।

मुसलमानों और यहूदियों के खिलाफ हुए अधिकांश अपराधों में सार्वजनिक तौर पर डराने, खौफ पैदा करने या परेशान करने के मामले अधिक देखे गए। हालांकि, हिंदुओं के मामलों में स्थिति इससे भी अधिक गंभीर और हिंसक नजर आती है।

हिंदू काउंसिल यूके के प्रबंध निदेशक अनिल भनोट ने इस स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उनका कहना है कि ब्रिटेन में हिंदुओं को गंभीर शारीरिक हमलों का सामना करना पड़ रहा है और सरकारी आंकड़े असल जमीनी हकीकत को बयां नहीं करते।

भनोट ने बताया कि कई हिंदू आज भी चुपचाप इस नफरत को सहने के लिए मजबूर हैं, खासकर तब जब उन पर कोई सीधा शारीरिक हमला न हुआ हो। पीड़ित इस डर और निराशा में शिकायत दर्ज नहीं कराते क्योंकि उन्हें लगता है कि अधिकारी उनकी शिकायतों पर कोई ठोस कदम नहीं उठाएंगे।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सुरक्षा के लिए सरकारी फंड उपलब्ध होने के बावजूद, ऐतिहासिक रूप से हिंदू मंदिरों को सुरक्षा के लिए कोई सहायता नहीं दी गई है।

ब्रिटिश हिंदुओं की आवाज उठाने वाले पैरोकार समूह ‘इनसाइट यूके’ के एक प्रवक्ता ने भी प्रशासन के इस दोहरे रवैये पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि यहूदी पूजास्थलों (सिनेगॉग) और मस्जिदों के लिए विशेष सुरक्षा योजनाएं मौजूद हैं, जबकि हिंदू मंदिरों के पास ऐसा कोई सुरक्षा कवच नहीं है। मंदिरों को अपनी सुरक्षा के लिए सामान्य फंड के एक छोटे से हिस्से के लिए दूसरों से संघर्ष करना पड़ता है।

प्रवक्ता ने होम ऑफिस की रिपोर्ट पर भी गहरी निराशा जताई। उन्होंने बताया कि आंकड़ों के साथ दी गई गृह मंत्रालय की लिखित टिप्पणी में केवल यहूदियों और मुसलमानों का जिक्र किया गया, जबकि ब्रिटेन के तीसरे सबसे बड़े धार्मिक समूह, हिंदुओं को पूरी तरह से नजरअंदाज कर दिया गया। उनका कहना है कि 15 प्रतिशत की इस वृद्धि को केवल आंकड़ों की एक तालिका तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए, बल्कि इस पर गंभीरता से बात होनी चाहिए।

इनसाइट यूके आगामी नवंबर महीने में अपनी एक ‘एंटी-हिंदू हेट’ (हिंदू विरोधी नफरत) सर्वे रिपोर्ट प्रकाशित करने जा रहा है। इस सर्वे में 2,688 लोगों ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। चौंकाने वाली बात यह है कि इस सर्वे के हर एक व्यक्ति ने हिंदू विरोधी नफरत को देखा या झेला है। यह नफरत शारीरिक हिंसा, ऑनलाइन उत्पीड़न, मंदिरों में तोड़फोड़ और मीडिया तथा शिक्षा क्षेत्र में हिंदू धर्म की गलत प्रस्तुति के रूप में सामने आई है।

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