अहमदाबाद शहर में अभी कड़ाके की सर्दियां शुरू भी नहीं हुई हैं, लेकिन आसमान पर धुंध की एक मोटी चादर छाने लगी है। शहर के कई हिस्सों में हवा की गुणवत्ता तेजी से गिर रही है। फिलहाल न्यूनतम तापमान 25 से 26 डिग्री सेल्सियस और अधिकतम 37 डिग्री के आसपास बना हुआ है, फिर भी प्रदूषण का स्तर लगातार बढ़ रहा है, जिसमें मुख्य प्रदूषक के रूप में PM10 कणों की पहचान की गई है।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के आंकड़ों के अनुसार, रविवार रात करीब 10 बजे अहमदाबाद का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 252 दर्ज किया गया। हालांकि, शहर का यह औसत आंकड़ा कुछ खास इलाकों की बेहद खराब होती स्थिति की असल तस्वीर पेश नहीं करता है।
रियल-टाइम एयर क्वालिटी ट्रैक करने वाली वेबसाइट aqi.in के मुताबिक, 11 स्थानों पर वायु प्रदूषण का स्तर ‘गंभीर’ श्रेणी में पहुंच चुका है। रविवार रात 10 बजे के आसपास शहर का लाइव समग्र AQI 276 रहा, जिसे ‘अस्वास्थ्यकर’ माना जाता है। इस दौरान PM2.5 (2.5 माइक्रोन के धूल कण) का औसत स्तर 121 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर (µg/m³) और PM10 (10 माइक्रोमीटर तक के कण) का स्तर 163 µg/m³ दर्ज किया गया।
रविवार रात करीब 9:45 बजे ग्यासपुर में शहर का सबसे अधिक PM10 स्तर 189 µg/m³ (AQI 314) रिकॉर्ड किया गया। इसके ठीक बाद अडालज-कोबा हाईवे स्थित आम बाग में 185.39 µg/m³ और एप्पलवुड्स टाउनशिप मेन रोड पर 182.84 µg/m³ प्रदूषण दर्ज हुआ। इन सबके बीच बावला एकमात्र ऐसा इलाका रहा जहां स्थिति ‘मध्यम’ श्रेणी में थी। वहां का AQI 83, PM2.5 का स्तर 50 µg/m³ और PM10 का स्तर 65 µg/m³ मापा गया।
रविवार को दिनभर PM2.5 के स्तर में काफी उतार-चढ़ाव देखा गया। शाम 4:01 बजे यह अपने 24 घंटे के न्यूनतम स्तर 52 µg/m³ पर था, जबकि रात 9:31 बजे उछाल के साथ 126 µg/m³ तक पहुंच गया। सुबह के समय भी ट्रैफिक और वायुमंडलीय परिस्थितियों के कारण 10:01 बजे यह 122 µg/m³ के उच्च स्तर पर था। दोपहर की गर्मी में प्रदूषक कणों के वायुमंडल में फैलने से थोड़ी राहत मिली थी, लेकिन शाम के ट्रैफिक और ठंडी हवाओं ने प्रदूषकों को फिर से कैद कर लिया।
शहर के गोटा, चांदखेड़ा, बोपल, विमाननगर और अहमदाबाद कैंटोनमेंट सहित 11 मोहल्लों में हवा की गुणवत्ता ‘गंभीर’ रही, जहां AQI 308 से 364 के बीच दर्ज किया गया। मुख्य रूप से PM10 का बढ़ता स्तर सड़क की धूल, निर्माण कार्यों और मिट्टी जैसे मोटे कणों से जुड़ा होता है। पर्यावरणविद् महेश पंड्या का कहना है कि शहर में इमारतों से लेकर सड़कों और पुलों तक हर जगह धड़ल्ले से निर्माण कार्य चल रहा है।
पंड्या ने स्पष्ट किया कि खुले में पड़ी निर्माण सामग्री, मलबा, खुदाई और भारी वाहनों की आवाजाही हवा में धूल घोलने का काम करती है। उन्होंने बताया कि अहमदाबाद नगर निगम (AMC) ने निर्माण स्थलों को हरे जाल या डस्ट-प्रूफ सामग्री से ढंकना अनिवार्य किया है, लेकिन इसके पालन पर गंभीर सवालिया निशान हैं। इसके अलावा, शहरी हरियाली में भारी कमी आई है, जो पहले धूल के कणों को सोखने का काम करती थी।
प्रदूषण को रोकने के लिए निर्माण सामग्री को ढंकना, मलबा तुरंत हटाना, तोड़फोड़ के दौरान धूल को नियंत्रित करना और गाड़ियों के जरिए सड़कों पर आने वाली मिट्टी को रोकना बेहद जरूरी है। ठंडे मौसम के कारण प्रदूषक तत्व हवा में ऊपर नहीं जा पाते हैं, जिसका सीधा असर सेहत पर पड़ रहा है।
वरिष्ठ चिकित्सक कमलेश नायक ने बताया कि शहर की ओपीडी में नवरात्रि से जुड़े मरीजों की संख्या में तेजी से वृद्धि हुई है। धूल से होने वाली एलर्जी के मामले बढ़ रहे हैं और नवरात्रि के खत्म होने के बाद इसमें एक बड़ा उछाल आने की आशंका है। भीड़भाड़ वाले आयोजनों के कारण फ्लू के मामले भी बढ़े हैं, हालांकि तेज बुखार के मरीज फिलहाल अपेक्षाकृत कम हैं।
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