comScore दिल्ली में मतदाता सूची को अपडेट करने के अभियान में आई तेज़ी: 33 लाख में से 60% से ज़्यादा मामलों का हुआ निपटारा - Vibes Of India

Gujarat News, Gujarati News, Latest Gujarati News, Gujarat Breaking News, Gujarat Samachar.

Latest Gujarati News, Breaking News in Gujarati, Gujarat Samachar, ગુજરાતી સમાચાર, Gujarati News Live, Gujarati News Channel, Gujarati News Today, National Gujarati News, International Gujarati News, Sports Gujarati News, Exclusive Gujarati News, Coronavirus Gujarati News, Entertainment Gujarati News, Business Gujarati News, Technology Gujarati News, Automobile Gujarati News, Elections 2022 Gujarati News, Viral Social News in Gujarati, Indian Politics News in Gujarati, Gujarati News Headlines, World News In Gujarati, Cricket News In Gujarati

Vibes Of India
Vibes Of India

दिल्ली में मतदाता सूची को अपडेट करने के अभियान में आई तेज़ी: 33 लाख में से 60% से ज़्यादा मामलों का हुआ निपटारा

| Updated: October 13, 2026 17:04

दिल्ली सीईओ कार्यालय ने मतदाता सूची में नाम शामिल करने की प्रक्रिया को किया आसान। घर-घर जाकर सत्यापन कर रहे हैं बीएलओ, 4 दिसंबर को प्रकाशित होगी अंतिम सूची।

दिल्ली मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) कार्यालय के अनुसार, राष्ट्रीय राजधानी में मतदाता सूची में बने रहने की अपनी योग्यता साबित करने के लिए नोटिस प्राप्त करने वाले 33 लाख मतदाताओं में से 20 लाख (60% से अधिक) के मामलों का निपटारा कर दिया गया है।

अंतिम मतदाता सूची 4 दिसंबर को प्रकाशित की जानी है, जिसके लिए सीईओ कार्यालय के पास अभी 50 दिनों से अधिक का समय है। इस तिथि को 26 सितंबर को चौथी बार संशोधित किया गया था।

31 अगस्त को मसौदा सूची प्रकाशित होने के बाद, शुरुआत के 30 दिनों (29 सितंबर तक) में केवल 4 लाख नोटिस ही निपटाए जा सके थे, जो एक धीमी प्रक्रिया थी।

हालाँकि, हालिया आंकड़ों से पता चलता है कि अगले 12 दिनों में लगभग 16 लाख नोटिस (प्रति दिन लगभग 1.33 लाख) का समाधान किया गया।

सोमवार तक निपटाए गए 20 लाख मामलों में वे मतदाता शामिल हैं जिनका सत्यापन किया जा चुका है और जिनके नाम अंतिम सूची में शामिल होंगे, साथ ही वे भी जिनके दावे खारिज कर दिए गए हैं। यह प्रक्रिया 30 नवंबर तक जारी रहेगी।

सीईओ कार्यालय ने सोमवार को जानकारी दी कि इन नोटिसों को हल करने के लिए एक सक्रिय अभियान शुरू किया गया है।

अधिकारियों ने पिछले कुछ हफ्तों में निपटान की गति में इस तेज़ वृद्धि का श्रेय नियमों में दी गई ढील, अधिक अधिकारियों की भागीदारी, और बूथ-लेवल अधिकारियों (बीएलओ) के लिए तय किए गए सख्त लक्ष्यों को दिया है। बीएलओ भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) द्वारा नियुक्त स्थानीय सरकारी अधिकारी होते हैं, जो प्रत्येक मतदान केंद्र के लिए मतदाता सूची के संरक्षक के रूप में कार्य करते हैं।

30 जून को मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) शुरू होने से पहले दिल्ली में लगभग 1.45 करोड़ मतदाता थे। इनमें से 97.5 लाख को 31 अगस्त को प्रकाशित मसौदा मतदाता सूची में शामिल किया गया था।

लगभग 47.5 लाख मतदाताओं (एसआईआर-पूर्व संख्या का लगभग एक तिहाई) को “अप्राप्य” के रूप में वर्गीकृत किया गया था। यह वर्गीकरण बीएलओ द्वारा उन्हें अनुपस्थित पाने, उनके स्थानांतरित होने, मृत्यु हो जाने, या उनकी दोहरी प्रविष्टियां पाए जाने के बाद किया गया। इन नामों को सूची से हटा दिया गया है।

मसौदा सूची में जगह बनाने वाले 97.5 लाख मतदाताओं में से लगभग 33.1 लाख (लगभग 34%) को नोटिस भेजकर यह साबित करने के लिए सबूत मांगे गए थे कि वे अंतिम सूची में शामिल होने के योग्य हैं।

इनमें से 13.79 लाख मतदाताओं को इसलिए चिह्नित किया गया क्योंकि वे 2002 के पिछले एसआईआर की मतदाता सूची से खुद को नहीं जोड़ सके थे, जबकि 19.33 लाख से अधिक मतदाताओं को उनके फॉर्म में “तार्किक विसंगतियों” के कारण चिह्नित किया गया था।

शुरुआत में, चिह्नित मतदाताओं को 13 निर्धारित दस्तावेज़ों में से किसी एक के साथ अपने निर्धारित समय पर स्थानीय निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (ईआरओ) के कार्यालय में जाना आवश्यक था।

हालांकि, 26 सितंबर को हुई बैठक में चुनाव आयोग ने सुनवाई की प्रक्रिया को काफी सरल बना दिया।

आयोग के एक बयान के अनुसार, जिन मतदाताओं को “तार्किक विसंगतियों” और “अनमैप्ड” होने के लिए नोटिस जारी किए गए थे, उन्हें अब अपनी पात्रता साबित करने के लिए स्थानीय कार्यालय में उपस्थित होने की आवश्यकता नहीं होगी।

इसके बजाय, बीएलओ नोटिस प्राप्त करने वालों से दस्तावेज़ एकत्र करने के लिए घर-घर जाएंगे।

ऑनलाइन सुनवाई की सुविधा को बेहतर बनाया गया, और यह घोषणा की गई कि नोटिस प्राप्त करने वाले व्यक्तियों के परिवार के सदस्य उनकी ओर से उपस्थित हो सकते हैं।

इसके अलावा, मतदाता सूची में शामिल करने के लिए मतदाताओं को मंजूरी देने वाले ईआरओ पोर्टल में भी बदलाव किया गया। 30 सितंबर से, ईआरओ बिना सुनवाई के नोटिस का निपटारा कर सकते हैं; इसके लिए बीएलओ द्वारा मतदाता के विवरण से संतुष्ट होने का एक पत्र ही पर्याप्त है।

इससे पहले 24 सितंबर को, सहायक ईआरओ की संख्या 297 से बढ़ाकर 902 कर दी गई थी। इनमें अक्सर स्कूल के प्रिंसिपल शामिल होते हैं, जिन्हें नोटिस निपटाने का भी अधिकार होता है।

20 सितंबर से राजधानी में हर सप्ताहांत नोटिस का निपटारा करने के लिए विशेष शिविर लगाए जा रहे हैं। इन शिविरों में बेघर लोगों, विस्थापन के शिकार लोगों, ट्रांसजेंडर समुदाय और यौनकर्मियों जैसे विशेष रूप से कमजोर समूहों को शामिल करने का प्रयास किया गया है।

दिल्ली मेट्रो में होर्डिंग, रेडियो जिंगल, विज्ञापनों और घोषणाओं के माध्यम से जागरूकता अभियान भी चलाए जा रहे हैं।

एक अधिकारी के अनुसार, बीएलओ को हर दिन कम से कम 10 सुनवाई आयोजित करने का लक्ष्य दिया गया है। कई बीएलओ का कहना है कि पोर्टल के काम करने के तरीके से परिचित हो जाने के कारण मामलों का निपटारा अब तेज़ी से हो रहा है।

झारखंड, मिजोरम, सिक्किम, पश्चिम बंगाल, बिहार, पुडुचेरी, उत्तराखंड और गुजरात सहित कम से कम आठ अन्य राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के सीईओ ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर यह सुनिश्चित करने के बारे में पोस्ट किया है कि कोई भी पात्र मतदाता मतदाता सूची से बाहर न रहे।

इन सीईओ ने भी इस बात पर प्रकाश डाला है कि यह सुनिश्चित करने के लिए सभी बूथों पर “सक्रिय अभियान” और “विशेष शिविर” आयोजित किए जा रहे हैं।

यह भी पढ़ें-

खतरे में पैदल यात्री: गुजरात की सड़कें बनीं कब्रगाह, 10 साल में मौतों का आंकड़ा 145% बढ़ा

क्या ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के प्रदर्शन में शामिल होने पर इमरान खान होंगे डिपोर्ट? जानिए क्या कहते हैं OCI निय…

Your email address will not be published. Required fields are marked *