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ग्लोबल AI हब बनेगा भारत: अडानी एंटरप्राइजेज और Jabil के बीच डेटा सेंटर हार्डवेयर बनाने के लिए बड़ा समझौता

| Updated: October 13, 2026 21:21

भारत को दुनिया के ग्लोबल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डेटा सेंटर इंफ्रास्ट्रक्चर का सबसे बड़ा केंद्र बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। अडानी ग्रुप की फ्लैगशिप कंपनी अडानी एंटरप्राइजेज लिमिटेड और दिग्गज ग्लोबल इंजीनियरिंग व मैन्युफैक्चरिंग कंपनी जाबिल इंक (Jabil Inc.) ने एक बड़े समझौते (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं।

इस अहम करार के तहत दोनों कंपनियां 50:50 का ज्वाइंट वेंचर (JV) स्थापित करेंगी। इस साझेदारी का मुख्य उद्देश्य भारत में मल्टी-गीगावाट क्षमता वाला एक विशाल AI इंफ्रास्ट्रक्चर प्लेटफॉर्म तैयार करना है, जिसके तहत AI उपकरणों का निर्माण और असेंबलिंग देश में ही की जाएगी।

यह नया वेंचर भारत की तेजी से बढ़ती डेटा सेंटर मांग को पूरा करेगा। इंडस्ट्री के अनुमानों के मुताबिक साल 2030 तक भारत की डेटा सेंटर क्षमता 5 से 8 गीगावाट (GW) तक पहुंच जाएगी। इसके साथ ही डेटा सेंटर, क्लाउड और AI इकोसिस्टम में हाइपरस्केलर्स द्वारा 50 अरब डॉलर से अधिक का निवेश किए जाने की उम्मीद है।

कंपनियों का मानना है कि ग्लोबल स्तर पर अगले सात वर्षों में यह मार्केट 3 ट्रिलियन डॉलर के पार जा सकता है। यह ज्वाइंट वेंचर ‘मेड-इन-इंडिया’ विजन के तहत दुनिया के प्रमुख हाइपरस्केलर्स, डेटा सेंटर ऑपरेटरों और बड़े उद्यमों को विश्वस्तरीय इंफ्रास्ट्रक्चर मुहैया कराएगा।

इस मौके पर अडानी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अडानी ने कहा कि AI क्रांति के लिए सिर्फ एल्गोरिदम में सफलता ही काफी नहीं है, बल्कि इसके लिए एक बिल्कुल नए इंडस्ट्रियल आर्किटेक्चर की जरूरत होगी। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस नई अर्थव्यवस्था को ताकत देने के लिए एनर्जी, हाइपरस्केल इंफ्रास्ट्रक्चर और सटीक मैन्युफैक्चरिंग को एक साथ आना होगा।

गौतम अडानी ने आगे कहा कि उनका विजन AI इंफ्रास्ट्रक्चर को पावर देने से आगे बढ़कर इसकी क्रिटिकल प्रणालियों की इंजीनियरिंग और निर्माण करना है। उन्होंने जाबिल के साथ इस साझेदारी को भविष्य की ओर एक रणनीतिक कदम बताया, जो भारत को ग्लोबल AI इकॉनमी की भौतिक रीढ़ बनाने में मदद करेगा।

जाबिल इंक के सीईओ माइक दस्तूर ने इस डील को लेकर कहा कि यह भारत में एक स्केल्ड AI इंफ्रास्ट्रक्चर मैन्युफैक्चरिंग प्लेटफॉर्म स्थापित करने की दिशा में अगला कदम है। उन्होंने कहा कि जाबिल की 60 वर्षों की इंजीनियरिंग विशेषज्ञता और अडानी ग्रुप की इंफ्रास्ट्रक्चर-एनर्जी की ताकत मिलकर भारत और दुनिया भर में बेहतरीन डेटा सेंटर सॉल्यूशंस प्रदान करेगी।

इस ज्वाइंट वेंचर के जरिए डेटा सेंटर्स के लिए बेहद जरूरी AI रैक, सर्वर, स्टोरेज और नेटवर्किंग इक्विपमेंट बनाए जाएंगे। इसके अलावा पोर्टफोलियो में उपकरणों को बिजली देने और ठंडा रखने वाले पावर डिस्ट्रीब्यूशन यूनिट्स, लिक्विड-कूलिंग सिस्टम और ट्रांसफॉर्मर भी शामिल होंगे। यह वेंचर ग्राहकों को इंस्टॉलेशन और कमीशनिंग की सेवाएं भी देगा।

यह पहल अडानी ग्रुप के उस विजन से भी पूरी तरह मेल खाती है, जिसके तहत 2035 तक 5 गीगावाट के ग्रीन-एनर्जी आधारित ‘हाइपरस्केल AI-रेडी’ डेटा सेंटर्स विकसित करने के लिए 100 अरब डॉलर के निवेश का लक्ष्य रखा गया है। इसके अलावा भारत का नया डेटा प्रोटेक्शन एक्ट 2023 और केंद्रीय बजट 2026 में 2047 तक घोषित टैक्स छूट इस घरेलू डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश को कानूनी और आर्थिक मजबूती देंगे।

वित्तीय वर्ष 2026 में 36 अरब डॉलर का भारी भरकम राजस्व दर्ज करने वाली जाबिल के लिए भी यह भारत के डेटा सेंटर मार्केट में अपने कदम मजबूत करने का बड़ा मौका है।

जाबिल ने हाल ही में पावर सॉल्यूशंस देने वाली हैनले एनर्जी ग्रुप और लिक्विड-कूलिंग तकनीक में माहिर माइक्रोस टेक्नोलॉजीज का भी अधिग्रहण किया है, जो इस नई डील को तकनीकी तौर पर और अधिक मजबूत बनाएगा। दोनों कंपनियों ने इससे पहले जून 2026 में भी रणनीतिक गठबंधन बनाने की अपनी मंशा जाहिर की थी, जो अब एक ठोस आकार ले चुका है।

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