राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कांग्रेस को यह प्रमाणित किया है कि वर्तमान समय में ऐसी छूट देना संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रीय हित में है।
करीब छह दिन पहले अमेरिका में रूस से डीजल आयात को मंजूरी मिली थी। इसके बाद, शनिवार (17 अक्टूबर, 2026) की सुबह राष्ट्रपति ट्रंप ने उस कानून में बड़ी छूट देने की घोषणा की, जिसमें रूसी कच्चे तेल या प्राकृतिक गैस खरीदने वाले देशों पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाने का सख्त प्रावधान था।
यह टैरिफ कानून 18 अक्टूबर से लागू होने वाला था। इसका मुख्य उद्देश्य रूस को मिलने वाले तेल राजस्व के प्रवाह को रोकना और उस पर आर्थिक दबाव बढ़ाना था।
ट्रंप प्रशासन की यह ताजा छूट अप्रत्यक्ष रूप से भारत की तेल खरीद रणनीति के लिए एक बहुत बड़ी राहत लेकर आई है। यह कदम ऐसे समय में एक सकारात्मक संकेत दे रहा है जब दोनों देश अपने लंबे समय से रुके हुए व्यापार समझौते के पहले हिस्से को अंतिम रूप देने की कोशिश कर रहे हैं।
पश्चिम एशिया में चल रहे टकराव के कारण वहां से होने वाली पारंपरिक तेल आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हुई है। इसी संकट को देखते हुए भारतीय रिफाइनरियों ने प्रमुख रूप से रूसी तेल और अन्य विकल्पों का रुख किया था।
जुलाई के महीने में भारत के कुल आयात में रूसी तेल की हिस्सेदारी 50 प्रतिशत के पार चली गई थी। हालांकि, अगस्त में संयुक्त अरब अमीरात, अमेरिका और वेनेजुएला से तेल की आवक तेज होने के बाद यह आंकड़ा थोड़ा घटकर 44 प्रतिशत पर आ गया।
रियल-टाइम एनालिटिक्स डेटा प्रदाता केपलर (Kpler) के आंकड़ों के अनुसार, मौजूदा समय में भारत के कुल कच्चे तेल आयात में रूस की हिस्सेदारी लगभग 35 प्रतिशत बनी हुई है।
भारत के साथ-साथ चीन भी रूस से तेल खरीदने वाले सबसे बड़े देशों की सूची में शामिल है। चीन के कुल तेल आयात में मॉस्को की हिस्सेदारी करीब 30 प्रतिशत रही है।
पश्चिम एशिया में फिर से भड़के तनाव के बीच प्रतिबंध-मुक्त रूसी तेल की आसान पहुंच वैश्विक तेल बाजार की आपूर्ति श्रृंखला को काफी हद तक राहत पहुंचा सकती है।
बाजार के आंकड़ों पर नजर डालें तो शुक्रवार को बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड वायदा 0.8 प्रतिशत की मजबूती के साथ 109.95 डॉलर प्रति बैरल के भाव पर बंद हुआ था।
यह नई ‘छूट’ खुद अमेरिका के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। हाल के दिनों में वहां डीजल और गैसोलीन दोनों की कीमतों में जबरदस्त उछाल आया है, जो आगामी मध्यावधि चुनावों से ठीक पहले प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया था।
इसी उलझन के बीच, 10 अक्टूबर को ट्रंप ने देश में रूसी डीजल के आयात से जुड़े एक समझौते का ऐलान किया था। उनका तर्क था कि इस फैसले से वैश्विक स्तर के साथ-साथ पूरे उत्तरी अमेरिका में डीजल की कीमतें नीचे आएंगी।
उन्होंने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर पोस्ट करते हुए स्पष्ट किया कि अमेरिकियों, खासकर देश के महान किसानों, पशुपालकों और ट्रक ड्राइवरों के लिए महंगाई कम करना उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है।
अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) के एक हालिया विश्लेषण में भी इस संकट की गहराई का जिक्र किया गया था। रिपोर्ट के मुताबिक, मध्य पूर्व से डीजल निर्यात में लगातार आ रही रुकावटों और रूस व कुछ एशियाई देशों से घटी आपूर्ति के कारण साल की दूसरी छमाही में वैश्विक उपलब्धता प्रतिदिन 1.5 मिलियन बैरल तक गिर गई थी।
इस भारी कमी के कारण पूरी दुनिया का डीजल बाजार बेहद चरम दबाव की स्थिति से गुजर रहा था, जिसे अब इस नई छूट से थोड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
यह भी पढ़ें-
फ्लोरिडा: चोरी के शक में 14 वर्षीय किशोर पर गुजराती मूल के शख्स ने चढ़ाई गाड़ी, तड़पता छोड़ भागा











