गुजरात में औद्योगिक और व्यावसायिक गतिविधियों के तेजी से बढ़ने के साथ ही बिजली की खपत भी लगातार आसमान छू रही है। शुक्रवार को राज्य में बिजली की मांग अपने ऐतिहासिक उच्च स्तर 29,822 मेगावाट पर पहुंच गई। अब यह भारी मांग केवल गर्मियों तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि अक्टूबर महीने की खपत ने जून के उच्चतम स्तर को भी पीछे छोड़ दिया है।
इस बढ़ती जरूरत को पूरा करने के लिए गुजरात सरकार ने केंद्रीय ग्रिड से अधिक बिजली और अतिरिक्त कोयला आपूर्ति की मांग की है। ऊर्जा और पेट्रोकेमिकल्स विभाग के प्रमुख सचिव अश्विनी कुमार ने बताया कि राज्य ने संभावित आपूर्ति अंतर को पाटने के लिए केंद्रीय मंत्रालयों के साथ समन्वय शुरू कर दिया है। सरकार ने ऊर्जा मंत्रालय से केंद्रीय ग्रिड से बड़ा कोटा आवंटित करने का अनुरोध किया है और कोयला मंत्रालय से भी अतिरिक्त कोयले की गुहार लगाई है।
अश्विनी कुमार के अनुसार हालिया रुझानों को देखते हुए आने वाले दिनों और खासकर गर्मियों के मौसम में मांग उच्च स्तर पर बने रहने की आशंका है। इसके मद्देनजर बिना किसी रुकावट के बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए राज्य ने अग्रिम योजना पर काम शुरू कर दिया है। इस साल राज्य में बिजली की मांग में अप्रत्याशित वृद्धि देखी गई है।
जून महीने में राज्य की अधिकतम मांग 26,834 मेगावाट से 28,833 मेगावाट के बीच थी, जो अक्टूबर में बढ़कर सीधे 29,822 मेगावाट तक पहुंच गई। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, जून 2025 में गुजरात में बिजली की खपत 529 मिलियन यूनिट (एमयू) थी, जो एक साल बाद जून 2026 में बढ़कर 586 एमयू हो गई। अधिकारियों का मानना है कि उद्योगों के विस्तार और घरेलू बिजली उपयोग में निरंतर वृद्धि के कारण ही यह नया रिकॉर्ड कायम हुआ है।
पिछले पांच वर्षों में राज्य ने बिजली खपत में लगभग 12 प्रतिशत की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (CAGR) दर्ज की है, जबकि पिछले तीन वर्षों में यह आंकड़ा लगभग 10 प्रतिशत रहा है। इन स्पष्ट रुझानों के आधार पर योजनाकारों का अनुमान है कि अगले साल बिजली की अधिकतम मांग में 10 प्रतिशत की और वृद्धि होगी। इस तेज वृद्धि के परिणामस्वरूप, वर्ष 2027 तक राज्य की अधिकतम जरूरत 32,500 मेगावाट के स्तर को भी पार कर सकती है।
इस बीच बढ़ती मांग के कारण विनिर्माण क्लस्टरों में बिजली आपूर्ति बाधित होने को लेकर उद्योग प्रतिनिधियों ने गंभीर चिंता व्यक्त की है। साणंद और दहेज जैसे प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों से बिजली लड़खड़ाने की खबरें सामने आई हैं। साणंद इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के एक पदाधिकारी ने अपने औद्योगिक एस्टेट में काम कर रहे सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSME) के लिए निर्बाध बिजली आपूर्ति की मांग की है।
मौजूदा उद्योगों के अलावा, राज्य सरकार इस दशक के अंत में डेटा सेंटरों और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) से जुड़े कंप्यूटिंग लोड के कारण होने वाली भारी बढ़ोतरी के लिए भी खुद को तैयार कर रही है। एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, डेटा सेंटर और एआई बूम का असली असर 2029 के बाद साफ तौर पर दिखाई देगा। इस नए तकनीकी सेगमेंट के कारण 2030 से अगले पांच वर्षों तक हर साल बिजली की मांग में लगभग 1,500 मेगावाट का अतिरिक्त इजाफा होने का अनुमान है।
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