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ग्लोबल वार्मिंग का अलर्ट: गुजरात में 1951 से हर दशक में जुड़े 2.3 गर्म दिन, रातें भी हो रहीं उबलती हुई

| Updated: October 19, 2026 13:09

IMD और ICAR की रिसर्च में बड़ा खुलासा: 1951 के बाद से लगातार उबल रहा है गुजरात, दिनों के साथ रातें भी हो रही हैं बेतहाशा गर्म।

अक्टूबर का महीना आधा बीत चुका है, लेकिन गुजरात में सर्दियों की हल्की ठंड का भी नामोनिशान नहीं है। तापमान के आंकड़े खुद इस बात की गवाही दे रहे हैं। बीते छह दिनों से अहमदाबाद का अधिकतम तापमान लगातार 37 डिग्री सेल्सियस से ऊपर बना हुआ है। वहीं, राजकोट और भुज जैसे शहरों में तो पारा 40 डिग्री सेल्सियस के भी पार दर्ज किया गया है।

इस क्षेत्र के दीर्घकालिक जलवायु परिवर्तन पर किए गए एक अध्ययन में कई चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। ‘स्पेसियोटेम्पोरल इवोल्यूशन ऑफ टेम्परेचर एक्सट्रीम्स अक्रॉस इंडियाज एग्रो-क्लाइमेटिक जोन्स’ नामक इस रिसर्च के अनुसार, 1951 से 2025 के बीच हर दशक में 35 डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक तापमान वाले दिनों की संख्या में लगभग 2.3 की वृद्धि हुई है। अध्ययन यह भी बताता है कि रातें भी लगातार गर्म हो रही हैं। इस अवधि के दौरान हर दशक में 20 डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक न्यूनतम तापमान वाली रातों की संख्या भी 1.5 बढ़ी है।

यह महत्वपूर्ण रिसर्च हाल ही में ‘इंटरनेशनल जर्नल ऑफ क्लाइमेटोलॉजी’ में प्रकाशित हुई है। इसे भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के आशुतोष कुमार मिश्रा, सुधीर कुमार मिश्रा और अन्य विशेषज्ञों की टीम ने मिलकर तैयार किया है।

आईएमडी के एग्रोमेट एडवाइजरी सर्विसेज डिवीजन में वैज्ञानिक-ई और इस अध्ययन के प्रमुख लेखक डॉ. मिश्रा ने बताया कि उनकी टीम ने 1951 से 2025 तक भारत के 14 कृषि-जलवायु क्षेत्रों के दैनिक तापमान का गहराई से विश्लेषण किया है। ये क्षेत्र मिट्टी, बारिश और खेती के प्रकार के आधार पर बांटे गए हैं।

उन्होंने स्पष्ट किया कि ये नतीजे पूरे जोन के लिए हैं, न कि किसी एक राज्य के लिए। गुजरात मुख्य रूप से ‘गुजरात प्लेन्स एंड हिल्स’ जोन में आता है, जबकि इसका कुछ हिस्सा पड़ोसी ‘वेस्टर्न ड्राई रीजन’ में भी शामिल है।

‘गुजरात प्लेन्स एंड हिल्स’ क्षेत्र के आंकड़ों पर बात करते हुए डॉ. मिश्रा ने बताया कि यहां साल की सबसे ठंडी रात भी हर दशक में लगभग 0.17 डिग्री सेल्सियस गर्म हो रही है। वहीं, साल का सबसे गर्म दिन प्रति दशक 0.14 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ रहा है। हालांकि, दिन और रात के तापमान के बीच के अंतर में कोई खास बदलाव नहीं आया है।

कपास के मौसम (अप्रैल-अक्टूबर) के दौरान संचित गर्मी (हीट यूनिट्स) में भी प्रति दशक लगभग 21.6 की वृद्धि दर्ज की गई है। डॉ. मिश्रा ने कहा कि इससे मौसम के लगातार गर्म होने का पता चलता है, लेकिन उन्होंने फसल की पैदावार का अध्ययन नहीं किया है, इसलिए सीधे तौर पर पैदावार में गिरावट की बात नहीं कही जा सकती।

शोधकर्ताओं का कहना है कि भारत के अन्य हिस्सों की तुलना में इस क्षेत्र में तापमान वृद्धि काफी चिंताजनक है। यदि उत्तर भारत के गंगा के मैदानी इलाकों से तुलना करें, तो वहां दिन का अधिकतम तापमान नहीं बढ़ा है, बल्कि कुछ जगहों पर तो इसमें गिरावट ही आई है। वहां दिन की तुलना में रातें ज्यादा तेजी से गर्म हो रही हैं, जिसे भारी सिंचाई के प्रभाव से जोड़कर देखा जा रहा है। दूसरी ओर, भारत के दक्षिणी और तटीय क्षेत्रों में रातों की अपेक्षा दिन अधिक गर्म हो रहे हैं।

यह पूरा डेटा 1 डिग्री ग्रिड (लगभग 100 किलोमीटर) से लिया गया है, जो किसी शहर या जिले के बजाय एक बड़े क्षेत्रीय पैटर्न को दर्शाता है। अध्ययन का मुख्य फोकस इस बात पर था कि तापमान का यह बदलाव प्रमुख फसलों को कैसे प्रभावित करता है। ‘गुजरात प्लेन्स एंड हिल्स’ की प्रमुख उपज कपास, मूंगफली और डेयरी उत्पाद हैं।

रिसर्च के अनुसार, गुजरात में कपास और पंजाब-हरियाणा के कुछ हिस्सों में गेहूं के लिए थर्मल वातावरण में महत्वपूर्ण बदलाव देखे गए हैं। हालांकि, शोधकर्ताओं ने यह भी स्पष्ट किया कि फसलों पर इसके वास्तविक प्रभाव को अभी तक रिकॉर्ड नहीं किया गया है।

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